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परिणय निर्णयविपुल वैवाहिक सुख का आधार : उपयुक्त परिहार
₹320.00परंपरागतगत विवाह समाज और विधि द्वारा परिवार की पूर्णता तथा निरन्तरता का सुरमित मधुवन है, जिसे व्यक्ति का मिथ्याभिमान तथा स्वार्थपरता के विषैले दंश, अपमान, कुण्ठा, कटुता, करुणा की कालिमा से कलंकित करके प्रायः विसंगतिपूर्ण स्वरूप प्रदान कर देते हैं तथा जिसके कारण विधाता द्वारा प्रदत्त वैवाहिक सुख, विवाह विच्छेद की विकृति से अभिशप्त हो विकृत है
ग्रहों का नकारात्मक स्पंदन, प्रायः नवविवाहिता के जीवन का करुण क्रन्दन बनकर उसके दुर्भाग्य के दुर्दमनी दारुण दुःख के प्रकम्पित कर देने वाले समीकरणों की संरचना कर देता है जिसका सतर्क, वैवाहिक सुख की रक्षा कर सकता है। इसके लिए आवश्यकता है, उपयुक्त परिहार के परिज्ञान और उसके सविधि अनुसरण की, जो इस कृति का वैशिष्ट्य है। इस प्रकार की वैवाहिक विसंगति, विवाह विच्छेद एवं वैधव्य प्रदान करने वाले विविध नकारात्मक ग्रहों का अनुभूत और अद्भुत समाधान, जो भारतवर्ष की प्राचीन ऋषि चेतना, द्वारा हमें समय-समय पर प्राप्त होता रहा है, वह विपुल वैवाहिक सुख का आधार : उपयुक्त परिहार शीर्षांकित इस कृति में अनुमान किया गया है। इन परिहारों का सविधि-सतर्क अनुसरण, समस्त जिज्ञासुओं तथा इनके अनुपालन परिष्कृत का वैवाहिक जीवन, विपुल वैवाहिक सुख से अभिरंजित अभिगुंजित कर देगा
विविध वैवाहिक विसंगतियों की व्यापक विचारों का सुगम एवं सटीक समाधान प्रदान करने वाला यह ग्रन्थ अन्य ग्रहों के अतिरिक्त प्रबल मंगली दोष से आक्रान्त जातक-जातिकाओं के सुखी, पूर्ण एवं समृद्ध वैवाहिक जीवन की उपलब्धि हेतु अन्यान्य अनुभूत परिहार प्रावधान भी प्रस्तुत करता है।
कृति को विभिन्न वैवाहिक विसंगतियों के आधार पर अग्रांकित पाँच अध्यायों में व्याख्यायित विभाजित किया गया है: 1. परिहार परिज्ञान एवं मंत्र आराधना; 2. वैवाहिक विच्छेद एवं वैधव्य से रक्षार्थ मंत्र उपासना; 3. वैवाहिक विसंगतियों के समाधान हेतु विविध स्तोत्र; 4. मंगली दोष के अभंगलकारी परिणाम हेतु परिहार विधान, तथा 5, व्रत का अनुसरण : वैवाहिक विसंगतियों का शमन
यह कृति समस्त दम्पत्तियों के अतिरिक्त, वरिष्ठ पाठकों, जिज्ञासु ज्योतिष प्रेमियों, ज्योतिषशास्त्र के अध्येतों व विद्यार्थियों के लिए पठनीय, अनुकरणीय तथा संग्रहणीय ग्रन्थ है जिसमें सन्निहित समस्त परिहार वेदविहित, पुराणगर्मित, आचार्य और शास्त्रानुमोदित होने के साथ-साथ अनुभूत हैं जिनके अनुकरण से वैवाहिक सुख के पार्श्व आलोक से साधकों का वैवाहिक जीवन जगमगा उठेगा और उनके परिणय और प्रणय में प्रेम की सुरभित सुगन्ध सदा महकती रहेगी।
₹400.00 -
परिणय निर्णयविवाह समय संज्ञान
₹350.00समस्त सांसारिक कर्त्तव्यों के निर्वाह हेतु विवाह एक संकल्प है जो तन-मन और मस्तिष्क को, कर्तव्य और प्रेम की भावना से आलोकित, आंदोलित, प्रमुदित व प्रफुल्लित करता है। विवाह एक संस्कार है जिसे सर्वत्र शास्त्र, समाज, संस्कृति एवं न्याय की सहमति, अनुमति प्राप्त है। विवाह समय संज्ञान नामक यह कृति उन अन्यान्य संकल्पों और ज्योतिष प्रेमियों के प्रबल अनुरोध का प्रतिफल है, जो विवाह प्रतिपादन के सटीक समय से संदर्भित, प्रामाणिक, प्रतिष्ठित शोध सिद्धान्तों के अभाव में अंकुरित, प्रस्फुटित हुए थे, जिनके क्रियान्वयन और अनुकरण द्वारा विवाह का सटीक समय सरलता से रेखांकित किया जा सकता है। हमारे समाज में सदा से ही व्याप्त विवाह के असंतुलित समीकरण के संज्ञान के सम्यक् समाधान से अभिपूरित यह कृति, विवाह काल निर्धारण हेतु हीरक हस्ताक्षर सिद्ध होगी। विवाह जीवन को दो पृथक-पृथक् भागों में विभाजित करता है। प्रथम विवाह के पूर्व का जीवन, द्वितीय- विवाह के उपरान्त का जीवन। अतः विवाह प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण घटना है और इस विषय में भी अधिकांश ज्योतिर्विदों का भविष्यकथन प्रायः मिथ्या सिद्ध होता है जो ज्योतिष विज्ञान की प्रामाणिकता के समक्ष प्रश्नचिहन लगा देता है। विवाह का सटीक समय रेखांकित न कर सकने का कारण इस विषय का अपूर्ण ज्ञान और अनभिज्ञता ही है। कदाचित आज तक किसी ने भी विवाह समय संज्ञान के संदर्भमें इतने तलस्पर्शी, सघन शोध प्रबन्ध की संरचना नहीं की, जिसके अध्ययन अनुसरण और अभ्यास से विवाह के सटीक समय का पूर्वानुमान किया जा सके। विवाह के समय से संदर्भित अन्यान्य शोध सिद्धान्तों की प्रामाणिकता को शताधिक भिन्न-भिन्न उदाहरणों द्वारा प्रदर्शित और परिलक्षित करके विषय की जटिलता को सुगम स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है, जो विवाह समय संज्ञान का वैशिष्ट्य है, जिसे परिज्ञान पक्ष एवं परिहार पक्ष के अंतर्गत तेरह अग्रांकित अध्यायों में विभाजित व व्याख्यायित किया गया है:
* परिज्ञान पक्ष: 1. ज्योतिष विज्ञान एवं विवाह में व्यवधान; 2. शास्त्रानुमोदित विवाह समय संज्ञान सूत्र; 3. विवाह काल निर्णय संदर्भित अनुसंधान; 4. विवाह समय संज्ञान प्रविधिः 5. गोचर का शनि सुनिश्चित करता है, विवाह का समय; 6. विवाह काल निर्धारण में गोचर के मंगल एवं शुक्र की भूमिका: 7. प्रौढ़ावस्था में विवाह; 8. विवाह प्रतिबन्धक योग का विस्तृत विवेचन, परिहार पक्ष 9. शीघ्र, सुखद एवं अखण्ड वैवाहिक सुख हेतु आध्यात्मिक उपचार, 10. ग्रह शान्ति: विविध विधान; 11. कन्याओं के विवाह में अवरोध से रक्षार्थ अनुभूत मंत्र प्रयोग, 12. कन्याओं के शीघ्र एवं सुखद विवाह हेतु स्तोत्र आराधना, एवं 13. पुरुषों के विवाह में व्यवधान का समाधान।
अतः विवाह के समय के संदर्भ में सत्य घटित होने वाले शोध सिद्धान्तों को ज्योतिष शास्त्र के यशस्वी एवं बहुप्रशंसित लेखकद्वय श्रीमती मृदुला त्रिवेदी तथा टी.पी. त्रिवेदी ने इस कृति में प्रस्तुत किया है, जो समस्त ज्योतिष प्रेमियों, अधिकांश ज्योतिर्विदों, जिज्ञासु पाठकों तथा प्रखर छात्रों के लिए पठनीय, अनुकरणीय एवं संग्रहणीय है।₹430.00 -
परिणय निर्णयवैबाहिक विसंगतियाँ ज्योतिषीय संदर्भ
₹350.00कैटिक निबंद के अनानकारी स्थितियों का प्रमुख कारण वर-वधू के जगाम के उपगुण किनान के अभाव के साथ-साथ उनके जन्मागों में विद्यमान नकारात्मक सहयोग होते हैं जो नाटिक विसंगतियों नितिगों, विघटनकारी स्थितियों, किकृत मानसिकताओं के अतिसित विवाह विछेद अथवा कैय का आधार निर्मित करते हैं। इन महगोगों का विस्तृत विन तथा तलस्पर्शी व्याख्या परिणय निर्णय-वैवाहिक विसंगतियाँ: ज्योतिषीय सन्दर्भ नामक कृह में प्रस्तुत की गई है।
किसह निछेद अनाग के लिए उत्तरदागी अन्यान्य ग्रहयोगों तथा विवाह विकेद काल के विभिन्न समीकरणों का परस्पर समायोजन इस कृति में अनेक व्यावहारिक निशिष्य समीकरण भी पाठकों के संज्ञानार्थप्रस्तुत किए गए हैं
कैटिक निगटन तथा निद के समस्त संत्रास का अंत करके उसे प्रणयपूर्ण परिणाम में स्तरित करने हेतु नीति और अनुभूत परिहार विधान इस कृति का लेशिय है। कैटिक विसंगतियों निगटनकारी स्थितियों और विच्छेद के कारण उत्पन्न होने वाले कान कैटिक जीवन पर केन्द्रित शासानुमोदित आचार्यानुमोदित, वेदविहित, गर्भित मस्त और अपनों से अभिपूरित परिश्रम-साध्य कार्य, विश्वविख्यात एटीई दिदी ने पाठकों के प्रबल और अनवरत आग्रह कणकने दागिनों का निर्वाह किया है। कृति को अगाकित पाँच अध्यायों में निभाका व्याख्यानित किया गया है 1. विवाह विच्छेदः काल परिज्ञान; 2. वैधव्य का करुण कंदन ग्रहों का स्पन्दन 3. वत्त विधान वैवाहिक विघटन, वैधव्य एवं विच्छेद का सुगम समाधान 4. पार्वती मंगल स्तोत्र, तथा 5. वांछा कल्पलता स्तोत्र
कैटिक एमके इंदगी रंगों के खेन सभी जातिकाएँ बाल्यकाल से ही देखते हैं परनु कैग का करण कन्दन अपना विवाह विछेद के दुर्दमनी दारुण दुख की किंचित सम्मानना भी उनके मन को प्रमित कर देती है जिसका पूर्वानुमान, परिणय निर्णय-वैवाहिक विसंगतियों ज्योतिषीय सन्दर्भ नामक इस कृति के अय्यन, अनुभव, कान और अगाधर पर किया जा सकना सम्भव है। विवाह की मीमांसा करने से पूर्व विवाह के पश्नमष्णिका संज्ञान अति आवश्यक है जिसका पूर्वानुमान निकि कैसटिक निरामय निगिनिषमश्, विश्श् व विनाश के वीभत्स ताण्डव के की कारु/जा अभिभावकों को सचेत और सतर्क कर युक्त में समर्थ है। समस्त ज्योतिषनियों के सड़ान सार्द्धन हेतु यह कृति पठनीय अनुकरणीय सराहनीय एवं समहणीग है।
₹430.00 -
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प्रश्न नवनीत
₹250.00इस रचना का आरंभ दैवज्ञ शब्द से हुआ है “दैव + ज्ञ” भविष्य या विधि के विधान को जानने वाला दैवज्ञ है। अपने भविष्य को जानने की इच्छा मनुष्य मात्र को हुआ करती है। उस समय तात्कालिक गोचर, पृच्छक की नाम राशि, स्वर या शकुन से भविष्य का फलादेश करने में ज्योतिषी समर्थ होता है। सुना जाता है कि एक बार स्वयं सृष्टिकर्ता और सर्वशास्त्रवेत्ता ब्रह्माजी भी अपना भविष्य जानने के लिए संसार के पालनकर्ता और विश्व के आधार विष्णु भगवान के पास गए थे। शायद आचार्य नीलकंठ बताना चाहते हैं कि प्रश्न शास्त्र के रचयिता स्वयं भगवान विष्णु हैं जिन्होंने इसका उपदेश ब्रह्माजी को लोकोपकार हेतु किया था।
₹300.00 -
प्रश्न रहस्य
₹125.00श्नतंत्र आचार्य नीलकंठ ने अपने बहुमूल्य ग्रंथ ताजिक नीलकंठी में वर्ष तंत्र के साथ इसे समाहित किया है। यह लगभग 1587 ई० की रचना हैं इस पर डाक्टर बी०वी०रमण की टीका उपलब्ध है
प्रश्न शिरोमणि श्री वाल्मीकि त्रिपाठी के सुयोग्य पुत्र आचार्य रुद्रमणि द्वारा 18वीं शताब्दी के अंत में लिखा रचना है।₹150.00 -
प्रश्नज्योतिष के पाँच पुष्प
₹75.00पुस्तक के बारे में
“प्रश्न-ज्योतिष” के द्वारा मानवीय जिज्ञासाओं की शान्ति सम्भव है। जिन लोगों के जन्म के समय का ठीक ज्ञान नहीं है, उनके लिए प्रश्नकुण्डली अत्यावश्यक है। विद्वान लेखक ने अपनी इस लघु पुस्तक में भारतीय ज्योतिष के पाँच मूल ग्रन्थ क्रमशः वाराहमिहिर की रचना “दैवज्ञवल्लभा”, पृथुयशस् की रचना “षपंचाशिका”, पद्मप्रभुदेव विरचित “भुवन दीपक”, नलकंठ रचित “प्रश्न तंत्र”, तथा भयेसल रचित “आर्यासप्तति” को जो एक स्थान पर एकत्रित करके सरल तथा सुबोध हिन्दी भाषा में प्रस्तुत किया है वह ज्ञान-भण्डार की दृष्टि से स्वागत योग्य है। इसके पूर्व ऐसा शोधपूर्ण ऐतिहासिक ग्रन्थ इस विषय पर पहले किसी ने लिखने का प्रयास नहीं किया है। -
प्रारंभिक फलित ज्योतिष
₹250.00पुस्तक-सार
प्रत्येक जन्मकुंडली के ग्रह जातक के जीवन पर दो प्रकार का प्रभाव डालते हैं। उसमें एक होता है स्थायी और दूसरी सामयिक। जन्मकालिक ग्रहों का जातक के पारिवारिक-सामाजिक, उसकी शारीरिक बनावट, व्यक्तित्व, स्वभाव तथा संस्कारों से विशेष संबंध रहता है जबकि वही ग्रह अपने दशाकाल में जातक के जीवन में समय-समय पर उसके उत्थान-पतन, उन्नति-अवनति, स्वास्थ्य-रोग, हानि-लाभ, यश-अपयश, जीवन-मरण, आदि इष्ट-अनिष्ठ अव्यवस्थाओं को पैदा करने में सहायक या बाधक हो जाते हैं अथवा इनकी सूचना देते हैं। जीवन की इन्हीं अवस्थाओं को साधारण बोलचाल की भाषा में जातक के ‘अच्छे या बुरे दिन’ कहा जाता है। इन अच्छे या बुरे दिनों को जानने के लिए फलित ज्योतिष में अनेक पद्धतियाँ प्रचलित हैं जिनमें नक्षत्र, राशि, दशा, गोचर, तत्व आदि के आधार पर फलनिर्णय किए जाते हैं तथा घटना के सटीक रूप से घटित होने की अवधि निर्धारित की जाती है।
आपके समक्ष प्रस्तुत इस पुस्तक में फलित करने के सभी आवश्यक अवयवों का विस्तार से वर्णन किया गया है जिसका ज्ञान प्राप्त करना ज्योतिष के सभी शिक्षार्थियों के लिए आवश्यक है। यद्यपि कि इस पुस्तक के सभी आवश्यक अवयवों का सारगर्भित विश्लेषण दिया गया है फिर भी गंभीर फलादेश के दृष्टिकोण से शिक्षार्थियों को और भी विशद् सिद्धांतों एवं तकनीकों का अध्ययन करना पड़ेगा जो हमारी दूसरी पुस्तक ‘बृहत् फलित ज्योतिष’ में दी हुई है। इस पुस्तक को कुल 14 अध्यायों में विभाजित किया गया है जिसमें फलित के सभी आवश्यक सिद्धांत समाविष्ट हैं।
₹400.00 -
फलित सूत्रम्
₹250.00यह रचना उसकी है, जो सभी के मन में बैठकर अपने हजार हाथों से सभी कुछ तो करता है। ऐसा तो शायद कुछ भी नहीं जो उसकी रजामंदी के बिना संपन्न हो सके।
उस हजार हाथ वाले का धन्यवाद। इस जंजीर से जुड़े सभी जन उसकी कृपा से स्वास्थ्य, सम्मान व सुख पाएँ। अपने ठाकुर से बस यही प्रार्थना है।₹300.00 -
बुध दशाफल दीपिका”
₹350.00दशाफल दीपिका शीर्षांकित इस ग्रन्थ को हमने दस अध्यायों में व्याख्यायित, विश्लेषित और विवेचित करने की चेष्टा की है। “बुध दशाफल दीपिका” का प्रथम अध्याय बुध ग्रह : पौराणिक एवं वैज्ञानिक सत्य तथ्य पर केन्द्रित है। इस अध्याय में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि बुध ग्रह की वास्तविकता यह है कि वह नवग्रहों में सर्वाधिक लघु पिण्ड है परन्तु जन्मांग में बुध ग्रह की भूमिका की महिमा अनन्त है। बुध बुद्धि की क्षमता, बौद्धिक प्रखरता, तलस्पर्शी विवेचन, विश्लेषण, स्मरण शक्ति के स्थायित्व या निर्बलता के अतिरिक्त विश्व में
होने वाली समस्त शोध और अनुसंधानों के लिए उत्तरदायी ग्रह है। बुद्धि ही इस पृथ्वी को संचालित करती है और जन्मांग में बुध जितना प्रबल, विशुद्ध, पापरहित, शुभग्रहों से दृष्ट, शुभ ग्रहों की राशि, नवांश, नक्षत्र में संस्थिति और साथ ही साथ अपनी उच्च, स्वराशि या मूलत्रिकोण अथवा नवांश में स्थित होता है। जातक की बौद्धिक गरिमा उतनी ही अधिक प्रशंसित चर्चित होती है।₹430.00 -
बृहज्जातकम्
₹400.00ज्योतिष सत्य है और सत्य ही ज्योतिष है। इसके सिद्धांत इतने गहन और अचूक हैं कि ब्रह्मांडीय प्रक्रिया को समझने और सत्य के दर्शन को समझने में भ्रांतियों की संभावना नगण्य हो जाती है। आत्मा के पूर्व जन्म के व्यवहार का पता द्वादश भाव एवं उसके स्वामी के गुण-धर्म से लगाया जा सकता है जबकि नवम भाव आत्मा का भाग्यस्थान है, अवशिष्ट कार्मिक ऊर्जा हस्ताक्षरों के बारे में सभी आवश्यक जानकारी प्रदान करता है। इस प्रकार नियति एवं भाग्य और कुछ नहीं बल्कि केवल पिछली चीजों के कार्यों का परिणाम है। ज्योतिष हमें भविष्य को आकार देने के तरीके दिखाता है क्योंकि यदि पिछले जन्म के कर्मों का फल वर्तमान जन्म के भाग्य के रूप में उभर सकता है, तो वर्तमान कर्म निश्चित रूप से अगले जन्म के भाग्य को आकार देने में मदद कर सकते हैं। इस प्रकार, ज्योतिष कर्म में तपस्या और विचारों की शुद्धता पर जोर देता है ताकि जब तक आत्मा जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त न हो जाए, तब तक प्रत्येक क्रमिक जन्म में अनुकूलता और सौभाग्य के माध्यम से देवत्व के मार्ग पर तेजी से प्रगति की जा सके।
ज्योतिष में आत्मसात किए गए शाश्वत सत्य घटनाओं के रूप में प्रतिबिम्बित सार्वभौमिक घटनाओं के पीछे परम वास्तविक का एक आवरण आसानी से अनुभव किया जा सकता है। यह असीमित स्थान में समय की सीमाओं की भी व्याख्या करता है। असंख्य शताब्दियाँ बीत जाने के बाद भी, यह विज्ञान हर उम्र के लोगों को आध्यात्मिकता का अनुसरण करने के मार्गदर्शन के साथ-साथ उनकी व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान भी आश्चर्यजनक सटीकता और अत्यधिक लाभ के साथ देने में सक्षम है।
₹450.00 -
बृहत गृह वास्तु संहिता भाग 1
₹300.00बृहत् संहिता
यह वाराहमिहिर की सर्वश्रेष्ठ एवं विस्तृत रचना है जिसमें खगोल शास्त्र पर किस्त प्रकाश डाला गया है। इस ग्रंथ में 106 अध्याय हैं जिनमें मानवीय विषयों पर प्रकाश डाला गया है। -
बृहत गृह वास्तु संहिता भाग 2
₹270.00डॉ. मनोज कुमार ने दो विषयों इतिहास एवं लोक प्रशासन में एम.ए. तथा तदुपरान्त पीएच. डी. की उपाधि 1995 में प्राप्त की। अपनी विश्वविद्यालयीय शिक्षा पूर्ण करने के उपरान्त इन्होंने करीब एक दशक तक विभिन्न स्थानों पर अध्यापन कार्य किए तथा अच्छे शिक्षक के रूप में ख्याति अर्जित की। 1990 के दशक से ही इनकी अभिरुचि गुप्त विद्याओं एवं अध्यात्म में रही है। इन्होंने विधिवत् ज्योतिष (पराशरी, जैमिनी एवं कृष्णमूर्ति पद्धति), अङ्क ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, हस्तरेखा विज्ञान, लाल किताब, पास्ट लाइफ रिग्रेसन, रेकी एवं अन्य आध्यात्मिक उपचारों की पद्धति आदि का गहन एवं विशद् अध्ययन इन विषयों के महानतम् गुरुओं के सान्निध्य में किया है तथा उपाधियां अर्जित की हैं। ₹300.00 -
बृहत वैदिक अङ्क संहिताभाग -1
₹240.00सामान्य रूप में अङ्क अविश्वसनीय रूप से एक शक्तिशाली हथियार हैं
किंतु विशेष रूप से वैदिक पद्धति में व्यक्तित्व के महत्वपूर्ण पहलुओं
तथा जीवन की घटनाओं की भविष्यवाणी में ये विशेष कारगर हैं।
अङ्कों की व्याख्या ग्रहों के आधार पर तथा जीवन में कितने समय
तक किस अङ्क का प्रभाव रहेगा यह जानने के लिए किया जाता है।₹300.00 -
बृहत वैदिक अङ्क संहिताभाग -2
₹260.00अङ्कों के प्राचीन विज्ञान का उद्भव प्रागैतिहासिक काल में हुआ है। हमारे प्राचीन लोगों के साथ हिंदू ऋषि-महर्षि, प्रकृति के नियम की खोज करने वाले लोग सभी अङ्कों के महत्व से संबंधित विषयों के ज्ञाता थे। कैल्डियन, हिब्रू एवं मिस्रवासी अङ्क ज्योतिष का अभ्यास करते थे। ₹300.00 -
बृहत व्यवसायिक वास्तु संहिता
₹400.00प्रत्येक व्यावसायिक क्षेत्र में अनुशासन की आवश्यकता होती है। कोई भी पुरुष अथवा महिला अपने जीवन में अनुशासन के बिना सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। अनुशासन कोई छोटी चीज नहीं है, इसे परिभाषित करना कठिन है तथा यह व्यावहारिकता से ही बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। जीवन को अनुशासित बनाने के लिए कुछ सिद्धांतों का अनुपालन आवश्यक है। इन सिद्धांतों की व्याख्या संबंधित विषय के विद्वानों के द्वारा की गयी है। प्रत्येक क्षेत्र में सफलता अनुशासन के द्वारा ही प्राप्त की जा सकती है तथा हर क्षेत्र के अपने अलग सिद्धांत होते हैं। इसी प्रकार वास्तु शास्त्र एवं आंतरिक सज्जा जैसे विषय भी कुछ सिद्धांतों पर ही आधारित हैं। अतः आपको अपनी योजना एवं डिजाइनिंग में वास्तु को लागू करने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि आप इनके सिद्धांतों को सख्ती एवं दृढ़ता से लागू करें।
₹450.00 -
बृहत् अङ्क संहिता भाग-1
₹250.00इस संपूर्ण पुस्तक को 9 अध्याय में विभाजित किया गया है। पहला अध्याय अङ्क ज्योतिष की पृष्ठभूमि को समझने के लिए समर्पित है जिसमें इसके उद्भव, इसकी उत्पत्ति के पीछे का दर्शन, इसके लक्षण तथा विशेषताएं एवं अङ्कों के महत्व साथ ही साथ अङ्क ज्योतिष की विभिन्न पद्धतियों तथा इसके विकास में उनके योगदान की चर्चा की गई है। ₹280.00 -
बृहत् अङ्क संहिता भाग-2
₹250.00इस संपूर्ण पुस्तक को 17 अध्यायों में विभाजित किया गया है। पहला अध्याय चायनीज अङ्क ज्योतिष की विशिष्ट प्रणाली लोशु ग्रिड की पृष्ठभूमि एवं उसकी समझ से संबंधित है जिसमें इसके उद्भव, इसकी व्युत्पत्ति के दर्शन, लक्षण एवं ग्रिड के 9 वर्गों में आने वाले अङ्कों के महत्व तथा फलकथन करते वक्त उनके योगदान का वर्णन किया गया है। ₹280.00 -
बृहत्पाराशर होराशास्थभाग-1
किताब के बारे में
यह कहना सुरक्षित है कि हिंदू ज्योतिष का जन्म ऋषियों के ऋषि पाराशर की शिक्षाओं के माध्यम से हुआ। ऋषि ने अपने शिष्य, प्रख्यात मैत्रेय को निर्देश देते हुए अपने दिव्य ज्ञान के माध्यम से अपने होरा शास्त्र में विभिन्न सिद्धांतों को स्थापित किया। बाद के सभी लेखकों आदि ने अपने कार्यों को संकलित करने से पहले ऋषियों के सिद्धांतों को अच्छी तरह से आत्मसात किया।
इस पुस्तक में कुछ मुख्य अंश इस प्रकार बताए गए हैं: राशियों के सोलह वर्ग, उनका उपयोग, राशियों के पहलू, शिशु की बुराइयाँ, 12 भावों के परिणाम, दीर्घायु, अन्य भावों में भाव स्वामियों की स्थिति के परिणाम। उपग्रहों के प्रभाव, पाद कारकांश, राजयोग, गरीबी पैदा करने वाले संयोजन, विभिन्न ग्रह अवस्थाओं के प्रभाव, चर दशा, सूक्ष्म दशा, नक्षत्र दशा, काल चक्र दशा आदि के विस्तृत प्रभाव। अष्टक वर्ग योजना, महिला कुंडली, खोई हुई कुंडली, ग्रहों की किरणें और विभिन्न कष्ट जैसे सूर्य प्रवेश, ग्रहण, मूल नक्षत्र आदि।
संक्षेप में कहें तो, यह पुस्तक भविष्यसूचक ज्योतिष के सभी आवश्यक बुनियादी सूत्रों और उन्नत सिद्धांतों से संबंधित है।
पाराशर होराशास्त्र
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बृहत्पाराशर होराशास्थभाग-2
₹80.00डॉ. मनोज कुमार
एम. ए. (इतिहास एवं लोक प्रशासन), पीएच. डी. ज्योतिषाचार्य (के.पी., पाराशरी एवं जैमिनी पद्धति) अंक ज्योतिषी (पाइथागोरियन, वैदिक एवं चीनीज पद्धति) वास्तु-फेंगशुई विशेषज्ञ एवं पास्ट लाइफ रिग्रेशन थेरेपिस्ट₹1,000.00



















