बृहत गृह वास्तु संहिता भाग 1

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बृहत् संहिता
यह वाराहमिहिर की सर्वश्रेष्ठ एवं विस्तृत रचना है जिसमें खगोल शास्त्र पर किस्त प्रकाश डाला गया है। इस ग्रंथ में 106 अध्याय हैं जिनमें मानवीय विषयों पर प्रकाश डाला गया है।

डॉ. मनोज कुमार ने दो विषयों इतिहास एवं लोक प्रशासन में एम.ए. तथा तदुपरान्त पीएच. डी. की उपाधि 1995 में प्राप्त की। अपनी विश्वविद्यालयीय शिक्षा पूर्ण करने के उपरान्त इन्होंने करीब एक दशक तक विभिन्न स्थानों पर अध्यापन कार्य किए तथा अच्छे शिक्षक के रूप में ख्याति अर्जित की। 1990 के दशक से ही इनकी अभिरुचि गुप्त विद्याओं एवं अध्यात्म में रही है। इन्होंने विधिवत् ज्योतिष (पराशरी, जैमिनी एवं कृष्णमूर्ति पद्धति), अङ्क ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, हस्तरेखा विज्ञान, लाल किताब, पास्ट लाइफ रिग्रेसन, रेकी एवं अन्य आध्यात्मिक उपचारों की पद्धति आदि का गहन एवं विशद् अध्ययन इन विषयों के महानतम् गुरुओं के सान्निध्य में किया है तथा उपाधियां अर्जित की हैं।

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