बृहत वैदिक अङ्क संहिताभाग -2
₹260.00₹300.00
| अङ्कों के प्राचीन विज्ञान का उद्भव प्रागैतिहासिक काल में हुआ है। हमारे प्राचीन लोगों के साथ हिंदू ऋषि-महर्षि, प्रकृति के नियम की खोज करने वाले लोग सभी अङ्कों के महत्व से संबंधित विषयों के ज्ञाता थे। कैल्डियन, हिब्रू एवं मिस्रवासी अङ्क ज्योतिष का अभ्यास करते थे। |
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| Categories: | Alpha, Numerology, Remedies |
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| book-author | V Ghosh |
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Remedial Astrology
₹230.00indu Remedial Astrology is a compilation and collection of my constant research efforts on various aspects of Remedial Astrology made during last 35 years in a bid to get it recognised as an independent paper in higher examinations of Astrology. If studies of Astrology have to be made useful and attractive in the present century, we have to expand the scope of two important wring of Astrology viz Vocational Astrology and Remedial Astrology. I have made an extensive and intensive research on both. A part of my research in vocational Astrology stands incorporated in my book Astrological Counselling published by Nishkaam Peeth Prakashan, New Delhi. My another Voluminous Book “Principles and practices of vocational Astrology” is belong published by Alpha Publication Delhi.
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सुरभित साधना सेतु
₹400.00सुरभित साधना सेतु समस्त भक्तजनों, सामान्य साधकों और गंभीर आराधकों के लिए अत्यन्त उपयोगी कृति है जिसमें अन्यान्य अभिलाषाओं, आकांक्षाओं, अपेक्षाओं और आशाओं के प्राशीष प्रसाद में रूपान्तरित होने हेतु विविध सुगम साधनाएँ तथा समस्याओं के समाधान के प्रमाणिक प्रावधान का समायोजन किया गया है। ऐसी अन्यान्य साधनाएँ, स्तोत्र, मंत्र एवं प्रयोग आदि हमें भारतीय परम्परा के अन्तर्गत ऋषि-महर्षियों और सिद्ध तपस्वियों द्वारा उपलब्ध हुए हैं, जिनके सविधि सतर्क संपादन से अभिलाषाओं और मनोकामनाओं की सम्पूर्ति होती है।
सुरभित साधना सेतु अभीष्ट संसिद्धि के संसुप्त संज्ञान की जागृति का अभिनव अनुसंधान है जिसमें अन्यान्य अवरोधों, विविध व्यथाओं तथा अप्रत्याशित अनिष्टों का शास्त्रसंगत समाधान सन्निहित है। जीवन जटिल समस्याओं का सिन्धु है। ऐसी अनेक समस्याओं के सरल, सुगम, सर्वसुलभ, सरस समाधान सुरभित साधना सेतु में संयोजित, संकलित एवं सम्पादित किए गए हैं, जिनका सतर्क अनुकरण समग्र समस्याओं के संत्रास को महकते मधुमास में रूपान्तरित करेगा, यही सदास्था है।
सुरभित साधना सेतु को पंद्रह विविध अध्यायों में विभाजित, व्याख्यायित किया गया है। इस कृति में अनेक दुर्लभ और अनुभूत सावताएँ आविष्ठित हैं जिनके सहज अनुक्रण से संदर्भित अभिलाषा की संसिद्धि के साथ-साथ समस्त व्याधियों, विपत्तियों, आपत्तियों, व्यथाओं, चिंताओं, संकटों, समस्याओं, आरोपों और दुर्दमनीय दारूण दुःखों की वेदना से साधक मुक्त हो जाता है। सुरभित साधना सेतु विविध विघट्न एवं विप्लवकारी विकृतियों, विसंगतियों, विषमताओं और विरोधी गतिविधियों के निराकरण का सर्वसुलभ, सरल समाधान है। सुरभित साधना सेतु मंत्रशास्त्र की उपादेयता से सम्बन्धित सशक्त, शास्त्रानुमोदित संरचना है जो पाठकों के लिए प्रमाणित, परीक्षित एवं प्रतीक्षित सामग्री के अभाव को सम्पुष्ट करने वाला, सशक्त सुरभित साधना सेतु है। ज्योतिष एवं मंत्र विज्ञान के दुर्लभ रहस्य के सम्यक् संज्ञान हेतु समस्त ज्योतिर्विद एवं मंत्र अध्येताओं को अध्ययन, अनुभव, अनुसंधान के निमित्त सुरभित साधना सेतु एक अद्वितीय एवं अमूल्य निधि है जो सभी के लिए पठनीय, अनुकरणीय और संग्रहणीय है।
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योग पारिजातधन योग
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श्रीमती मृदुला त्रिवेदीयोग पारिजात में समस्त प्रसिद्ध, प्रतिष्ठित, प्रशंसित, प्राचीन ज्योतिष शास्त्र के प्रमाणित शास्त्रीय ग्रन्थों के मनन, मन्धन और चिन्तन के अथक प्रयास, परिश्रमसाध्य साधना के उपरान्त विविध विशिष्ट ग्रहयोगों को व्यावहारिक जन्मांगों के निकष पर परख कर, उनका स्पष्ट सतर्क श्रृंखलाबद्ध चयन और संकलन करके प्रबुद्ध पाठकों को अनादिकाल से चली आ रही जिज्ञासा का सम्यक्, संपुष्ट, सारगर्भित, सार्वभौमिक, सर्वजनहितार्थ समाधान से संदर्भित ग्रहयोगों से सम्बन्धित तथा व्यक्ति के व्यवसाय, व्यस्तता, विलासिता की उपलब्धता, प्रभुता, अधिकारों की समग्रता, ऐश्वर्य, कीर्ति, वैभव, सम्पत्ति, समृद्धि, सत्ता, सम्पदा, सौभाग्य के अतिरिक्त सिंहासन तथा राज्य प्राप्ति के अन्यान्य योगों के साथ-साथ विपन्नता, दरिद्रता, चिन्ता, विपत्ति, विनाश, विफलता, विकृति, व्यवधान, अवरोध, अनैतिकता, दुर्भाग्य, दुर्दमनीय दारुण दुखों की व्यथा, धनहानि, आस्था तथा विश्वास की निर्बलता, धूर्तता, दैहिक सबलता तथा पुष्टता से सम्बन्धित सभी ग्रहयोगों तथा पाठकों की जिज्ञासा का तर्कसंगत विवेचन, विवरण, व्यावहारिक विश्लेषण सहित प्रत्युत्तर सन्निहित, समाहित व समायोजित है।
किसी भी जन्मांग से सम्बन्धित भविष्य के आकलन हेतु ग्रहयोगों का विस्तृत, सारगर्भित, सारस्वत व तलस्पर्शी अध्ययन, अनुभव, अभ्यास और अनुसंधान का महत्व सर्वोपरि है जिसके अभाव में जातक की प्रभुता, सत्ता, संपदा, समृद्धि तथा प्रशासन आदि से संदर्भित सटीक अनुमान सम्भव नहीं है।
योग पारिजात को 1. राजयोग, 2. भाग्य योग, 3. धन योग, तथा 4. अनुपम योग से शीर्षांकित किया गया है जिसके अंतर्गत 850 प्रामाणिक, शास्त्रगर्भित तथा आचार्यानुमोदित ग्रहयोग, विविध व्यावहारिक जन्मांगों के उदाहरण सहित सन्निहित हैं। इसके अतिरिक्त सूर्य और चन्द्रमा से संदर्भित ग्रहयोग, केन्द्रत्रिकोण राजयोग, महापुरुष राजयोग, महाभाग्य योग, अखण्ड साम्राज्य योग, उच्चस्थ ग्रहकृत राजयोग, राशिकृत राजयोग, विपरीत राजयोग, नीचभंग तथा राजभंग ग्रहयोग, विपन्नता प्रदायक ग्रहयोग, नाभस योग, नवांश संदर्भित शुभ और अशुभ ग्रहयोग तथा नवांश चक्र पर आधारित राजयोग आदि शीर्षांकित विविध अध्यायों में संस्कृत के श्लोकों में वर्णित ग्रहयोगों को ज्योतिष शास्त्र के वैज्ञानिक धरातल पर परखकर तथा सहस्रों जातकों, जातिकाओं आदि के जन्मांगों पर क्रियान्वित करने के उपरान्त जिज्ञासु पाठकों के कल्याणार्थ योग पारिजात में सुरुचिपूर्ण स्वरूप में समायोजित किया गया है।₹450.00 -
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गीता मंत्र गंगोत्री
₹290.00श्रीमद्भगवद्गीता को महाकाव्य महाभारत का प्राण स्वीकारा गया है जो धरतीवासियों के लिए प्रार्थना पथ नहीं, बल्कि अलौकिक प्रसादामृत और पंचामृत है जिसकी एक बूँद ही मानव का ब्रह्म में विलय करके उसे मोक्षगति प्रदान करके अमरत्व की ओर प्रशस्त करती है। श्रीमद्भगवदगीता की मंत्रशक्ति से प्रायः अधिकांश भक्तजन, साधक, आराधक, पाठक तथा जिज्ञासुगण अनभिज्ञ हैं जिसे प्रबुद्ध पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करना अपेक्षित है। गीता की मंत्रात्मक शक्ति एवं उसकी व्याख्या, गीता मंत्र गंगोत्री में सहज और सघन स्वरूप में सन्निहित है। गीता मंत्र गंगोत्री बारह अध्यायों में व्याख्यायित विभाजित है जिन्हें अग्रांकित नामों से शीर्षांकित किया गया है:
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गीता मंत्र गंगोत्री: Gita Mantra Gangotri
श्रीमद्भगवद्गीता को महाकाव्य महाभारत का प्राण स्वीकारा गया है जो धरतीवासियो के लिए प्रार्थना पथ नही, बल्कि अलौकिक प्रसादामृत और पंचामृत है जिसकी एक बूँद ही मानव का ब्रह्म में विलय करके उसे मोक्षगति प्रदान करके अमरत्व की ओर प्रशस्त करती है। श्रीमदभगवदगीता की मंत्रशक्ति से प्राय: अधिकांश भक्तजन, साधक आराधक, पाठक तथा जिज्ञासुगण अनभिज्ञ हैं जिसे प्रबुद्ध पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करना अपेक्षित है। गीता की मंत्रात्मक शक्ति एव उसकी व्याख्या, गीता मंत्र गंगोत्री में सहज और सघन स्वरूप मे सन्निहित है। गीता मंत्र गंगोत्री बारह अध्यायो में व्याख्यायित विभाजित है जिन्हें अग्रांकित नामो से शीर्षाकित किया गया है:
- सन्ध्योपासना:सूक्ष्म ज्ञातव्य तथ्य 2.भगवान श्रीकृष्ण से सम्बन्धित आसधना स्तोत्र 3. श्रीमद्भगवद्गीता में सन्निहित मंत्रशक्ति एवं अनुष्ठान विधान 4. विपत्ति विनाशक विविध मंत्र प्रयोग 5. विभिन्न कार्यों की संसिद्धि हेतु वेदविहित मंत्र, 6. वैदिक सूक्त साधन अभिज्ञान 7.पति–पत्नी में सयोग हेतु अनुभव परिहार परिज्ञान 8.केमद्रुम योग शमन 9. कालसर्पयोग दोष: परिहार परिज्ञान 10. पाप निवृत्ति मंत्र आराधना 11. अकाल मृत्यु एवं असाध्य व्याधि से मुक्ति ही जीवन की शक्ति 12. श्राद्ध एवं मोक्ष, पितृ श्राद्ध विधान।
गीता मंत्र गंगोत्री में दुर्लभ अद्भुत और अनुभूत मंत्र प्रयोग, साधानाएँ तथा कतिपय महत्त्वपूर्ण परिहार परिशान सुन्दर और सुरूचिपूर्ण स्वरूप में सन्निहित हैं जो सम्बन्धित विषय पर पाठकगणो के लिए हीरक हस्ताक्षर सिद्ध होगे। महर्षि वेदव्यास ने चार वेद अट्ठारह पुराण एव इक्कीस उपनिषदों के साथ–साथ महाभारत के महाकाव्य की सरचना करने पर कहा था कि ”मेरे कथ के रहस्य को मैं जानता हूँ शुकदेव जानते हैं संजय जानता है अथवा नहीं, इसमें मुझे सन्देह है। इनके अतिरिक्त कोई भी नहीं जानता। हे गणपति! आप भी मेरे ग्रन्थ के मर्म को नहीं जानते। इस महाकाव्य महाभारत मे जो नही होगा, वह विश्व में कहीं नही होगा ।
गीता मंत्र गंगोत्री मंत्रशास्त्र की महकती पुष्पाजलि तथा साधना संज्ञान की ओजस्वल और ऊर्जस्वल उपलब्धि है। मंत्र साधना के सविधि संपादन से, साधक की समस्त अभिलाषाओं अपेक्षाओं और इच्छाओं की संसिद्धि होती है, परन्तु कार्य विशेष की सम्पन्नता हेतु, है, अनिवार्यता है, उपयुक्त एवं अनुकूल साधना के विविवत् संपादन की, जो गीता मंत्र गंगोत्री का वैशिष्ट्य है।
संक्षिप्त परिचय
श्रीमती मृदुला त्रिवेदी देश की प्रथम पक्ति के ज्योतिषशास्त्र के अध्येताओं एव शोधकर्ताओ में प्रशंसित एवं चर्चित हैं। उन्होने ज्योतिष ज्ञान के असीम सागर के जटिल गर्भ में प्रतिष्ठित अनेक अनमोल रत्न अन्वेषित कर, उन्हें वर्तमान मानवीय संदर्भो के अनुरूप संस्कारित तथा विभिन्न धरातलों पर उन्हें परीक्षित और प्रमाणित करने के पश्चात जिज्ञासु छात्रों के समक्ष प्रस्तुत करने का सशक्त प्रयास तथा परिश्रम किया है, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने देशव्यापी विभिन्न प्रतिष्ठित एव प्रसिद्ध पत्र–पत्रिकाओ मे प्रकाशित 460 शोधपरक लेखो के अतिरिक्त 70 से भी अधिक वृहद शोध प्रबन्धों की सरचना की, जिन्हें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि, प्रशंसा, अभिशंसा कीर्ति
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Comprehensive Numerology Vol- II
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The fundamental premise of Numerology is that, life and the Universe as a whole, is an orderly system and that numbers reflect that orderliness. Numbers are by definition orderly. When we confront the question of Numerology, we are facing the same dilemma that we all face with the larger questions of life: Is there meaning and order to life, or is it purely a random and chaotic Universe? -
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अनिष्ट ग्रह का उपचार और वैदिक मंत्र₹350.00










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