बृहत वैदिक अङ्क संहिताभाग -2
₹260.00₹300.00
| अङ्कों के प्राचीन विज्ञान का उद्भव प्रागैतिहासिक काल में हुआ है। हमारे प्राचीन लोगों के साथ हिंदू ऋषि-महर्षि, प्रकृति के नियम की खोज करने वाले लोग सभी अङ्कों के महत्व से संबंधित विषयों के ज्ञाता थे। कैल्डियन, हिब्रू एवं मिस्रवासी अङ्क ज्योतिष का अभ्यास करते थे। |
| अङ्कों के प्राचीन विज्ञान का उद्भव प्रागैतिहासिक काल में हुआ है। हमारे प्राचीन लोगों के साथ हिंदू ऋषि-महर्षि, प्रकृति के नियम की खोज करने वाले लोग सभी अङ्कों के महत्व से संबंधित विषयों के ज्ञाता थे। कैल्डियन, हिब्रू एवं मिस्रवासी अङ्क ज्योतिष का अभ्यास करते थे। |
| Categories: | Alpha, Numerology, Remedies |
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| book-author | V Ghosh |
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Diagnosis by palmistry and Numerology
₹180.00

Diagnosis of Diseases by Palmistry and Numerology
About Book
Physical symptoms and verbal complaints by patients are important parameters for diagnosis of human by physician. Hand used to prove a very important tool for disease diagnosis from the ancient time. Lot of work has been done by ancient Rishis and Vaidyas for identification of diseases. The references has been given in Vedas and Samudrik Shastra. The shape, size, colour, fingers, nails, mouth, ridges, lines etc. give indication for the present and future ailments. Live medical science, Medical Palmistry is an observatory science and differs from man to man and time to time. Perfection can only be attained by practice. Palmistry can be very helpful in speedy identification of disease for the benefit of human being.
Every number has a particular sound. The birth name alphabetic can be converted in to talent number, Destiny number, Personality nümber, Birth number, etc. for practical use in diagnosis of human disease, Efforts have been made to describe the methods for diagnosis of human disease by palmistry and Numerology. Efforts have been made by authors to explain the text useful in brief and simple language. Hope that this book would be very useful to every person. This unique work has opend a new vista research for diagnosis of human disease.₹200.00 -
योग पारिजातभाग्य योग
₹360.00टी.पी. त्रिवेदी
श्रीमती मृदुला त्रिवेदीयोग पारिजात में समस्त प्रसिद्ध, प्रतिष्ठित, प्रशंसित, प्राचीन ज्योतिष शास्त्र के प्रमाणित शास्त्रीय ग्रन्थों के मनन, मन्धन और चिन्तन के अथक प्रयास, परिश्रमसाध्य साधना के उपरान्त विविध विशिष्ट ग्रहयोगों को व्यावहारिक जन्मांगों के निकष पर परख कर, उनका स्पष्ट सतर्क श्रृंखलाबद्ध चयन और संकलन करके प्रबुद्ध पाठकों को अनादिकाल से चली आ रही जिज्ञासा का सम्यक्, संपुष्ट, सारगर्भित, सार्वभौमिक, सर्वजनहितार्थ समाधान से संदर्भित ग्रहयोगों से सम्बन्धित तथा व्यक्ति के व्यवसाय, व्यस्तता, विलासिता की उपलब्धता, प्रभुता, अधिकारों की समग्रता, ऐश्वर्य, कीर्ति, वैभव, सम्पत्ति, समृद्धि, सत्ता, सम्पदा, सौभाग्य के अतिरिक्त सिंहासन तथा राज्य प्राप्ति के अन्यान्य योगों के साथ-साथ विपन्नता, दरिद्रता, चिन्ता, विपत्ति, विनाश, विफलता, विकृति, व्यवधान, अवरोध, अनैतिकता, दुर्भाग्य, दुर्दमनीय दारुण दुखों की व्यथा, धनहानि, आस्था तथा विश्वास की निर्बलता, धूर्तता, दैहिक सबलता तथा पुष्टता से सम्बन्धित सभी ग्रहयोगों तथा पाठकों की जिज्ञासा का तर्कसंगत विवेचन, विवरण, व्यावहारिक विश्लेषण सहित प्रत्युत्तर सन्निहित, समाहित व समायोजित है।
किसी भी जन्मांग से सम्बन्धित भविष्य के आकलन हेतु ग्रहयोगों का विस्तृत, सारगर्भित, सारस्वत व तलस्पर्शी अध्ययन, अनुभव, अभ्यास और अनुसंधान का महत्व सर्वोपरि है जिसके अभाव में जातक की प्रभुता, सत्ता, संपदा, समृद्धि तथा प्रशासन आदि से संदर्भित सटीक अनुमान सम्भव नहीं है।
योग पारिजात को 1. राजयोग, 2. भाग्य योग, 3. धन योग, तथा 4. अनुपम योग से शीर्षांकित किया गया है जिसके अंतर्गत 850 प्रामाणिक, शास्त्रगर्भित तथा आचार्यानुमोदित ग्रहयोग, विविध व्यावहारिक जन्मांगों के उदाहरण सहित सन्निहित हैं। इसके अतिरिक्त सूर्य और चन्द्रमा से संदर्भित ग्रहयोग, केन्द्रत्रिकोण राजयोग, महापुरुष राजयोग, महाभाग्य योग, अखण्ड साम्राज्य योग, उच्चस्थ ग्रहकृत राजयोग, राशिकृत राजयोग, विपरीत राजयोग, नीचभंग तथा राजभंग ग्रहयोग, विपन्नता प्रदायक ग्रहयोग, नाभस योग, नवांश संदर्भित शुभ और अशुभ ग्रहयोग तथा नवांश चक्र पर आधारित राजयोग आदि शीर्षांकित विविध अध्यायों में संस्कृत के श्लोकों में वर्णित ग्रहयोगों को ज्योतिष शास्त्र के वैज्ञानिक धरातल पर परखकर तथा सहस्रों जातकों, जातिकाओं आदि के जन्मांगों पर क्रियान्वित करने के उपरान्त जिज्ञासु पाठकों के कल्याणार्थ योग पारिजात में सुरुचिपूर्ण स्वरूप में समायोजित किया गया है।₹450.00 -
समृद्धि सिन्धु
₹400.00इस महानतम कृति को हमने समृद्धि सिन्धु से स्थिर किया है जिसमें अपने 40 वर्षों से भी अधिक के अध्ययन, अनुभव, अनुसंधान परिकल्पना संज्ञान को समेटकर व्यावहारिक जन्मांगों पर बारंबार परख कर प्रयोग प्रविधि सम्पादित की है। कृति में धनोपार्जन में निरन्तर विस्तार, आय एवं लाभ में अथाह वृद्धि एवं समस्त कामनाओं की संसिद्धि हेतु भिन्न-भिन्न स्तर के अनुष्ठान, संकलन एवं सम्पादित किए गए हैं एक ही औषधि सभी को व्याधिमुक्त नहीं कर पाती है, उसी प्रकार, धनोपार्जन के संवर्द्धन की कामना को सम्पुष्ट करने वाले मंत्रशास्त्र के विविध विधान, विभिन्न शास्त्रों में व्याख्यायित हैं, जिन्हें आध्यात्मिक चेतना के अभ्युदय के साथ भक्तिभावना, आस्था और विश्वास सहित प्रतिपादित करने पर, अथाह चल-अचल सम्पत्ति और संपन्नता के सम्यक् साधन, सुगमतापूर्वक उपलब्ध होते हैं। जहाँ समृद्धि सिन्धु में त्रिपुरसुन्दरी महालक्ष्मी के नैमितिक अनुष्ठान के सम्पादन की शास्त्रोक्त विधि का उल्लेख है, वहीं सुगम मंत्रसाधनाएँ, सांकेतिक साधनाएँ, शाबर मंत्रसाधनाएँ, लक्ष्मी के प्रसन्नार्थ अनुभूत स्तोत्रपाठ एवं साधना तथा तांत्रिक परिहार के साथ, कतिपय अनुभूत अनुष्ठान का सम्पादन किया गया है। वरिष्ठ पाठकों के प्रत्येक वर्ग के लिए लक्ष्मी-साधना का सुगम मार्ग प्रशस्ति करने की चेष्टा की गई है जिसका अनुसरण, अनुपालन साधक की समृद्धि की संसिद्धि करता है
₹500.00 -
उपचारीय ज्योतिष कौमुदी
₹110.00पुस्तक के बारे में
गत कुछ वर्षों में उपचारीय ज्योतिष को युक्तिसंगत स्वरूप प्रदान करने में जिन कुछेक विद्वानों ने अमूल्य योगदान दिया है उनमें पाठकजी का विशिष्ट स्थान है। एल्फा पब्लिकेशन के विशेष आग्रह पर पाठकजी ने उपचारीय ज्योतिष सम्बन्धी अपने शोधपूर्ण विचार कई पुस्तकों की एक श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है, जिसकी प्रथम कड़ी “उपचारीय ज्योतिष कौमुदी” के रूप में आपके सम्मुख प्रस्तुत है। यह पुस्तक छः अध्यायों की है किन्तु, इसे पढ़कर तथा समझकर कोई भी मेधावी ज्योतिषी उपचारीय ज्योतिष के क्षेत्र में पारंगत हो सकता है। प्रथम अध्याय में, वर्णित ज्योतिष के मूलभूत सिद्धान्त को समझकर आप कुंडली के बारह भावों से सम्बन्धित समस्याओं को हल करने में समर्थ हो सकते हैं। द्वितीय अध्याय में, रत्नों की आवश्यकता पर जो शोधपूर्ण विस्तृत सामग्री दी गई है वैसी उपयोगी सामग्री आपको अन्यत्र अभी तक देखने को नहीं मिली होगी। तृतीय अध्याय में, लेखक ने पराशरीय उपचार विधि की जो झलक प्रस्तुत की है वह पूर्णतः शास्त्रोक्त होते हुए भी देश-काल-पात्र के समीचीन है। चतुर्थ अध्याय में लेखक ने पैंतीस दोषपूर्ण ग्रहयुतियों के परिहार बताये हैं। पंचम अध्याय में, ग्रहों की शान्ति हेतु लेखक ने तेईस हिन्दू पौराणिक देवी-देवताओं के मंत्र जाप तथा स्तुति का जो विस्तृत विवरण दिया है उससे देवोपचार में दक्षता आ सकती है। षष्ठ अध्याय में, लाल किताब के कुछ सुप्रसिद्ध टोटके दिये गये हैं जिसमें कालसर्पयोग को शमन करने के टोटके भी शामिल हैं। यदि “जातक चन्द्रिका” को ललित ज्योतिष के आधार ग्रन्थ के रूप में मान्यता प्रदान की जा सकती है, तो कोई कारण नहीं कि “उपचारीय ज्योतिष कौमुदी” को उपचारीय ज्योतिष के आधार ग्रन्थ के रूप में मान्यता न दी जाये। पाठकों के आग्रह पर हम शीघ्र ही उपचारीय ज्योतिष श्रृंखला में पाठक जी की अन्य महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का भी प्रकाशन करने जा रहे हैं।₹130.00 -
Remedial Astrology
₹230.00indu Remedial Astrology is a compilation and collection of my constant research efforts on various aspects of Remedial Astrology made during last 35 years in a bid to get it recognised as an independent paper in higher examinations of Astrology. If studies of Astrology have to be made useful and attractive in the present century, we have to expand the scope of two important wring of Astrology viz Vocational Astrology and Remedial Astrology. I have made an extensive and intensive research on both. A part of my research in vocational Astrology stands incorporated in my book Astrological Counselling published by Nishkaam Peeth Prakashan, New Delhi. My another Voluminous Book “Principles and practices of vocational Astrology” is belong published by Alpha Publication Delhi.
₹280.00 -
बृहत् अङ्क संहिता भाग-1
₹250.00इस संपूर्ण पुस्तक को 9 अध्याय में विभाजित किया गया है। पहला अध्याय अङ्क ज्योतिष की पृष्ठभूमि को समझने के लिए समर्पित है जिसमें इसके उद्भव, इसकी उत्पत्ति के पीछे का दर्शन, इसके लक्षण तथा विशेषताएं एवं अङ्कों के महत्व साथ ही साथ अङ्क ज्योतिष की विभिन्न पद्धतियों तथा इसके विकास में उनके योगदान की चर्चा की गई है। ₹280.00 -
Comprehensive VEDIC Numerology vol -I
₹240.00Name numerology in Vedic esotericism is just one of four different types of personal number interpretation systems. Each of the four systems represents a certain aspect of our ₹300.00 -
व्रत विधान : विवाह एवं सन्तान
₹320.00कलिकाल के वर्तमान चक्र के विकृत एवं विरूपित स्वरूप में निमग्न होते जा रहे समाज के मध्य व्रत संपादन की लोकप्रियता, उपयोगिता तथा उसके विलक्षण प्रभाव की महिमा को ‘व्रत विधान : विवाह एवं सन्तान’ नामक कृति के मधुरिम मधुवन के महकते प्रांगण में संबंधित जातकों के सम्मुख प्रस्तुत करने की चेष्टा की गई है। यह कृति नौ पृथक पृथक अध्यायों में व्याख्यायित है जिन्हें अग्रांकित शीर्षकों से स्थिर किया गया है-
1. मंत्र : सत्यान्तिक विश्लेषण, 2. वैवाहिक विलम्ब एवं ग्रहयोग : ज्योतिषीय
विश्लेषण, 3. वैवाहिक विलम्ब कुछ अनुभूत मंत्र, स्तोत्र एवं प्रयोग, 4. व्रत परिज्ञानः प्रविधि एवं प्रावधान, 5. वैवाहिक समस्याओं का सुगम समाधान व्रत विधान, 6. विशिष्ट व्रत का अनुसरण : वैवाहिक विसंगतियाँ, वैधव्य, पार्थक्य का शमन, 7. संतति सुगम : परिहार प्रावधान, 8. सर्वश्रेष्ठ अनुष्ठान व्रत विधान तथा 9. प्रमुख पुत्र सुगम व्रत एवं विधान
विविध व्रत विधान, विवाह एवं सन्तान से संबंधित अनेक सुगम समाधान इस कृति में अनुमान किए गए हैं। प्रायः व्रत और उपवास की भिन्नता से अनभिज्ञ जन-सामान्य व्रत को अनुष्ठान के रूप में उपयोग करने तथा उसके चमत्कृत कर देने वाले प्रभाव से भिन्न है। इस वास्तविकता की सम्यक् व्याख्या ‘व्रत विधान विवाह एवं सन्तान’ नामक कृति में आविष्ठित है। वैवाहिक विलम्ब एवं विघटन का सुगम समाधान है- मंत्रजप, स्तोत्र पाठ, व्रत और दान। इसी प्रकार से संततिहीनता को संतति सुख में रूपांतरित करने हेतु विविध विधान मंत्र प्रयोग तथा अनेक व्रत और उनका अद्भुत एवं अनुभूत व्यावहारिक पक्ष इस कृति में अनुमान किया गया है
वैवाहिक विलम्ब, विघटन, संततिहीनता अथवा शाप से ग्रसित अनेक ऐसे जातक हैं जो संस्कृत के मंत्र, स्तोत्र तथा अनुष्ठान का प्रतिपादन करने में समर्थ नहीं हैं तथा न ही वह योग्य आचार्यों द्वारा संबंधित अनुष्ठानों का प्रतिपादन कराने में सक्षम हैं। विवाह एवं सन्तान सुख हेतु आतुर एवं प्रतीक्षारत जातकों के लिए सर्वोच्च सुगम मार्ग है, उपयुक्त व्रत का चयन तथा विधि विधान सहित उसका अनुकरण, आरंभ एवं उद्यापन आदि, जो इस कृति का सर्वस्व है।
इस कृति में अनेक पुत्रप्रदाता व्रत एवं संतति सुख की कामना की संसिद्धि हेतु विविध व्रत एवं विधान दार्शनिक किए गए हैं, जो अद्भुत और अनुभूत हैं जिनमें से कात्यायनी व्रत, पुंसवन व्रत, पयोव्रत, श्रावण शुक्ल एकादशी व्रत, षष्ठी देवी व्रत आदि प्रमुख हैं तथा वैवाहिक विलम्ब के समाधान हेतु विविध वारों से संबंधित व्रतविधान और वैवाहिक संकट एवं प्रशासन के परिहार हेतु मंत्रजप, स्तोत्र पाठ आदि के साथ-साथ उसके विधान भी इस कृति में सत्रिहित हैं
यह कृति अपनी सारगर्भिता, सार्वभौमिकता तथा उपयोगिता के कारण समस्त ज्योतिष प्रेमियों के लिए अत्यन्त हितकर और लाभप्रद सिद्ध होगी, इसमें किंचित सन्देह नहीं।₹350.00










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