गीता मंत्र गंगोत्री

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श्रीमद्भगवद्गीता को महाकाव्य महाभारत का प्राण स्वीकारा गया है जो धरतीवासियों के लिए प्रार्थना पथ नहीं, बल्कि अलौकिक प्रसादामृत और पंचामृत है जिसकी एक बूँद ही मानव का ब्रह्म में विलय करके उसे मोक्षगति प्रदान करके अमरत्व की ओर प्रशस्त करती है। श्रीमद्भगवदगीता की मंत्रशक्ति से प्रायः अधिकांश भक्तजन, साधक, आराधक, पाठक तथा जिज्ञासुगण अनभिज्ञ हैं जिसे प्रबुद्ध पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करना अपेक्षित है। गीता की मंत्रात्मक शक्ति एवं उसकी व्याख्या, गीता मंत्र गंगोत्री में सहज और सघन स्वरूप में सन्निहित है। गीता मंत्र गंगोत्री बारह अध्यायों में व्याख्यायित विभाजित है जिन्हें अग्रांकित नामों से शीर्षांकित किया गया है:

श्रीमती मृदुला त्रिवेदी देश की प्रथम पंक्ति के ज्योतिषशास्त्र के अध्येताओं एवं शोधकर्ताओं में प्रशंसित एवं चर्चित हैं। उन्होंने ज्योतिष ज्ञान के असीम सागर के जटिल गर्भ में प्रतिष्ठित अनेक अनमोल रत्न अन्वेषित कर, उन्हें वर्तमान मानवीय संदर्भों के अनुरूप संस्कारित तथा विभिन्न धरातलों पर उन्हें परीक्षित और प्रमाणित करने के पश्चात जिज्ञासु छात्रों के समक्ष प्रस्तुत करने का सशक्त प्रयास तथा परिश्रम किया है, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने देशव्यापी विभिन्न प्रतिष्ठित एवं प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित 460 शोधपरक लेखों के अतिरिक्त 70 से भी अधिक वृहद् शोध प्रबन्धों की संरचना की, जिन्हें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि, प्रशंसा, अभिशंसा, कीर्ति और यश उपलब्ध हुआ है, जिनके अन्यान्य परिवर्द्धित संस्करण, उनकी लोकप्रियता और विषयवस्तु की सारगर्भिता का प्रमाण हैं।
ज्योतिर्विद श्रीमती मृदुला त्रिवेदी देश के अनेक संस्थानों द्वारा प्रशंसित और सम्मानित हुई हैं जिन्हें ‘वर्ल्ड डेवलपमेन्ट पार्लियामेन्ट’ द्वारा ‘डाक्टर ऑफ एस्ट्रोलॉजी’ तथा ‘प्लेनेट्स एण्ड फोरकास्ट’ द्वारा देश के ‘सर्वश्रेष्ठ ज्योतिर्विद’ तथा ‘सर्वश्रेष्ठ लेखक’ का पुरस्कार एवं ‘ज्योतिष महर्षि की उपाधि आदि प्राप्त हुए हैं। ‘अध्यात्म एवं ज्योतिष शोध संस्थान, लखनऊ’ तथा ‘द टाइम्स ऑफ एस्ट्रोलॉजी, दिल्ली द्वारा उन्हें विविध अवसरों पर ज्योतिष पाराशर, ज्योतिष वेदव्यास, ज्योतिष वराहमिहिर, ज्योतिष मार्तण्ड, ज्योतिष भूषण, भाग्यविद्मणि, ज्योतिर्विद्यावारिधि, ज्योतिष बृहस्पति, ज्योतिष भानु एवं ज्योतिष ब्रह्मर्षि ऐसी अन्यान्य अप्रतिम मानक उपाधियों से अलंकृत किया गया है।
श्रीमती मृदुला त्रिवेदी, लखनऊ विश्वविद्यालय की परास्नातक हैं तथा विगत 40 वर्षों से अनवरत ज्योतिष विज्ञान तथा मंत्रशास्त्र के उत्थान तथा अनुसंधान में संलग्न हैं। भारतवर्ष के साथ-साथ विश्व के विभिन्न देशों के निवासी उनसे समय-समय पर ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त करते रहते हैं। श्रीमती मृदुला त्रिवेदी को ज्योतिष विज्ञान की शोध संदर्भित मौन साधिका एवं ज्योतिष ज्ञान के प्रति सारस्वत संकल्प से संयुक्त समर्पित ज्योतिर्विद के रूप में प्रशंसित किया गया है और वह अनेक पत्र-पत्रिकाओं में सह-संपादिका के रूप में कार्यरत रही हैं।

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