Comprehensive VEDIC Numerology vol -II
₹240.00₹300.00
| Name numerology in Vedic esotericism is just one of four different types of personal number interpretation systems. Each of the four systems represents a certain aspect of our |
| Name numerology in Vedic esotericism is just one of four different types of personal number interpretation systems. Each of the four systems represents a certain aspect of our |
| Categories: | Alpha, Numerology |
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बृहत वैदिक अङ्क संहिताभाग -1
₹240.00सामान्य रूप में अङ्क अविश्वसनीय रूप से एक शक्तिशाली हथियार हैं
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गीता मंत्र गंगोत्री
₹290.00श्रीमद्भगवद्गीता को महाकाव्य महाभारत का प्राण स्वीकारा गया है जो धरतीवासियों के लिए प्रार्थना पथ नहीं, बल्कि अलौकिक प्रसादामृत और पंचामृत है जिसकी एक बूँद ही मानव का ब्रह्म में विलय करके उसे मोक्षगति प्रदान करके अमरत्व की ओर प्रशस्त करती है। श्रीमद्भगवदगीता की मंत्रशक्ति से प्रायः अधिकांश भक्तजन, साधक, आराधक, पाठक तथा जिज्ञासुगण अनभिज्ञ हैं जिसे प्रबुद्ध पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करना अपेक्षित है। गीता की मंत्रात्मक शक्ति एवं उसकी व्याख्या, गीता मंत्र गंगोत्री में सहज और सघन स्वरूप में सन्निहित है। गीता मंत्र गंगोत्री बारह अध्यायों में व्याख्यायित विभाजित है जिन्हें अग्रांकित नामों से शीर्षांकित किया गया है:
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परिणय निर्णयवैबाहिक विसंगतियाँ ज्योतिषीय संदर्भ
₹350.00कैटिक निबंद के अनानकारी स्थितियों का प्रमुख कारण वर-वधू के जगाम के उपगुण किनान के अभाव के साथ-साथ उनके जन्मागों में विद्यमान नकारात्मक सहयोग होते हैं जो नाटिक विसंगतियों नितिगों, विघटनकारी स्थितियों, किकृत मानसिकताओं के अतिसित विवाह विछेद अथवा कैय का आधार निर्मित करते हैं। इन महगोगों का विस्तृत विन तथा तलस्पर्शी व्याख्या परिणय निर्णय-वैवाहिक विसंगतियाँ: ज्योतिषीय सन्दर्भ नामक कृह में प्रस्तुत की गई है।
किसह निछेद अनाग के लिए उत्तरदागी अन्यान्य ग्रहयोगों तथा विवाह विकेद काल के विभिन्न समीकरणों का परस्पर समायोजन इस कृति में अनेक व्यावहारिक निशिष्य समीकरण भी पाठकों के संज्ञानार्थप्रस्तुत किए गए हैं
कैटिक निगटन तथा निद के समस्त संत्रास का अंत करके उसे प्रणयपूर्ण परिणाम में स्तरित करने हेतु नीति और अनुभूत परिहार विधान इस कृति का लेशिय है। कैटिक विसंगतियों निगटनकारी स्थितियों और विच्छेद के कारण उत्पन्न होने वाले कान कैटिक जीवन पर केन्द्रित शासानुमोदित आचार्यानुमोदित, वेदविहित, गर्भित मस्त और अपनों से अभिपूरित परिश्रम-साध्य कार्य, विश्वविख्यात एटीई दिदी ने पाठकों के प्रबल और अनवरत आग्रह कणकने दागिनों का निर्वाह किया है। कृति को अगाकित पाँच अध्यायों में निभाका व्याख्यानित किया गया है 1. विवाह विच्छेदः काल परिज्ञान; 2. वैधव्य का करुण कंदन ग्रहों का स्पन्दन 3. वत्त विधान वैवाहिक विघटन, वैधव्य एवं विच्छेद का सुगम समाधान 4. पार्वती मंगल स्तोत्र, तथा 5. वांछा कल्पलता स्तोत्र
कैटिक एमके इंदगी रंगों के खेन सभी जातिकाएँ बाल्यकाल से ही देखते हैं परनु कैग का करण कन्दन अपना विवाह विछेद के दुर्दमनी दारुण दुख की किंचित सम्मानना भी उनके मन को प्रमित कर देती है जिसका पूर्वानुमान, परिणय निर्णय-वैवाहिक विसंगतियों ज्योतिषीय सन्दर्भ नामक इस कृति के अय्यन, अनुभव, कान और अगाधर पर किया जा सकना सम्भव है। विवाह की मीमांसा करने से पूर्व विवाह के पश्नमष्णिका संज्ञान अति आवश्यक है जिसका पूर्वानुमान निकि कैसटिक निरामय निगिनिषमश्, विश्श् व विनाश के वीभत्स ताण्डव के की कारु/जा अभिभावकों को सचेत और सतर्क कर युक्त में समर्थ है। समस्त ज्योतिषनियों के सड़ान सार्द्धन हेतु यह कृति पठनीय अनुकरणीय सराहनीय एवं समहणीग है।
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योग पारिजातधन योग
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श्रीमती मृदुला त्रिवेदीयोग पारिजात में समस्त प्रसिद्ध, प्रतिष्ठित, प्रशंसित, प्राचीन ज्योतिष शास्त्र के प्रमाणित शास्त्रीय ग्रन्थों के मनन, मन्धन और चिन्तन के अथक प्रयास, परिश्रमसाध्य साधना के उपरान्त विविध विशिष्ट ग्रहयोगों को व्यावहारिक जन्मांगों के निकष पर परख कर, उनका स्पष्ट सतर्क श्रृंखलाबद्ध चयन और संकलन करके प्रबुद्ध पाठकों को अनादिकाल से चली आ रही जिज्ञासा का सम्यक्, संपुष्ट, सारगर्भित, सार्वभौमिक, सर्वजनहितार्थ समाधान से संदर्भित ग्रहयोगों से सम्बन्धित तथा व्यक्ति के व्यवसाय, व्यस्तता, विलासिता की उपलब्धता, प्रभुता, अधिकारों की समग्रता, ऐश्वर्य, कीर्ति, वैभव, सम्पत्ति, समृद्धि, सत्ता, सम्पदा, सौभाग्य के अतिरिक्त सिंहासन तथा राज्य प्राप्ति के अन्यान्य योगों के साथ-साथ विपन्नता, दरिद्रता, चिन्ता, विपत्ति, विनाश, विफलता, विकृति, व्यवधान, अवरोध, अनैतिकता, दुर्भाग्य, दुर्दमनीय दारुण दुखों की व्यथा, धनहानि, आस्था तथा विश्वास की निर्बलता, धूर्तता, दैहिक सबलता तथा पुष्टता से सम्बन्धित सभी ग्रहयोगों तथा पाठकों की जिज्ञासा का तर्कसंगत विवेचन, विवरण, व्यावहारिक विश्लेषण सहित प्रत्युत्तर सन्निहित, समाहित व समायोजित है।
किसी भी जन्मांग से सम्बन्धित भविष्य के आकलन हेतु ग्रहयोगों का विस्तृत, सारगर्भित, सारस्वत व तलस्पर्शी अध्ययन, अनुभव, अभ्यास और अनुसंधान का महत्व सर्वोपरि है जिसके अभाव में जातक की प्रभुता, सत्ता, संपदा, समृद्धि तथा प्रशासन आदि से संदर्भित सटीक अनुमान सम्भव नहीं है।
योग पारिजात को 1. राजयोग, 2. भाग्य योग, 3. धन योग, तथा 4. अनुपम योग से शीर्षांकित किया गया है जिसके अंतर्गत 850 प्रामाणिक, शास्त्रगर्भित तथा आचार्यानुमोदित ग्रहयोग, विविध व्यावहारिक जन्मांगों के उदाहरण सहित सन्निहित हैं। इसके अतिरिक्त सूर्य और चन्द्रमा से संदर्भित ग्रहयोग, केन्द्रत्रिकोण राजयोग, महापुरुष राजयोग, महाभाग्य योग, अखण्ड साम्राज्य योग, उच्चस्थ ग्रहकृत राजयोग, राशिकृत राजयोग, विपरीत राजयोग, नीचभंग तथा राजभंग ग्रहयोग, विपन्नता प्रदायक ग्रहयोग, नाभस योग, नवांश संदर्भित शुभ और अशुभ ग्रहयोग तथा नवांश चक्र पर आधारित राजयोग आदि शीर्षांकित विविध अध्यायों में संस्कृत के श्लोकों में वर्णित ग्रहयोगों को ज्योतिष शास्त्र के वैज्ञानिक धरातल पर परखकर तथा सहस्रों जातकों, जातिकाओं आदि के जन्मांगों पर क्रियान्वित करने के उपरान्त जिज्ञासु पाठकों के कल्याणार्थ योग पारिजात में सुरुचिपूर्ण स्वरूप में समायोजित किया गया है।₹450.00 -
Comprehensive VEDIC Numerology vol -I
₹240.00Name numerology in Vedic esotericism is just one of four different types of personal number interpretation systems. Each of the four systems represents a certain aspect of our ₹300.00 -
ग्रह योग संक्षेपिका
₹320.00ग्रन्थ-परिचय
ग्रहयोगों की महत्ता का अनुमान कोई प्रबुद्ध ज्योतिष प्रेमी ही लगा सकता है। कितने ही जन्मांगों का गहन विश्लेषण करने पर भी, उनके मध्य सन्निहित मर्म को तब तक नहीं जाना जा सकता, जब तक ग्रहयोगों और उनके परिणाम का सम्यक् ज्ञान न हो। डा. राधाकृष्णन, पं. जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गाँधी, डा. राजेन्द्र प्रसाद एवं नरेन्द्र मोदी आदि के अत्यंत साधारण दिखने वाले जन्मांगों का रहस्य ग्रहयोगों के संज्ञान के अभाव में कदापि स्पष्ट नहीं हो सकता है। वस्तुतः ग्रहयोग ज्योतिष शास्त्र की आत्मा है। ग्रहयोगों की उपेक्षा करके जन्मांग में छिपे रहस्य को कदापि नहीं जाना जा सकता चाहे ग्रह स्थितियों, उनके बलाबल, दृष्टि, युति, स्वामित्व, नक्षत्र, राशि, भाव आदि की कितनी भी व्याख्या की जाए। ग्रहों का अपनी उच्च या नीच राशि में स्थित होना, अनुकूल फल प्रदान करेगा या प्रतिकूल, यह ग्रहयोगों पर निर्भर करता है। प्रायः देखने में आता है कि जिन जन्मांगों में छह ग्रह भी अपनी उच्च राशि में स्थित हैं, वह नितांत सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं; तथा जिनके जन्मांगों में अनेक नीच राशिस्थ ग्रह हैं, वह सतह से उठकर शिखर तक पहुँचे हैं। इसका रहस्य तभी स्पष्ट हो सकता है जब ग्रहयोगों के सम्यक् संज्ञान एवं सटीक क्रियान्वयन का अनुमान हो।
ग्रह योग संक्षेपिका के अध्ययन, अनुसंधान व अभ्यास के साथ-साथ ग्रहयोगों के मनन, चिंतन और मंथन में अत्यन्त सुगमता होगी। जो जिज्ञासु ज्योतिष प्रेमी एक दृष्टि में ग्रहयोगों को आत्मसात् करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक शीघ्र संदर्भित पुस्तिका के समतुल्य है। श्रीमती मृदुला त्रिवेदी एवं श्री टी.पी. त्रिवेदी ने अथक चेष्टा की है कि कोई भी ग्रहयोग, जो किसी भी ग्रहयोग से सम्बन्धित कृति में सन्निहित है, वह इस कृति के अन्तर्गत अवश्य उपलब्ध हो। लगभग 1200 ग्रहयोगों का संदर्भ, उनकी परिभाषा एवं परिणाम इस कृति का वैशिष्ट्य है। प्रबुद्ध और प्रखर ज्योतिष प्रेमियों को, जो मात्र योग की संरचना एवं उनके परिणाम के विषय में जानना चाहते हैं, उनके लिए इस कृति का अध्ययन मात्र ही पर्याप्त है।
ग्रह योग संक्षेपिका को सात अध्यायों में विभाजित किया गया है–1. विविध योग, 2. धन योग, 3. विवाह योग, 4. संतान योग, 5. आयु योग, 6. भवन एवं वाहन योग, तथा 7. विद्या, बुद्धि एवं शिक्षा योग।
ग्रह योग संक्षेपिका ग्रहयोगों पर केन्द्रित एक सम्पूर्ण व सरल कृति है जिसके अध्ययन से किसी भी जन्मांग में निर्मित होने वाले अन्यान्य ग्रहयोगों को रेखांकित करना सुगम है। अतः यह समस्त प्रबुद्ध पाठकों, जिज्ञासु छात्रों तथा विद्वान ज्योतिर्विदों के लिए पठनीय, अनुकरणीय, सराहनीय एवं संग्रहणीय ग्रन्थ है।
₹400.00 -
व्रत विधान : विवाह एवं सन्तान
₹320.00कलिकाल के वर्तमान चक्र के विकृत एवं विरूपित स्वरूप में निमग्न होते जा रहे समाज के मध्य व्रत संपादन की लोकप्रियता, उपयोगिता तथा उसके विलक्षण प्रभाव की महिमा को ‘व्रत विधान : विवाह एवं सन्तान’ नामक कृति के मधुरिम मधुवन के महकते प्रांगण में संबंधित जातकों के सम्मुख प्रस्तुत करने की चेष्टा की गई है। यह कृति नौ पृथक पृथक अध्यायों में व्याख्यायित है जिन्हें अग्रांकित शीर्षकों से स्थिर किया गया है-
1. मंत्र : सत्यान्तिक विश्लेषण, 2. वैवाहिक विलम्ब एवं ग्रहयोग : ज्योतिषीय
विश्लेषण, 3. वैवाहिक विलम्ब कुछ अनुभूत मंत्र, स्तोत्र एवं प्रयोग, 4. व्रत परिज्ञानः प्रविधि एवं प्रावधान, 5. वैवाहिक समस्याओं का सुगम समाधान व्रत विधान, 6. विशिष्ट व्रत का अनुसरण : वैवाहिक विसंगतियाँ, वैधव्य, पार्थक्य का शमन, 7. संतति सुगम : परिहार प्रावधान, 8. सर्वश्रेष्ठ अनुष्ठान व्रत विधान तथा 9. प्रमुख पुत्र सुगम व्रत एवं विधान
विविध व्रत विधान, विवाह एवं सन्तान से संबंधित अनेक सुगम समाधान इस कृति में अनुमान किए गए हैं। प्रायः व्रत और उपवास की भिन्नता से अनभिज्ञ जन-सामान्य व्रत को अनुष्ठान के रूप में उपयोग करने तथा उसके चमत्कृत कर देने वाले प्रभाव से भिन्न है। इस वास्तविकता की सम्यक् व्याख्या ‘व्रत विधान विवाह एवं सन्तान’ नामक कृति में आविष्ठित है। वैवाहिक विलम्ब एवं विघटन का सुगम समाधान है- मंत्रजप, स्तोत्र पाठ, व्रत और दान। इसी प्रकार से संततिहीनता को संतति सुख में रूपांतरित करने हेतु विविध विधान मंत्र प्रयोग तथा अनेक व्रत और उनका अद्भुत एवं अनुभूत व्यावहारिक पक्ष इस कृति में अनुमान किया गया है
वैवाहिक विलम्ब, विघटन, संततिहीनता अथवा शाप से ग्रसित अनेक ऐसे जातक हैं जो संस्कृत के मंत्र, स्तोत्र तथा अनुष्ठान का प्रतिपादन करने में समर्थ नहीं हैं तथा न ही वह योग्य आचार्यों द्वारा संबंधित अनुष्ठानों का प्रतिपादन कराने में सक्षम हैं। विवाह एवं सन्तान सुख हेतु आतुर एवं प्रतीक्षारत जातकों के लिए सर्वोच्च सुगम मार्ग है, उपयुक्त व्रत का चयन तथा विधि विधान सहित उसका अनुकरण, आरंभ एवं उद्यापन आदि, जो इस कृति का सर्वस्व है।
इस कृति में अनेक पुत्रप्रदाता व्रत एवं संतति सुख की कामना की संसिद्धि हेतु विविध व्रत एवं विधान दार्शनिक किए गए हैं, जो अद्भुत और अनुभूत हैं जिनमें से कात्यायनी व्रत, पुंसवन व्रत, पयोव्रत, श्रावण शुक्ल एकादशी व्रत, षष्ठी देवी व्रत आदि प्रमुख हैं तथा वैवाहिक विलम्ब के समाधान हेतु विविध वारों से संबंधित व्रतविधान और वैवाहिक संकट एवं प्रशासन के परिहार हेतु मंत्रजप, स्तोत्र पाठ आदि के साथ-साथ उसके विधान भी इस कृति में सत्रिहित हैं
यह कृति अपनी सारगर्भिता, सार्वभौमिकता तथा उपयोगिता के कारण समस्त ज्योतिष प्रेमियों के लिए अत्यन्त हितकर और लाभप्रद सिद्ध होगी, इसमें किंचित सन्देह नहीं।₹350.00










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