सर्वार्थ चिंतामणि

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सर्वार्थ चिन्तामणि’ में होरा शास्त्र से जुड़े प्रायः सभी विषय ग्रंथकार ने 18 अध्याय व लगभग 2000 श्लोकों में समेटने का सफल प्रयास किया है। राशि और ग्रहों के परिचय, सभी पोडशवर्ग, लग्नादि द्वादश भाव के फल कथन में उपयोगी कालबली, स्थान बली ग्रहों की दशा, सूर्य से केतु पर्यन्त सभी ग्रहों की दशा और विविध योग, आयुष्य विचार, ग्रह अवस्था फल, उच्चस्थ, स्वक्षेत्री, मित्रक्षेत्री अन्तर्दशा का फल कथन के बाद प्रकीर्ण अध्याय में कुछ महत्वपूर्ण योगा तथा शुष्क व आर्द्र राशि और ग्रहों की चर्चा हई है। अंतिम अध्याय संख्या 18 में कारक और बाधक ग्रहों पर चर्चा के बाद ग्रंथ की समाप्ति हुई है।
सर्वार्थ चिन्तामणि’ में होरा शास्त्र से जुड़े प्रायः सभी विषय ग्रंथकार ने 18 अध्याय व लगभग 2000 श्लोकों में समेटने का सफल प्रयास किया है। राशि और ग्रहों के परिचय, सभी पोडशवर्ग, लग्नादि द्वादश भाव के फल कथन में उपयोगी कालबली, स्थान बली ग्रहों की दशा, सूर्य से केतु पर्यन्त सभी ग्रहों की दशा और विविध योग, आयुष्य विचार, ग्रह अवस्था फल, उच्चस्थ, स्वक्षेत्री, मित्रक्षेत्री अन्तर्दशा का फल कथन के बाद प्रकीर्ण अध्याय में कुछ महत्वपूर्ण योगा तथा शुष्क व आर्द्र राशि और ग्रहों की चर्चा हई है। अंतिम अध्याय संख्या 18 में कारक और बाधक ग्रहों पर चर्चा के बाद ग्रंथ की समाप्ति हुई है।

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