वर्ग कुण्डली रहस्य
₹300.00₹350.00
इंजीनियर मित्रों की कुंडली में राक्षस दशांश ने ही इस पुस्तक का बीजारोपण किया-ऐसा मानना अधिक न्यायसंगत होगा। इसी बीच गुरुजन के आदेश और मित्रों के आग्रह से वर्गों में संज्ञा विचार पर एक लघु पुस्तिका भी मेरे नाम से प्रकाशित हुई।
| इंजीनियर मित्रों की कुंडली में राक्षस दशांश ने ही इस पुस्तक का बीजारोपण किया-ऐसा मानना अधिक न्यायसंगत होगा। इसी बीच गुरुजन के आदेश और मित्रों के आग्रह से वर्गों में संज्ञा विचार पर एक लघु पुस्तिका भी मेरे नाम से प्रकाशित हुई। |
| Category: | Alpha |
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योग पारिजातराजयोग
₹360.00योग पारिजात में समस्त प्रसिद्ध, प्रतिष्ठित, प्रशंसित, प्राचीन ज्योतिष शास्त्र के प्रमाणित शास्त्रीय ग्रन्थों के मनन, मन्धन और चिन्तन के अथक प्रयास, परिश्रमसाध्य साधना के उपरान्त विविध विशिष्ट ग्रहयोगों को व्यावहारिक जन्मांगों के निकष पर परख कर, उनका स्पष्ट सतर्क श्रृंखलाबद्ध चयन और संकलन करके प्रबुद्ध पाठकों को अनादिकाल से चली आ रही जिज्ञासा का सम्यक्, संपुष्ट, सारगर्भित, सार्वभौमिक, सर्वजनहितार्थ समाधान से संदर्भित ग्रहयोगों से सम्बन्धित तथा व्यक्ति के व्यवसाय, व्यस्तता, विलासिता की उपलब्धता, प्रभुता, अधिकारों की समग्रता, ऐश्वर्य, कीर्ति, वैभव, सम्पत्ति, समृद्धि, सत्ता, सम्पदा, सौभाग्य के अतिरिक्त सिंहासन तथा राज्य प्राप्ति के अन्यान्य योगों के साथ-साथ विपन्नता, दरिद्रता, चिन्ता, विपत्ति, विनाश, विफलता, विकृति, व्यवधान, अवरोध, अनैतिकता, दुर्भाग्य, दुर्दमनीय दारुण दुखों की व्यथा, धनहानि, आस्था तथा विश्वास की निर्बलता, धूर्तता, दैहिक सबलता तथा पुष्टता से सम्बन्धित सभी ग्रहयोगों तथा पाठकों की जिज्ञासा का तर्कसंगत विवेचन, विवरण, व्यावहारिक विश्लेषण सहित प्रत्युत्तर सन्निहित, समाहित व समायोजित है।
किसी भी जन्मांग से सम्बन्धित भविष्य के आकलन हेतु ग्रहयोगों का विस्तृत, सारगर्भित, सारस्वत व तलस्पर्शी अध्ययन, अनुभव, अभ्यास और अनुसंधान का महत्व सर्वोपरि है जिसके अभाव में जातक की प्रभुता, सत्ता, संपदा, समृद्धि तथा प्रशासन आदि से संदर्भित सटीक अनुमान सम्भव नहीं है।
योग पारिजात को 1. राजयोग, 2. भाग्य योग, 3. धन योग, तथा 4. अनुपम योग से शीर्षांकित किया गया है जिसके अंतर्गत 850 प्रामाणिक, शास्त्रगर्भित तथा आचार्यानुमोदित ग्रहयोग, विविध व्यावहारिक जन्मांगों के उदाहरण सहित सन्निहित हैं। इसके अतिरिक्त सूर्य और चन्द्रमा से संदर्भित ग्रहयोग, केन्द्रत्रिकोण राजयोग, महापुरुष राजयोग, महाभाग्य योग, अखण्ड साम्राज्य योग, उच्चस्थ ग्रहकृत राजयोग, राशिकृत राजयोग, विपरीत राजयोग, नीचभंग तथा राजभंग ग्रहयोग, विपन्नता प्रदायक ग्रहयोग, नाभस योग, नवांश संदर्भित शुभ और अशुभ ग्रहयोग तथा नवांश चक्र पर आधारित राजयोग आदि शीर्षांकित विविध अध्यायों में संस्कृत के श्लोकों में वर्णित ग्रहयोगों को ज्योतिष शास्त्र के वैज्ञानिक धरातल पर परखकर तथा सहस्रों जातकों, जातिकाओं आदि के जन्मांगों पर क्रियान्वित करने के उपरान्त जिज्ञासु पाठकों के कल्याणार्थ योग पारिजात में सुरुचिपूर्ण स्वरूप में समायोजित किया गया है।₹450.00 -
शक्ति कुंज’
₹320.00शक्ति कुंज’ भक्ति भावना का त्रिभुवन मोहन, भव्य भुवन है जो भगवान पराम्बा, जगतजननी, जगदम्बा के परम पावन पदपंकज के प्रसादामृत से परिपूर्ण प्रेरणा प्रार्थना प्रभूथ प्रार्थना पथ एवं प्रांजल प्राशीष है। ‘शक्ति’ भाव और भक्ति, साधना और शक्ति, प्रार्थना और आराधना से पवित्र प्रथम, मध्यम और उत्तर चरित्र से सुशोभित भव्य त्रिभुवन मोहन, दिव्य सौन्दर्य से आश्रम, सुगठित, संयोजन, सु साधन, अविद्या, सारस्वत, शाश्वत साधना का स्वर्णिम शक्ति सेतु है, जो स्तुति मणिमण्डित स्तम्भों पर आधारित है, सात सौ रत्नजड़ित स्वर्ण सोपानों से निर्मित है, जिसमें आदिशक्ति, महाशक्ति, पराम्बा, भगवान, कुव्वरी, आदि शामिल हैं। जगतजननी के परम पावन पवित्र प्रांजल चरित्र का दर्शन, विपुल अनुकंपा के निमित्त सिद्धांत सु नियोजित आक्षेप के साथ जाने वाले, विशिष्ट अनुष्ठान का सम्यक विश्लेषण, विवेचन का आख्यान, व्याख्यान विधि-विधान सहित शास्त्र आविष्ठित है।
‘शक्ति कुञ्ज’ 16 अध्यायों में विवेचित एवं व्याख्यायित है जिसे मोक्ष-प्रदायिनी श्री दुर्गासप्तशती के प्रसाद-प्रबन्ध की विस्तृत के साथ-साथ नैमित्तिक साधनाओं के विभिन्न पक्षों पर केन्द्रित किया गया है। श्री दुर्गासप्तशती भू-लोकवासियों की मनोकामनाओं एवं सम्यक् अभिलाषाओं की संपूर्ति एवं संसिद्धि हेतु माता जगदम्बा का अनुपम वरदान है, जो मानव समाज को प्रसादामृत रूप उपलब्ध है।
*भक्ति पुंज: शक्ति कुंज-श्री दुर्गासप्तशती शक्ति रहस्य शक्ति साधनाः संस्कार अनुष्ठान दुर्गाभुवन कामनापरक श्री दुर्गासप्तशती का अनुष्ठान अनुष्ठान अनुष्ठान और नवार्ण मंत्र एक पूजन शतचंडी एवं दुर्गापाठ विधान श्री दुर्गासप्तशती अनुष्ठान-अष्ट सिद्धि उपदेश श्री दुर्गासप्तशती : व्यापक प्रवचन सप्तशती स्थित प्रसिद्ध सम्पुटित मंत्र अन्य मंत्रों की संसिद्धि कथा श्री दुर्गासप्तशती का मंत्रजप साधना के सामान्य सूत्र श्री देव्यथर्वशीर्ष और महत्वपूर्ण चंडिका मंगलमंत्र का प्रयोग संपूर्ण मंत्रों की संसिद्धि के लिए ‘सिद्धकुंजिका स्तोत्र’ और ‘बीसा यंत्र’ प्रयोग शक्ति साधना: कतिपय चमत्कार कर देने वालेअंतरंग आभास।
इन अतिरिक्त अन्यान्य प्रस्तावों की संसिद्धि के लिए श्री दुर्गासप्तशती का मंत्रजप विधान, ‘शक्ति कुंज’ की दुर्लभ वैशिष्ट्य है जिसमें व्याहतों से संयुक्त संपुट मंत्रों का जप विधान, विनियोग, संख्या और प्रविधि आदि सिद्धांत शामिल हैं।
श्री दुर्गासप्तशती आस्तिकों की आस्था का ललाट है। माता दुर्गा के अनुपम अनुराग एवं शक्ति साधना की सौरभ सुधा-धारा ‘शक्ति कुञ्ज’ में अविरल गति से प्रवाहित, प्रसारित हो रही है। भक्ति भावना के भव्य भुवन में त्रिभुवन मोहिनी, महाशक्ति पराम्बा की अवर्णनीय अनुरागपूर्ण आस्था, आराधना, अर्चना, अभ्यर्थना के स्वर्णिम संकल्प का हीरक हस्ताक्षर है- ‘शक्ति कुञ्ज’, जिसका पठन और पारायण शक्ति के भक्तों, साधकों, आराधकों, उपासकों तथा जिज्ञासुओं हेतु अपरिहार्य है।₹400.00 -
परिणय निर्णयविवाह समय संज्ञान
₹350.00समस्त सांसारिक कर्त्तव्यों के निर्वाह हेतु विवाह एक संकल्प है जो तन-मन और मस्तिष्क को, कर्तव्य और प्रेम की भावना से आलोकित, आंदोलित, प्रमुदित व प्रफुल्लित करता है। विवाह एक संस्कार है जिसे सर्वत्र शास्त्र, समाज, संस्कृति एवं न्याय की सहमति, अनुमति प्राप्त है। विवाह समय संज्ञान नामक यह कृति उन अन्यान्य संकल्पों और ज्योतिष प्रेमियों के प्रबल अनुरोध का प्रतिफल है, जो विवाह प्रतिपादन के सटीक समय से संदर्भित, प्रामाणिक, प्रतिष्ठित शोध सिद्धान्तों के अभाव में अंकुरित, प्रस्फुटित हुए थे, जिनके क्रियान्वयन और अनुकरण द्वारा विवाह का सटीक समय सरलता से रेखांकित किया जा सकता है। हमारे समाज में सदा से ही व्याप्त विवाह के असंतुलित समीकरण के संज्ञान के सम्यक् समाधान से अभिपूरित यह कृति, विवाह काल निर्धारण हेतु हीरक हस्ताक्षर सिद्ध होगी। विवाह जीवन को दो पृथक-पृथक् भागों में विभाजित करता है। प्रथम विवाह के पूर्व का जीवन, द्वितीय- विवाह के उपरान्त का जीवन। अतः विवाह प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण घटना है और इस विषय में भी अधिकांश ज्योतिर्विदों का भविष्यकथन प्रायः मिथ्या सिद्ध होता है जो ज्योतिष विज्ञान की प्रामाणिकता के समक्ष प्रश्नचिहन लगा देता है। विवाह का सटीक समय रेखांकित न कर सकने का कारण इस विषय का अपूर्ण ज्ञान और अनभिज्ञता ही है। कदाचित आज तक किसी ने भी विवाह समय संज्ञान के संदर्भमें इतने तलस्पर्शी, सघन शोध प्रबन्ध की संरचना नहीं की, जिसके अध्ययन अनुसरण और अभ्यास से विवाह के सटीक समय का पूर्वानुमान किया जा सके। विवाह के समय से संदर्भित अन्यान्य शोध सिद्धान्तों की प्रामाणिकता को शताधिक भिन्न-भिन्न उदाहरणों द्वारा प्रदर्शित और परिलक्षित करके विषय की जटिलता को सुगम स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है, जो विवाह समय संज्ञान का वैशिष्ट्य है, जिसे परिज्ञान पक्ष एवं परिहार पक्ष के अंतर्गत तेरह अग्रांकित अध्यायों में विभाजित व व्याख्यायित किया गया है:
* परिज्ञान पक्ष: 1. ज्योतिष विज्ञान एवं विवाह में व्यवधान; 2. शास्त्रानुमोदित विवाह समय संज्ञान सूत्र; 3. विवाह काल निर्णय संदर्भित अनुसंधान; 4. विवाह समय संज्ञान प्रविधिः 5. गोचर का शनि सुनिश्चित करता है, विवाह का समय; 6. विवाह काल निर्धारण में गोचर के मंगल एवं शुक्र की भूमिका: 7. प्रौढ़ावस्था में विवाह; 8. विवाह प्रतिबन्धक योग का विस्तृत विवेचन, परिहार पक्ष 9. शीघ्र, सुखद एवं अखण्ड वैवाहिक सुख हेतु आध्यात्मिक उपचार, 10. ग्रह शान्ति: विविध विधान; 11. कन्याओं के विवाह में अवरोध से रक्षार्थ अनुभूत मंत्र प्रयोग, 12. कन्याओं के शीघ्र एवं सुखद विवाह हेतु स्तोत्र आराधना, एवं 13. पुरुषों के विवाह में व्यवधान का समाधान।
अतः विवाह के समय के संदर्भ में सत्य घटित होने वाले शोध सिद्धान्तों को ज्योतिष शास्त्र के यशस्वी एवं बहुप्रशंसित लेखकद्वय श्रीमती मृदुला त्रिवेदी तथा टी.पी. त्रिवेदी ने इस कृति में प्रस्तुत किया है, जो समस्त ज्योतिष प्रेमियों, अधिकांश ज्योतिर्विदों, जिज्ञासु पाठकों तथा प्रखर छात्रों के लिए पठनीय, अनुकरणीय एवं संग्रहणीय है।₹430.00 -
शनि दशा फलदीपिका
₹400.00शनि दशाफल दीपिका’ हमारे शीर्षस्थ ज्योतिर्विद् श्री टी.पी. त्रिवेदी के सुदीर्घ, सघन मंथन का नवनीत है। उन्होंने लक्षाधिक जातकों के जन्मांगों का अनुशीलन और प्रायोगिक अन्वेषण करके इस वृहत् ग्रन्थ का प्रणयन किया है तथा इसके माध्यम से एक नव्य सैद्धान्तिकी निर्मित की है।
इसके पूर्व भी श्री त्रिवेदी ‘सैटर्न: द टाइमर’, ‘शनि शमन’, ‘शनि संहिता’ आदि प्रस्थान-ग्रन्थों और शत-सहस्राधिक शोध आलेखों के माध्यम से शनि की अन्तर्दशाओं, उसकी द्वादश राशिगत स्थितियों, उसकी विभिन्न आकृतियों-प्रवृत्तियों, उसके वर्ण, वाहन, दृष्टिफल, गोत्रोत्पत्ति और कारक तत्वों पर सतर्त विमर्श करते रहे हैं।
इस ग्रन्थ की विशिष्टता, बल्कि अनन्यता यह है कि यह जितना शास्त्रानुमोदित है, उतना ही व्यावहारिक अनुभवों, दैनंदिन अभ्यासों और अनुसंधानों पर आधारित है। यह श्री त्रिवेदी की चार दशकों की साधना का सुफल है। निस्संदेह यह उनके बहुआयामी चिंतन-अनुचिंतन से निस्सृत है। इसमें दशाफल निर्धारण, सिद्धान्त का निर्वचन ही नहीं किया गया है, प्रत्युत् जातक की महादशा एवं अन्तर्दशा के शुभाशुभफलों की अनुप्रयोगात्मक संसिद्धि (फलश्रुति) भी अन्तर्घटित की गयी है।
शनि अन्यानेक दुर्भेद्य रहस्यों का पुंज है। इससे संबंधित भौतिक प्रपंच के कोटि-कोटि जातक उपकृत या संत्रस्त हैं। ज्योतिषी जी ने अष्टोत्तरी, विंशोत्तरी महादशा, योगिनी एवं गोचर दशा के शास्त्रीय शनि विषयक अनेक गूढ़, दुःसाध्य तथा जटिल समस्याओं का निदान-समाधान यहां प्रस्तुत किया है। उनके विशिष्ट तथा नितांत निजी स्थान शनि के केंद्रगत, त्रिकोणस्थ, उपचय स्थानगत, त्रिभावस्थ भाव से तथा उनके इष्ट-अनिष्ट प्रतिफल से जुड़े हुए हैं।
₹500.00 -
शुक्र दशाफलदीपिका
शुक्र दशाफल दीपिका को अग्रांकित 20 अध्यायों में व्याख्यायित और विभाजित किया गया है जिसमें शुक्र की महादशा के फल के साथ-साथ शुक्र की महादशा के मध्य अन्तर्दशाओं का भी विस्तृत अनुसंधानात्मक अध्ययन पाठकों के कल्याणार्थ प्रस्तुत किया गया है। इस कृति में जहाँ एक ओर समस्त ज्योतिष शास्त्र के शास्त्रीय ग्रंथों में व्याख्यायित उन श्लोकों का उल्लेख है जो ऋषियों ने अब से सैकड़ों या सहस्रों वर्ष पूर्व लिखे थे, वहीं दूसरी ओर इतने लम्बे अंतराल के उपरान्त प्रकृति में होने वाले परिवर्तन ने दशाफल निरूपण में जिस प्रकार के अद्भुत, अविश्वसनीय और समयानुरूप परिवर्तन किये हैं, जिन्हें पूर्णतः समझ पाने के लिए हमने ज्योतिष शास्त्र में दशाफल पर केन्द्रित अपने 40-45 वर्षों के अनुभव और साधना का मर्मस्पर्शी, प्रखर, संज्ञानात्मक, अध्ययनात्मक उपयोग करने के उपरान्त प्रबुद्ध पाठकों के कल्याणार्थ इस कृति को साकार स्वरूप प्रदान किया है।
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सूर्यदशा फलदीपिका
₹320.00ज्योतिष विज्ञान की महत्ता व समय की सत्ता के मध्य निर्मित होने वाले समीकरण की स्वर्णमण्डित शिला ही दशाफल दीपिका का सबलतम है जिसका रहस्य भारतीय ऋषि-मनीषियों ने अपनी योग साधना के बल पर समस्त मानवता के कल्याण हेतु समय-समय पर उद्घाटित किया था। ज्योतिष शास्त्र में विंशोत्तरी दशा सर्वाधिक विश्वसनीय व अनुकरणीय है। सूर्यग्रह की महादशा, अंतर्दशा व प्रत्यंतरदशा पर केंद्रित सूर्य दशाफल दीपिका नामक यह शोधप्रबन्ध दशान्तदंशा के संदर्भ में सत्य भविष्यकथन हेतु क्रांतिकारक सिद्ध होगा। इस सम्बन्ध में समस्त ज्योतिष ग्रन्थों में अनगिनत सूत्र उपलब्ध हैं जिनका उपयुक्त समन्वय व समायोजन कृति का सर्वस्व है। वस्तुतः यह कृति विंशोत्तरी दशाफल कथन करने की अद्भुत तकनीक का उत्कृष्ट प्रमाण है। विंशोत्तरी दशा के क्रियान्वयन से पूर्व ज्योतिष शास्त्र के ग्रन्थों में सन्निहित समस्त श्लोकों के मर्म को आत्मसात् करके उनके सटीक क्रियान्वयन करने की कला के अभ्यास के अभाव में जन्मांग के आधार पर भविष्य में होने वाली अनुकूल, प्रतिकूल घटनाओं के समय की घोषणा कदापि नहीं करनी चाहिए। दशाफल कथन की अविश्वसनीयता व अल्पज्ञान की सत्ता को देखकर लेखकों का मन करुण क्रन्दन कर उठा और उन्हें विंशोत्तरी दशा पर शोधपरक चिंतन व लेखन करने हेतु विवश किया।
सूर्य दशाफल दीपिका को अग्रांकित 12 अध्यायों में व्याख्यायित किया गया है: 1. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का महत्व, 2. विंशोत्तरी दशाफल निर्णय, 3. दशाफल कथन हेतु कतिपय आवश्यक सूत्र, 4. नक्षत्र के आधार पर विंशोत्तरी दशा का फलकथन, 5. सूर्य की महादशा का फल. 6. विविध भावगत सूर्य की महादशा का फल, 7. बारह राशियों में सूर्य की दशा का फल, 8. उच्च-नीच आदि राशिगत सूर्य की दशा का फल, 9. सूर्य की महादशा में विविध ग्रहों की अंतर्दशा का फल, 10. सूर्य की महादशा में प्रत्यंतर दशाओं का फल, 11. सूर्यग्रहण एवं चन्द्रग्रहण परिज्ञान एवं परिहार, तथा 12. सूर्य की महादशा की अनुकूलता हेतु अनुभूत व अद्भुत परिहार।
प्रबुद्ध पाठकों व जिज्ञासु छात्रों के प्रबल आग्रह पर कृति में परिहार का भी संयोजन किया गया है क्योंकि इसके अभाव में कृति की पूर्णता संदिग्ध थी। प्रबुद्ध पाठक व जिज्ञासु छात्र सूर्यग्रह पीड़ा परिहार के अध्ययन से अवश्य लाभान्वित होंगे। विंशोत्तरी दशा पर केन्द्रित शताधिक पुस्तकों के अध्ययन ने ही लेखकद्वय को प्रत्येक ग्रह की दशान्तर्दशा पर आधारित दशाफल श्रृंखला की पुस्तकों की संरचना हेतु प्रेरित किया ताकि विविध दशान्तर्दशाओं के विषय को अनुभव के निकष पर कस कर वास्तव में प्रतिफलित होने वाली घटनाओं के सम्यक् उल्लेख का समायोजन किया जा सके। विश्वास है कि सूर्य दशाफल दीपिका में विद्यमान सूत्रों का सटीक क्रियान्वयन शत-प्रतिशत सत्य भविष्यकथन करने में अत्यन्त सहायक सिद्ध होगा।
₹400.00 -
परिणय निर्णयमंगली दोषः सन्निहित यथार्थ
₹320.00वर-वधू के जन्मांगों में विद्यमान मंगली दोष के संतुलन की अनिवार्यता के साथ-साथ आवश्यकता है, मंगली दोष के वास्तविक रहस्य के तलस्पर्शी संज्ञान और अनुभव की, जिसे मंगली दोषः सन्निहित यथार्थ नामक इस कृति में व्यावहारिक जन्मांगों तथा शास्त्रीय सूत्रों और लेखकद्वय के अध्ययन, अनुभव, अनवरत अनुसंधान और अभ्यास के आधार पर नीर-क्षीर विवेचनोपरान्त प्रस्तुत किया गया है।
जन्मांग में मंगल ग्रह की कतिपय विशिष्ट स्थितियाँ ही वैवाहिक सुख में प्रायः विपरीत परिस्थितियाँ उत्पन्न करती हैं जिसे मंगली दोष से रेखांकित किया जाता है। मंगली दोष के सन्निहित यथार्थ से प्रायः अनभिज्ञ ज्योतिष प्रेमी एवं तथाकथित ज्योतिर्विद वर-वधू के जन्मांगों में, मंगली दोष का मिलान करते समय भारी भूल कर बैठते हैं, जिसका वास्तविक कारण विषय की अज्ञानता एवं अल्पज्ञता ही होता है।
वस्तुतः मंगल ग्रह ही वैवाहिक विच्छेद, विसंगतियों, विषमताओं व वैधव्य के अतिरिक्त विवाह के विघटन की विविध अप्रिय परिस्थितियों का सूत्रपात करता है और मंगल ही अनाचार, दुराचार, अत्याचार, बलात्कार और हिंसा का हेतु निर्मित करने वाला ग्रह है परन्तु अनिवार्यता है मंगल ग्रह के प्रभाव के गहन अध्ययन तथा विश्लेषण के उपरान्त उसके वास्तविक परिणाम के उपयुक्त और सटीक आकलन की।
यह कृति अग्रांकित 11 अध्यायों में विभाजित है- 1. मंगल ग्रह ज्ञातव्य तथ्य 2. मंगली दोष: सन्निहित यथार्थ 3. लग्नगत मंगल का फल 4. द्वितीय भावगत मंगल का फल 5. चतुर्थ भावगत मंगल का फल 6. महिलाओं हेतु पंचम भावगत मंगल का फल 7. सप्तम भावगत मंगल का फल 8. अष्टम भावगत मंगल का फल 9. द्वादश भावगत मंगल का फल 10. असंतुलित मंगली दोष के आश्चर्यजनक परिणाम, तथा 11. मंगल ग्रहः दशा दिग्दर्शन।
मंगल ग्रह व मंगली दोष के ज्ञातव्य तथ्य के विषय में अन्यान्य सत्य तथा मिथ्या विचारों की व्याख्या, विश्लेषण व विवेचन, असंतुलित मंगलीदोष के आश्चर्यजनक परिणाम एवं मंगल ग्रह: दशा दिग्दर्शन आदि की शोधपरक च्याख्या, कृति का वैशिष्ट्य है। विविध लग्नों के लिए मंगली दोष का परिवर्तित होता हुआ स्वरूप ही शोध संज्ञान और अनुसंधान है जो वर्तमान युग की अनिवार्यता है। जिज्ञासुओं व ज्योतिष प्रेमियों की अभिलाषा, आकांक्षा और अपेक्षा की सारगर्भिता एवं सत्यता ही उनके अखंडित विश्वास का सेतु निर्मित करती है। रचनाकारद्वय श्रीमती मृदुला त्रिवेदी व टी.पी. त्रिवेदी ने बारहों लग्नों के लिए, विविध प्रकार के मंगली दोष का मर्म और अनुसंधान प्रस्तुत करके, दीर्घकाल से प्रतीक्षित प्रबुद्ध पाठकों के आग्रह को साकार आकार प्रदान किया है।
₹400.00 -
बृहस्पति दशा फलदीपिका
₹320.00महादशा में हम स्वबाहुबल द्वारा अपार धन, यश, कीर्ति, वैभव, समृद्धि, सम्मान, पद एवं प्रतिष्ठा अर्जित करेंगे।
समय व्यतीत होता चला गया और बृहस्पति की महादशा के 16 वर्ष भी व्यतीत हो गए तथा हम पूरी बृहस्पति की महादशा पर्यन्त भीख ही माँगते रहे। हमारे सामने आर्थिक विषमता की ऐसी-ऐसी स्थितियाँ आयीं कि हमें आठ-आठ दिन तक भोजन भी उपलब्ध नहीं हुआ। अत्यन्त विपन्नता ने हमारे आत्मविश्वास को झकझोर कर रख दिया। तब हमें ज्ञात हुआ कि बृहस्पति धन और समृद्धि नहीं प्रदान करता है। इन 16 वर्षों में हमने ज्योतिष शास्त्र का गहन अध्ययन किया और ज्योतिष शास्त्र की हिन्दी और अंग्रेजी की लगभग सभी पुस्तकों का मनन, चिन्तन किया, जो बाद में हमारे बहुत काम आया। हम इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि बृहस्पति धन नहीं, बल्कि ज्ञान देता है। बृहस्पति दशाफल दीपिका के अन्तर्गत हमने दशाफल अध्ययन हेतु जो शोध सिद्धान्त प्रस्तुत किए हैं, उनके अध्ययन और क्रियान्वयन से हमारे प्रबुद्ध पाठकगण ऐसे अन्यान्य तथ्यों को भलीभांति समझ सकेंगे।
₹400.00










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