नक्षत्र विचार
₹240.00₹300.00
पुस्तक परिचय
बढ़ाएँ अपने को 12 राशियों में मत बाधिए …वैदिक ऋषियों की भांति अपने ज्ञान को 27 नक्षत्रों तक
ये तो सभी जानते हैं कि आकाश की 12 राशियों में ग्रहों की स्थिति जीवन में विभिन्न घटनाओं का कारण बनती है। इन राशियों पर ग्रहों का गोचर सुख-दुःख दिया करता है। सत्य शायद इससे परे है। 12 राशियाँ नहीं अपितु आकाश मंडल में 27 नक्षत्र हैं। नक्षत्र मंडल से निकली ऊर्जा धरती व धरती पर रहने वाले जीवों को प्रभावित करती है। यदि ग्रह गोचर राशि के साथ ‘नक्षत्र गोचर’ को सम्मिलित किया जाए तो परिणाम अधिक सटीक निकलते हैं। नक्षत्र के चिह्न, देवता, स्वभाव और कार्यशैली, कार्य पद्धति, जाति, लिंग, अंग, त्रिदोष, पद विचार, आजीविका या व्यवसाय, स्थान, गुण व तत्व, गण, दिशा व स्वभाव, विहित और वर्जित कार्य, नक्षत्र का स्वामी, नामाक्षर, योनि अनुकूलता, गूढ़ प्रभाव गोत्र, उपचार, उदाहरण तथा विविध के अन्तर्गत सभी नक्षत्रों पर गहन चर्चा हुई है। आशा है नक्षत्रों की यह अन्तरिक्ष यात्रा आपको रोचक व ज्ञानवर्धक लगेगी तथा ग्रहों के प्रभाव व उनकी कार्य प्रणाली को आप अधिक बेहतर ढंग से समझेंगे व लाभान्वित होंगे।
प्राश त्रिवेदी उस नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जो पूर्व व पश्चिम की विचारधाराओं के संगम से उत्पन्न हुई है। यह पीढ़ी सार्वभौमिक है तथा ‘समूची धरती मेरा गाँव’ की कल्पना को साकार करती है। प्राश त्रिवेदी का राहु-केतु पर शोध-प्रबन्ध बहुत लोकप्रिय रहा। ये आजकल लंदन में हैं तथा ज्योतिषीय परामर्श सेवा व संगीत के साथ अन्य अनेक रचानात्मक कार्यों से जुड़े हैं।
| Category: | Astrology |
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शनि दशा फलदीपिका
₹400.00शनि दशाफल दीपिका’ हमारे शीर्षस्थ ज्योतिर्विद् श्री टी.पी. त्रिवेदी के सुदीर्घ, सघन मंथन का नवनीत है। उन्होंने लक्षाधिक जातकों के जन्मांगों का अनुशीलन और प्रायोगिक अन्वेषण करके इस वृहत् ग्रन्थ का प्रणयन किया है तथा इसके माध्यम से एक नव्य सैद्धान्तिकी निर्मित की है।
इसके पूर्व भी श्री त्रिवेदी ‘सैटर्न: द टाइमर’, ‘शनि शमन’, ‘शनि संहिता’ आदि प्रस्थान-ग्रन्थों और शत-सहस्राधिक शोध आलेखों के माध्यम से शनि की अन्तर्दशाओं, उसकी द्वादश राशिगत स्थितियों, उसकी विभिन्न आकृतियों-प्रवृत्तियों, उसके वर्ण, वाहन, दृष्टिफल, गोत्रोत्पत्ति और कारक तत्वों पर सतर्त विमर्श करते रहे हैं।
इस ग्रन्थ की विशिष्टता, बल्कि अनन्यता यह है कि यह जितना शास्त्रानुमोदित है, उतना ही व्यावहारिक अनुभवों, दैनंदिन अभ्यासों और अनुसंधानों पर आधारित है। यह श्री त्रिवेदी की चार दशकों की साधना का सुफल है। निस्संदेह यह उनके बहुआयामी चिंतन-अनुचिंतन से निस्सृत है। इसमें दशाफल निर्धारण, सिद्धान्त का निर्वचन ही नहीं किया गया है, प्रत्युत् जातक की महादशा एवं अन्तर्दशा के शुभाशुभफलों की अनुप्रयोगात्मक संसिद्धि (फलश्रुति) भी अन्तर्घटित की गयी है।
शनि अन्यानेक दुर्भेद्य रहस्यों का पुंज है। इससे संबंधित भौतिक प्रपंच के कोटि-कोटि जातक उपकृत या संत्रस्त हैं। ज्योतिषी जी ने अष्टोत्तरी, विंशोत्तरी महादशा, योगिनी एवं गोचर दशा के शास्त्रीय शनि विषयक अनेक गूढ़, दुःसाध्य तथा जटिल समस्याओं का निदान-समाधान यहां प्रस्तुत किया है। उनके विशिष्ट तथा नितांत निजी स्थान शनि के केंद्रगत, त्रिकोणस्थ, उपचय स्थानगत, त्रिभावस्थ भाव से तथा उनके इष्ट-अनिष्ट प्रतिफल से जुड़े हुए हैं।
₹500.00 -
समृद्धि सूत्रVol 2
समृद्धि सूत्र’ ज्योतिष की मात्र सामान्य संरचना न होकर समृद्धि से सम्बन्धित प्रथम शास्त्रानुमोदित विस्तृत शोध प्रबन्ध है; कालांतर में जिसकी प्रशंसा, प्रतिष्ठा, परिचर्चा तथा गणना ज्योतिष के श्रेष्ठ शास्त्रों में सम्मिलित की जायेगी। समृद्धि से सम्बन्धित यह कृति स्वर्णिम शोध प्रस्तुत करने वाला माता लक्ष्मी का प्रसादामृत है जिसमें समृद्धि से सम्बन्धित समस्त जिज्ञासाओं एवं समस्याओं का समाधान सन्निहित है। ऐसे शोध प्रबन्ध की अनिवार्यता ने, जिसमें जन्मांग में विद्यमान विभिन्न ग्रहयोगों के अध्ययन, अनुसंधान और अनुभूति के आधार पर जातक की समृद्धि एवं सम्पन्नता की परिसीमा का सशक्त संज्ञान एवं सटीक अनुमान उपलब्ध हो सके तथा समृद्धि पथ के आरोह अवरोह, उन्नति अवनति, स्थिरता अथवा अस्थिरता के पूर्णतः स्पष्ट एवं सम्यक् संज्ञान का सारस्वत, शाश्वत सूत्र स्थापित हो सके, उसके निमित्त शास्त्रानुकूल वेदविहित समग्र ग्रन्थगर्भित सूत्रों का सतत्, सतर्क, सघन, सबल अध्ययन और अनुसंधान का अनुकरण करके, उस विशुद्ध प्रतिष्ठित, प्रामाणिक, प्रशंसित प्राञ्जल प्रारूप को ‘समृद्धि सूत्र’ से शीर्षांकित करके समस्त ज्योतिष प्रेमियों, प्रबुद्ध जिज्ञासुओं, शोध छोत्रों तथा शास्त्रान्वेषियों के संसुप्त संज्ञान की जागृति हेतु अभिनव अभियान के पावन पथ के सुदृढ़ एवं सुरुचिपूर्ण सेतु का निर्माण सम्पन्न किया गया है, जो अनेक वर्षों की सघन साधना के उपरान्त अब आपके कर कमलों में सुशोभित है।
‘समृद्धि सूत्र’ का आधार स्तम्भ ज्योतिष के सारगर्भित शास्त्र हैं जिनमें ऋषि-महर्षि ने अपनी अन्तर्दृष्टि को एकाग्र करके, मानव के अर्थ कल्याण को ध्यान में रखते हुए धन, वैभव, सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य के संपूर्ण स्वर्णिम सिद्धांत सूत्र के स्पष्ट वर्णन की है तथा वृहत्पाराशर होराशास्त्र, वृहत्पादक, मानसागरी, फलदीपिका, उत्तरकालामृत, पूर्वकलामृत, ज्योतिष पारिजात, सारावली, ज्योतिषमार्ग, होरारत्न, जातितत्त्वम्, ज्योतिषतत्त्वम्, जातकाभरणम्, जातकालंकार, सर्वार्थ चिंतामणि, खेटकौतुकम्, वृद्धयवनजातक, जातक भूषणम्, होरासार, भृगुसूत्र, भावकौतुहलम्, जातकसारदीप, शम्भुहोराशास्त्र, फलमार्तण्ड, सत्यजातकम्, वृहद्द्योतिषसार, भावार्थ रत्नाकर तथा वृहदरत्नाकर आदि की संरचना। सभी ग्रंथों में धन, ऐश्वर्य, वैभव, यश, कीर्ति, प्रतिष्ठा से लेकर सन्दर्भित मंदिरों तक 1100 टुकड़े, नौ खंड और दो खंडों में भंडारित और प्राचीन बताकर उनके दर्शन एवं प्रखर सुरुचिपूर्ण विवेचन, व्याख्या, विश्लेषण एवं विभाजन का वर्णन किया गया है।
‘समृद्धि सूत्र’ की व्याख्या जिन नौ खण्डों में की गई है, वे अग्रांकित शीर्षकों से नामांकित हैं:- 1. लाभ भाव (एकादश भाव) 2. धन भाव (द्वितीय भाव) 3. भाग्य भाव (नवम भाव) 4. व्यय भाव (द्वादश भाव) 5. पूर्व पुण्य भाव (पंचम भाव) 6. धनयोग 7. निर्धन योग 8. सुख समृद्धि से संदर्भित शोध साधना एवं सम्बन्धित जन्मांगों की विस्तृत व्याख्या 9. धन, समृद्धि एवं सम्पन्नता से सम्बन्धित समय संज्ञान की प्रविधि।
समृद्धिशाली अथवा विपन्न होने के सन्दर्भ में सहस्राधिक सूत्रों को स्मरण रखना सामान्य पाठक के लिए संभव नहीं है। ‘समृद्धि सूत्र’ में अर्थवान् अथवा अर्थहीन बनने से सम्बन्धित विभिन्न ग्रन्थों में व्याख्यायित सहस्त्रों सूत्रों के विकल्प के रूप में एक शोध सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया है, जिसके अनवरत अगाध अनुसंधान में लेखकद्वय का तीस वर्ष से भी अधिक समय व्यतीत हुआ। यह शोध सिद्धान्त, ‘समृद्धि सूत्र’ का सर्वस्व है। -
बुध दशाफल दीपिका”
₹350.00दशाफल दीपिका शीर्षांकित इस ग्रन्थ को हमने दस अध्यायों में व्याख्यायित, विश्लेषित और विवेचित करने की चेष्टा की है। “बुध दशाफल दीपिका” का प्रथम अध्याय बुध ग्रह : पौराणिक एवं वैज्ञानिक सत्य तथ्य पर केन्द्रित है। इस अध्याय में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि बुध ग्रह की वास्तविकता यह है कि वह नवग्रहों में सर्वाधिक लघु पिण्ड है परन्तु जन्मांग में बुध ग्रह की भूमिका की महिमा अनन्त है। बुध बुद्धि की क्षमता, बौद्धिक प्रखरता, तलस्पर्शी विवेचन, विश्लेषण, स्मरण शक्ति के स्थायित्व या निर्बलता के अतिरिक्त विश्व में
होने वाली समस्त शोध और अनुसंधानों के लिए उत्तरदायी ग्रह है। बुद्धि ही इस पृथ्वी को संचालित करती है और जन्मांग में बुध जितना प्रबल, विशुद्ध, पापरहित, शुभग्रहों से दृष्ट, शुभ ग्रहों की राशि, नवांश, नक्षत्र में संस्थिति और साथ ही साथ अपनी उच्च, स्वराशि या मूलत्रिकोण अथवा नवांश में स्थित होता है। जातक की बौद्धिक गरिमा उतनी ही अधिक प्रशंसित चर्चित होती है।₹430.00 -
शुक्र दशाफलदीपिका
शुक्र दशाफल दीपिका को अग्रांकित 20 अध्यायों में व्याख्यायित और विभाजित किया गया है जिसमें शुक्र की महादशा के फल के साथ-साथ शुक्र की महादशा के मध्य अन्तर्दशाओं का भी विस्तृत अनुसंधानात्मक अध्ययन पाठकों के कल्याणार्थ प्रस्तुत किया गया है। इस कृति में जहाँ एक ओर समस्त ज्योतिष शास्त्र के शास्त्रीय ग्रंथों में व्याख्यायित उन श्लोकों का उल्लेख है जो ऋषियों ने अब से सैकड़ों या सहस्रों वर्ष पूर्व लिखे थे, वहीं दूसरी ओर इतने लम्बे अंतराल के उपरान्त प्रकृति में होने वाले परिवर्तन ने दशाफल निरूपण में जिस प्रकार के अद्भुत, अविश्वसनीय और समयानुरूप परिवर्तन किये हैं, जिन्हें पूर्णतः समझ पाने के लिए हमने ज्योतिष शास्त्र में दशाफल पर केन्द्रित अपने 40-45 वर्षों के अनुभव और साधना का मर्मस्पर्शी, प्रखर, संज्ञानात्मक, अध्ययनात्मक उपयोग करने के उपरान्त प्रबुद्ध पाठकों के कल्याणार्थ इस कृति को साकार स्वरूप प्रदान किया है।
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योग पारिजातराजयोग
₹360.00योग पारिजात में समस्त प्रसिद्ध, प्रतिष्ठित, प्रशंसित, प्राचीन ज्योतिष शास्त्र के प्रमाणित शास्त्रीय ग्रन्थों के मनन, मन्धन और चिन्तन के अथक प्रयास, परिश्रमसाध्य साधना के उपरान्त विविध विशिष्ट ग्रहयोगों को व्यावहारिक जन्मांगों के निकष पर परख कर, उनका स्पष्ट सतर्क श्रृंखलाबद्ध चयन और संकलन करके प्रबुद्ध पाठकों को अनादिकाल से चली आ रही जिज्ञासा का सम्यक्, संपुष्ट, सारगर्भित, सार्वभौमिक, सर्वजनहितार्थ समाधान से संदर्भित ग्रहयोगों से सम्बन्धित तथा व्यक्ति के व्यवसाय, व्यस्तता, विलासिता की उपलब्धता, प्रभुता, अधिकारों की समग्रता, ऐश्वर्य, कीर्ति, वैभव, सम्पत्ति, समृद्धि, सत्ता, सम्पदा, सौभाग्य के अतिरिक्त सिंहासन तथा राज्य प्राप्ति के अन्यान्य योगों के साथ-साथ विपन्नता, दरिद्रता, चिन्ता, विपत्ति, विनाश, विफलता, विकृति, व्यवधान, अवरोध, अनैतिकता, दुर्भाग्य, दुर्दमनीय दारुण दुखों की व्यथा, धनहानि, आस्था तथा विश्वास की निर्बलता, धूर्तता, दैहिक सबलता तथा पुष्टता से सम्बन्धित सभी ग्रहयोगों तथा पाठकों की जिज्ञासा का तर्कसंगत विवेचन, विवरण, व्यावहारिक विश्लेषण सहित प्रत्युत्तर सन्निहित, समाहित व समायोजित है।
किसी भी जन्मांग से सम्बन्धित भविष्य के आकलन हेतु ग्रहयोगों का विस्तृत, सारगर्भित, सारस्वत व तलस्पर्शी अध्ययन, अनुभव, अभ्यास और अनुसंधान का महत्व सर्वोपरि है जिसके अभाव में जातक की प्रभुता, सत्ता, संपदा, समृद्धि तथा प्रशासन आदि से संदर्भित सटीक अनुमान सम्भव नहीं है।
योग पारिजात को 1. राजयोग, 2. भाग्य योग, 3. धन योग, तथा 4. अनुपम योग से शीर्षांकित किया गया है जिसके अंतर्गत 850 प्रामाणिक, शास्त्रगर्भित तथा आचार्यानुमोदित ग्रहयोग, विविध व्यावहारिक जन्मांगों के उदाहरण सहित सन्निहित हैं। इसके अतिरिक्त सूर्य और चन्द्रमा से संदर्भित ग्रहयोग, केन्द्रत्रिकोण राजयोग, महापुरुष राजयोग, महाभाग्य योग, अखण्ड साम्राज्य योग, उच्चस्थ ग्रहकृत राजयोग, राशिकृत राजयोग, विपरीत राजयोग, नीचभंग तथा राजभंग ग्रहयोग, विपन्नता प्रदायक ग्रहयोग, नाभस योग, नवांश संदर्भित शुभ और अशुभ ग्रहयोग तथा नवांश चक्र पर आधारित राजयोग आदि शीर्षांकित विविध अध्यायों में संस्कृत के श्लोकों में वर्णित ग्रहयोगों को ज्योतिष शास्त्र के वैज्ञानिक धरातल पर परखकर तथा सहस्रों जातकों, जातिकाओं आदि के जन्मांगों पर क्रियान्वित करने के उपरान्त जिज्ञासु पाठकों के कल्याणार्थ योग पारिजात में सुरुचिपूर्ण स्वरूप में समायोजित किया गया है।₹450.00 -
जातकसारावलीद्वितीय भाव
₹320.00धनार्जन, धन संचय तथा धन संवर्द्धन के विविध विधान के अन्यान्य अलौकिक शोध सिद्धान्तों से आलोकित ग्रहयोगों तथा उपयुक्त उदाहरणों से अलंकृत, आचार्यानुमोदित, शास्त्र संदर्भित ग्रन्थ जातक सारावली–द्वितीय भाव समस्त ज्योतिष प्रेमियों के लिए हीरक हस्ताक्षर सिद्ध होगी।
जातक के भाग्य पर विचार करने के साथ-साथ द्वितीय भाव का प्रबल होना भी अपेक्षित है। धनागमन का स्रोत ज्ञात हो, तो उसी के अनुरूप शिक्षा प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। धन भाव की प्रबलता या निर्बलता का अनुमान करन क लिए षष्ठ च स्थान पान का अध्ययन भी अनिवार्य है क्योंकि षष्ठ भाव, द्वितीय भाव से पंचमस्थ फलेवा है बीर दास भाव द्वितीय भाव से नवमस्थ होता है। इन तीनों भावों में परस्पर विरामेपास्याश अम्वन्ध का अध्ययन ही जातक के धनवान हाने की वास्तविक स्थिति का परिचालन प्रधान करता है।
लिलीय चाचयता ग्रहों की विस्तृत व्याख्या और उनसे सम्बन्धित अन्यान्य शास्त्रीय प्रष्चों में विलमान सामग्री के साथ लेखकद्वय के अध्ययन, अनुभव, अनुसंधान और अम्पास का सारांश सटीक उदाहरणों के साथ इस कृति में समायाजित किया गया है। द्वितीय भाव में संस्थित ग्रहों के अतिरिक्त द्वितीयश की विभिन्न भाव में संस्थिति का फल, विभिन्न भावों के अधिपतियों के द्वितीय भावगत होने का फल एवं द्वितीय भाव म दो या दो से अधिक ग्रहों की युति का फल आदि का इतना संपुष्ट और सघन विश्लेषण प्रथम बार इस कृति में आविष्ठित है।
जातक सारावली–द्वितीय भाव को अग्रांकित शीर्षकों में विभाजित करक कृति के आधार के शोध सिद्धांतों को प्रबल धरातल प्रदान किया गया है: 1. द्वितीय भाव : विविध पक्ष, 2. द्वितीय भावगत ग्रहों का फल, 3. द्वितीय भावगत विभिन्न राशियों एवं ग्रहों की दृष्टि का फल, 4. द्वितीय भावगत विभिन्न ग्रह युतियों का फल, 5. द्वितीयेश के विभिन्न भावगत होने का फल, 6. विभिन्न भावेशों के द्वितीय भावगत होने का फल, 7. ग्रहों का संतुलन एवं समृद्धि का संवर्द्धन, 8. धन योग : ग्रहों का संयोग, तथा 9. विपुल वित्तार्जन: विविध समीकरण।
जातक सारावली–द्वितीय भाव, धनार्जन, धनसंचय, धनीक्ष्याम, धन संवर्द्धन तथा विपुल धन के विस्तार और प्रसार के साथ आय के स्रोत के अनुमान, चामी से फाई मुखमंडल के सोन्दर्य, नेत्रों की ज्योति तथा परिवार के पठन के अध्ययन हेतु पृछ प्रामाणिक ओर परीक्षित ग्रन्थ है जो सभी ज्योतिष प्रेमियों के लिए उदरणीय पहनीर अनुकरणीय एवं संग्रहणीय है।
₹400.00 -
ज्योतिष विज्ञानसिद्धांत शिरोमणि
₹240.00जातक सारावली-दशम भाव आकाशीय पिंडों के अध्ययन एवं ज्योतिष शास्त्र के शोध सिद्धांतों से आलोकित व्यवसाय पक्ष का प्रज्वलित प्रकाश पुंज है। व्यवसाय और कर्म के अधिष्ठाता महाप्रभु की परमपावन पुनीत पदरज का मंगल तिलक है जातक सारावली-दशम भाव। व्यवसाय अर्थात् जीविकोपार्जन का माध्यम, समस्त मानव जाति की गति, मति, प्रगति, उन्नति की सम्यक् स्थिति का सक्रिय अभिनव अंग है। व्यवसाय का गौरव ही नर-नारियों की प्रभुता व सत्ता, अधिकार व कर्तव्य, कर्म व दायित्व की त्रिवेणी है और यही जीवन की विविध व्यवस्थाओं और पारिस्थितिक से अलंकृत कर्म का ऐसा सिंधु है, जिसमें अनवरत, अनंत, अविरल, निर्मल, कोमल मधु एवं दुग्ध स्तंभ का समायोजन एवं निरंतर प्रवाह होता रहता है। मनोनुकूल व्यवसाय प्रत्येक व्यक्ति की प्राथमिकता होती है। व्यवसाय पक्ष पर केंद्रित अनेक ग्रंथ उपलब्ध हैं लेकिन अधिकांश ग्रंथों की प्रामाणिकता संदिग्ध है
किसी कुशल ज्योतिर्विद् से पूछे जाने वाली प्रमुख जिज्ञासाओं में जातक/जातिका के व्यवसाय से संबंधित प्रश्न को समेकित किया जा सकता है। वह नौकरी करेगा या व्यापार में सफलता प्राप्त करेगा, उद्योगपति बनेगा या उद्योग बनकर धनार्जन करेगा। यदि उद्योगपति बनेगा तो किस स्तर का होगा, क्या देश के प्रतिष्ठित और यशस्वी उद्योगपतियों में उसके नाम की गणना होगी या फिर कोई साधारण नौकरी करके मात्र जीवनयापन कर सकेगा। ऐसे कई प्रश्न अभिभावकगण प्रायः पूछते रहते हैं और यह स्वाभाविक होने के साथ ही अनिवार्य भी है। जातक सारावली-दशम भाव का वैशिष्ट्य है, नवांश चक्र द्वारा उपयुक्त व्यवसाय को समेकित करना। नवांश चक्र के अध्ययन के अभाव में किसी भी जातक के व्यवसाय का सटीक अनुमान करना लगभग उसी प्रकार है, जैसे किसी व्यक्ति का चित्र देखकर संबंधित व्याधियों का रेखांकन करना। अस्तु, नवांश चक्र का तलस्पर्शी मर्म तथा ऐसे अनेक विषयों के प्रामाणिक व परिक्षित शोधसूत्र, इस कृति में समाहित हैं जो इसे व्यवसाय पक्ष पर केंद्रित एक असाधारण कृति के रूप में संतुलित करते हैं
कृति को विषय के विस्तृत धरातल के आधार पर 19 शोधपरक एवं ज्ञानवर्द्धक अध्यायों में व्याख्यायित किया गया है। इस कृति के अंतर्गत श्रीमती मृदुला त्रिवेदी एवं श्री टी.पी. त्रिवेदी ने अपने पूर्व 40 वर्षों के अध्ययन, अनुभव, अनुसंधान के पावन प्रांजल पीयूष का अनुसरण किया है। समस्त जिज्ञासु पाठकों एवं ज्योतिष प्रेमियों के लिए जातक सारावली-दशम भाव पठनीय, अनुकरणीय और संग्रहणीय है जिसमें सन्निहित सिद्धान्तों के क्रियान्वयन से व्यवसाय पक्ष से परिप्रेक्ष्य भविष्य कथन करने का अपूर्व कौशल और सामर्थ्य प्राप्त होना संभव है₹300.00 -
मंगल दशा फलदीपिका
₹450.00अनादिकाल से मंगल ग्रह का रक्ताभ सौन्दर्य नवविवाहित दम्पत्तियों के लिए जिज्ञासा और कौतूहल का परम्परागत स्तम्भ रहा है। विवाह के परिपेक्ष्य में जन्मांग में मंगल की अप्रिय स्थिति वर-वधू के अभिभावकों को प्रकम्पित कर देती है। प्रायः मंगल को एक विध्वंसात्मक ग्रह के रूप में स्वीकार किया जाता है परन्तु मंगल दशाफल दीपिका का निहितार्थ इस आस्था को मिथ्या सिद्ध कर देने हेतु चेतना की जागृति का एक परिश्रमसाध्य अनुष्ठान है। मंगल दशाफल दीपिका में सन्निहित, संकलित, संयोजित सामग्री मंगल की दशान्तर्दशा के फलकथन के सन्दर्भ में अत्यधिक महत्वपूर्ण, उपयोगी, अद्भुत और अनुभूत है। प्रतिकूल मंगल की दशा का अत्यन्त अल्पज्ञता और अज्ञानतापूर्ण संज्ञान, दुर्घटना, कलह, आक्रमण, अपराध, अपहरण, आन्दोलन, अग्निकाण्ड, हिंसा, हत्या, दुर्भिक्ष, अतिऊष्मा, पराजय, सूखा, रक्तविकार, शल्यक्रिया, ट्यूमर, पेप्टिक अल्सर, असंतुलित रक्तचाप, विविध व्याधि, युद्ध आदि के रूप में प्रचलित है जबकि अनुकूल मंगल की स्थिति अन्तरंग आनन्द व प्रेम सम्बन्ध, आत्मीयता, प्रसिद्धि, धनधान्य, ऐश्वर्य, कीर्ति, वैभव, सम्पत्ति, सम्पदा, समृद्धि, सम्मान, शासन-प्रशासन, सत्ता, राज्य प्राप्ति, अधिकार प्राप्ति एवं विजय, पराक्रम, पदोन्नति, पद-प्रतिष्ठा, प्रगति, उन्नति, साहस, निर्भीकता, भूमि, भूखण्ड, भवन के अतिरिक्त हर्षोल्लास, उमंग, उत्साह, ऊर्जा का अभिनव अभियान है।
मंगल दशाफल दीपिका को अग्रांकित 19 सुगम, सरल, सारगर्भित, सार्वभौमिक व सारस्वत अध्यायों तथा 600 पृष्ठों में अन्यान्य व्यावहारिक जन्मांगों के उदाहरण के साथ विभाजित, व्याख्यायित एवं विश्लेषित किया गया है: 1. मंगल ग्रहः पौराणिक एवं वैज्ञानिक सत्य तथ्य; 2. दशाफल कथन रहस्य एवं सिद्धान्तः 3. बारह राशियों में मंगल की दशा का फल; 4. मंगल की महादशा का फल; अध्याय 5 से 16 तक विविध भावगत मंगल की दशान्तर्दशा का फल; 17. मंगल की महादशा में विविध ग्रहों की अन्तर्दशा का फल 18. मंगल की महादशा के मध्य प्रत्यंतर दशाओं का फल, तथा 19. मंगल ग्रहकृत पीड़ा परिहार विधान।
विंशोत्तरी दशा पर केन्द्रित मंगल दशाफल दीपिका इस श्रृंखला का हीरक हस्ताक्षर है जिसके अध्ययन, अनुभव, अनुसरण और अभ्यास से मंगल ग्रह के दशान्तर्दशा के सन्दर्भ में समस्त भय, भ्रम एवं भ्रांतियाँ ध्वस्त हो जायेंगी और हमारे प्रबुद्ध पाठकों, जिज्ञासु छात्रों, गम्भीर अध्येताओं, भक्तों एवं साधकों को मंगल ग्रह के संदर्भ में अभिनव अभिज्ञान के साथ-साथ मंगल ग्रहकृत पीड़ा परिहार विधान अत्यन्त सम्पुष्ट साकार-आकार में मंगल दशाफल दीपिका के अन्तर्गत एक ही स्थल पर उपलब्ध व सम्भव हो सकेगा।
₹550.00










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