ज्योतिषीय गणित एवं खगोल शास्त्र
₹240.00₹300.00
पूरी पुस्तक पर लेखक के ज्ञान की पकड़ और भाषा की सहजता का सरस प्रवाह बहुत प्रभावशाली है। विषयों का चयन और उनका प्रस्तुतीकरण भी वैज्ञानिक ढंग से उचित है। विशेष रूप से ग्रहों का वक्रत्व, तारों के उदयास्त तथा उपग्रहों के बारे में लिखे गये अध्याय इस पुस्तक की विशेषता है। उदाहरणों के कारण पुस्तक की विश्वसनीयता बढ़ गयी है। कम्प्यूटरीकरण के इस युग में ज्योतिष शास्त्र के कुशल ज्योतिषी का प्रायः लोप हो रहा है। गणित के प्रति अभिरुचि में कमी आई है। कम्प्यूटर की गणना मुझे निर्जीव प्रतीत होती है। वहीं अपने हाथ से बनायी कुण्डली की विश्वसनीयता के प्रति मैं आश्वस्त रहता हूँ। मेरे जैसे अनेक ज्योतिषप्रेमियों की आस्था में यह पुस्तक अकल्पनीक योगदान देगी, इस विश्वास के साथ श्री जैन को अनेक आशीर्वाद।
लेखक का परिचय
विमल प्रसाद जैन सुपुत्र लखमीचंद जैन सर्राफ का जन्म 31 अगस्त, 1935 को रेवाड़ी (हरियाणा) में हुआ। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से एम. ए. (गणित में खगोल शास्त्र) 1953 में की। वह सेवानिवृत लेखा-परीक्षा अधिकारी हैं।
भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद् द्वारा संचालित भारतीय विद्या भवन में आयोजित द्विवार्षिक पाठ्यक्रम का अध्ययन करने के उपरान्त ज्योतिष प्रवीण और ज्योतिष विशारद की परीक्षाओं में उच्च श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। इन्होंने भारतीय ज्योतिष विद्वान परिषद् द्वारा संचालित कक्षाओं में 1992 से 1995 तक भारतीय विद्या भवन में और इसके पश्चात दूसरे स्थानों पर परिषद् की कक्षाओं में खगोल शास्त्र, षडूबल, आयुर्विज्ञान और फलित ज्योतिष का अध्ययन कार्य कर रहे हैं। खगोल शास्त्र और षड्बल एवं भावबल पर हिंदी व अंग्रेजी में इनकी पुस्तकों के कई संस्करण छप चुके हैं। आपके कई शोधपत्र छप चुके हैं। आपके कई शोधपत्र कार्यशालाओं में पढ़े गए हैं।
15 जनवरी, 1998 को भारतीय प्राच्य एवं सनातन विज्ञान संस्थान, दिल्ली ने आपको प्रबुद्ध लेखक होने पर सम्मानित किया गया।
इन्होंने दिल्ली राज्य का राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप में कई बार प्रतिनिधित्व किया। वह दिल्ली राज्य शातरंज एसोसिएशन के सदस्य हैं तथा 18 वर्ष तक इस संघ में मुख्य साचिव रहे हैं। वह दिल्ली शशतरंज संघ एवं अखिल भारतीय शतरंज संघ के उपाध्यक्ष भी रहे हैं। 1986 में भारतीय युवा शतरंज टीम में प्रबंधक के रूप में इंग्लैंड गए थे, इस टीम के सदस्य आज ग्रैंडमास्टर विश्वनाथ आनंद हैं।
| Category: | Alpha |
|---|
Related products
-
परिणय निर्णयविवाह समय संज्ञान
₹350.00समस्त सांसारिक कर्त्तव्यों के निर्वाह हेतु विवाह एक संकल्प है जो तन-मन और मस्तिष्क को, कर्तव्य और प्रेम की भावना से आलोकित, आंदोलित, प्रमुदित व प्रफुल्लित करता है। विवाह एक संस्कार है जिसे सर्वत्र शास्त्र, समाज, संस्कृति एवं न्याय की सहमति, अनुमति प्राप्त है। विवाह समय संज्ञान नामक यह कृति उन अन्यान्य संकल्पों और ज्योतिष प्रेमियों के प्रबल अनुरोध का प्रतिफल है, जो विवाह प्रतिपादन के सटीक समय से संदर्भित, प्रामाणिक, प्रतिष्ठित शोध सिद्धान्तों के अभाव में अंकुरित, प्रस्फुटित हुए थे, जिनके क्रियान्वयन और अनुकरण द्वारा विवाह का सटीक समय सरलता से रेखांकित किया जा सकता है। हमारे समाज में सदा से ही व्याप्त विवाह के असंतुलित समीकरण के संज्ञान के सम्यक् समाधान से अभिपूरित यह कृति, विवाह काल निर्धारण हेतु हीरक हस्ताक्षर सिद्ध होगी। विवाह जीवन को दो पृथक-पृथक् भागों में विभाजित करता है। प्रथम विवाह के पूर्व का जीवन, द्वितीय- विवाह के उपरान्त का जीवन। अतः विवाह प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण घटना है और इस विषय में भी अधिकांश ज्योतिर्विदों का भविष्यकथन प्रायः मिथ्या सिद्ध होता है जो ज्योतिष विज्ञान की प्रामाणिकता के समक्ष प्रश्नचिहन लगा देता है। विवाह का सटीक समय रेखांकित न कर सकने का कारण इस विषय का अपूर्ण ज्ञान और अनभिज्ञता ही है। कदाचित आज तक किसी ने भी विवाह समय संज्ञान के संदर्भमें इतने तलस्पर्शी, सघन शोध प्रबन्ध की संरचना नहीं की, जिसके अध्ययन अनुसरण और अभ्यास से विवाह के सटीक समय का पूर्वानुमान किया जा सके। विवाह के समय से संदर्भित अन्यान्य शोध सिद्धान्तों की प्रामाणिकता को शताधिक भिन्न-भिन्न उदाहरणों द्वारा प्रदर्शित और परिलक्षित करके विषय की जटिलता को सुगम स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है, जो विवाह समय संज्ञान का वैशिष्ट्य है, जिसे परिज्ञान पक्ष एवं परिहार पक्ष के अंतर्गत तेरह अग्रांकित अध्यायों में विभाजित व व्याख्यायित किया गया है:
* परिज्ञान पक्ष: 1. ज्योतिष विज्ञान एवं विवाह में व्यवधान; 2. शास्त्रानुमोदित विवाह समय संज्ञान सूत्र; 3. विवाह काल निर्णय संदर्भित अनुसंधान; 4. विवाह समय संज्ञान प्रविधिः 5. गोचर का शनि सुनिश्चित करता है, विवाह का समय; 6. विवाह काल निर्धारण में गोचर के मंगल एवं शुक्र की भूमिका: 7. प्रौढ़ावस्था में विवाह; 8. विवाह प्रतिबन्धक योग का विस्तृत विवेचन, परिहार पक्ष 9. शीघ्र, सुखद एवं अखण्ड वैवाहिक सुख हेतु आध्यात्मिक उपचार, 10. ग्रह शान्ति: विविध विधान; 11. कन्याओं के विवाह में अवरोध से रक्षार्थ अनुभूत मंत्र प्रयोग, 12. कन्याओं के शीघ्र एवं सुखद विवाह हेतु स्तोत्र आराधना, एवं 13. पुरुषों के विवाह में व्यवधान का समाधान।
अतः विवाह के समय के संदर्भ में सत्य घटित होने वाले शोध सिद्धान्तों को ज्योतिष शास्त्र के यशस्वी एवं बहुप्रशंसित लेखकद्वय श्रीमती मृदुला त्रिवेदी तथा टी.पी. त्रिवेदी ने इस कृति में प्रस्तुत किया है, जो समस्त ज्योतिष प्रेमियों, अधिकांश ज्योतिर्विदों, जिज्ञासु पाठकों तथा प्रखर छात्रों के लिए पठनीय, अनुकरणीय एवं संग्रहणीय है।₹430.00 -
शक्ति कुंज’
₹320.00शक्ति कुंज’ भक्ति भावना का त्रिभुवन मोहन, भव्य भुवन है जो भगवान पराम्बा, जगतजननी, जगदम्बा के परम पावन पदपंकज के प्रसादामृत से परिपूर्ण प्रेरणा प्रार्थना प्रभूथ प्रार्थना पथ एवं प्रांजल प्राशीष है। ‘शक्ति’ भाव और भक्ति, साधना और शक्ति, प्रार्थना और आराधना से पवित्र प्रथम, मध्यम और उत्तर चरित्र से सुशोभित भव्य त्रिभुवन मोहन, दिव्य सौन्दर्य से आश्रम, सुगठित, संयोजन, सु साधन, अविद्या, सारस्वत, शाश्वत साधना का स्वर्णिम शक्ति सेतु है, जो स्तुति मणिमण्डित स्तम्भों पर आधारित है, सात सौ रत्नजड़ित स्वर्ण सोपानों से निर्मित है, जिसमें आदिशक्ति, महाशक्ति, पराम्बा, भगवान, कुव्वरी, आदि शामिल हैं। जगतजननी के परम पावन पवित्र प्रांजल चरित्र का दर्शन, विपुल अनुकंपा के निमित्त सिद्धांत सु नियोजित आक्षेप के साथ जाने वाले, विशिष्ट अनुष्ठान का सम्यक विश्लेषण, विवेचन का आख्यान, व्याख्यान विधि-विधान सहित शास्त्र आविष्ठित है।
‘शक्ति कुञ्ज’ 16 अध्यायों में विवेचित एवं व्याख्यायित है जिसे मोक्ष-प्रदायिनी श्री दुर्गासप्तशती के प्रसाद-प्रबन्ध की विस्तृत के साथ-साथ नैमित्तिक साधनाओं के विभिन्न पक्षों पर केन्द्रित किया गया है। श्री दुर्गासप्तशती भू-लोकवासियों की मनोकामनाओं एवं सम्यक् अभिलाषाओं की संपूर्ति एवं संसिद्धि हेतु माता जगदम्बा का अनुपम वरदान है, जो मानव समाज को प्रसादामृत रूप उपलब्ध है।
*भक्ति पुंज: शक्ति कुंज-श्री दुर्गासप्तशती शक्ति रहस्य शक्ति साधनाः संस्कार अनुष्ठान दुर्गाभुवन कामनापरक श्री दुर्गासप्तशती का अनुष्ठान अनुष्ठान अनुष्ठान और नवार्ण मंत्र एक पूजन शतचंडी एवं दुर्गापाठ विधान श्री दुर्गासप्तशती अनुष्ठान-अष्ट सिद्धि उपदेश श्री दुर्गासप्तशती : व्यापक प्रवचन सप्तशती स्थित प्रसिद्ध सम्पुटित मंत्र अन्य मंत्रों की संसिद्धि कथा श्री दुर्गासप्तशती का मंत्रजप साधना के सामान्य सूत्र श्री देव्यथर्वशीर्ष और महत्वपूर्ण चंडिका मंगलमंत्र का प्रयोग संपूर्ण मंत्रों की संसिद्धि के लिए ‘सिद्धकुंजिका स्तोत्र’ और ‘बीसा यंत्र’ प्रयोग शक्ति साधना: कतिपय चमत्कार कर देने वालेअंतरंग आभास।
इन अतिरिक्त अन्यान्य प्रस्तावों की संसिद्धि के लिए श्री दुर्गासप्तशती का मंत्रजप विधान, ‘शक्ति कुंज’ की दुर्लभ वैशिष्ट्य है जिसमें व्याहतों से संयुक्त संपुट मंत्रों का जप विधान, विनियोग, संख्या और प्रविधि आदि सिद्धांत शामिल हैं।
श्री दुर्गासप्तशती आस्तिकों की आस्था का ललाट है। माता दुर्गा के अनुपम अनुराग एवं शक्ति साधना की सौरभ सुधा-धारा ‘शक्ति कुञ्ज’ में अविरल गति से प्रवाहित, प्रसारित हो रही है। भक्ति भावना के भव्य भुवन में त्रिभुवन मोहिनी, महाशक्ति पराम्बा की अवर्णनीय अनुरागपूर्ण आस्था, आराधना, अर्चना, अभ्यर्थना के स्वर्णिम संकल्प का हीरक हस्ताक्षर है- ‘शक्ति कुञ्ज’, जिसका पठन और पारायण शक्ति के भक्तों, साधकों, आराधकों, उपासकों तथा जिज्ञासुओं हेतु अपरिहार्य है।₹400.00 -
शनि संहिता
शनि शक्ति के संत्रास तथा त्रासदी से आतंकित, व्यथित, पीड़ित, भयाक्रान्त, मानव की विपुल वेदना, विपत्ति, विकृति, विनाश, व्याधि, विषमता, विघटन, विसंगतिपूर्ण विपरीत स्थितियों, परिस्थितियों के अवांछित, अनापेक्षित, अनावश्यक सम्भावनाओं के विषैले दंश और कैटीले पथ की पीड़ा प्रदायक चुभन के अन्तरंग आभास के अवलोकन और अवगाहन करने के उपरान्त पापाक्रान्त शनि की साढ़ेसाती, अष्टम शनि और शनि की लघु कल्याणी वैया आदि से संतप्त जीवन को विमुक्त करने के निमित्त ‘शनि संहिता’ का प्रसादामृत प्रबुद्ध ज्योतिष प्रेमियों के समक्ष प्रस्तुत है, जिसमें सन्निहित, अनुभूत, अद्भुत, अमोघ एवं दुर्लभ साधना परिहार परिज्ञान, सम्पादन विधान एवं सुगम साधना प्रावधान का अवलोकन, अध्ययन, अनुसरण और अभ्यास शनि संतप्त जातक-जातिकाओं के जीवन को अलौकिक आलोक से आनन्दित और आहह्लादित करने हेतु, नैमित्तिक साधनाओं का परम पावन, प्रांजल पीयूष है।
‘शनि संहिता’ उन सशक्त, शाश्वत, संकल्पों का सुरभित सेतु है, जिसकी संरचना, शनि ग्रह सन्दर्भित परिहार परिज्ञान पर प्रमाणित शास्त्रसंगत सघन सामग्री के अभाव में अंकुरित और प्रस्फुटित हुई है। ‘शनि संहिता’ अभीष्ट संसिद्धि के संसुप्त संज्ञान की जागृति का अभिनव अनुसंधान है जिसमें शनि सन्दर्भित अन्यान्य अरिष्टों, अनिष्टों, अवरोधों, अप्रत्याशित आतंक, विविध व्यथाओं, विपत्ति प्रदायक व्याधियों से आक्रान्त जातक-जातिकाओं के दुर्दमनीय दारूण दुःखों और दुर्गति का शास्त्रानुमोदित सुगम समाधान तथा अनुकूल विधान, अखण्डित आस्थाओं को अविचलित आधार प्रदान कर देने वाले परिहार परिज्ञान, दुर्लभ स्तोत्र तथा साधनाएँ, मंत्र प्रयोग और साधना विधान, शनि दान : दिव्य अनुष्ठान के अतिरिक्त शताधिक सुगम सांकेतिक साधनाएँ और उनके प्रतिपादन के विधिविधान आदि अट्ठाइस अध्यायों में सुरुचिपूर्ण स्वरूप में सुव्यवस्थित किए गए हैं।
‘शनि संहिता’ के परिशिष्ट में ‘दस महाविद्या स्तोत्र’, ‘कर्मज व्याधिनाशन ऋग्वेदीय मंत्र’, ‘सुदर्शन चक्र मंत्र साधना’ और ‘मृत्युंजय मंत्र: विभिन्न प्रकार’ के समिचीन आधिवांट ने इस कृति की व्याख्या और महत्ता में वृद्धि की है। ‘शनि संहिता’ के लिए सभी वैज्ञानिक ज्योतिष प्रेमियों के लिए विद्वान, संग्रहकर्ता और ज्योतिषी शोध प्रबंध हैं। -
योग पारिजातराजयोग
₹360.00योग पारिजात में समस्त प्रसिद्ध, प्रतिष्ठित, प्रशंसित, प्राचीन ज्योतिष शास्त्र के प्रमाणित शास्त्रीय ग्रन्थों के मनन, मन्धन और चिन्तन के अथक प्रयास, परिश्रमसाध्य साधना के उपरान्त विविध विशिष्ट ग्रहयोगों को व्यावहारिक जन्मांगों के निकष पर परख कर, उनका स्पष्ट सतर्क श्रृंखलाबद्ध चयन और संकलन करके प्रबुद्ध पाठकों को अनादिकाल से चली आ रही जिज्ञासा का सम्यक्, संपुष्ट, सारगर्भित, सार्वभौमिक, सर्वजनहितार्थ समाधान से संदर्भित ग्रहयोगों से सम्बन्धित तथा व्यक्ति के व्यवसाय, व्यस्तता, विलासिता की उपलब्धता, प्रभुता, अधिकारों की समग्रता, ऐश्वर्य, कीर्ति, वैभव, सम्पत्ति, समृद्धि, सत्ता, सम्पदा, सौभाग्य के अतिरिक्त सिंहासन तथा राज्य प्राप्ति के अन्यान्य योगों के साथ-साथ विपन्नता, दरिद्रता, चिन्ता, विपत्ति, विनाश, विफलता, विकृति, व्यवधान, अवरोध, अनैतिकता, दुर्भाग्य, दुर्दमनीय दारुण दुखों की व्यथा, धनहानि, आस्था तथा विश्वास की निर्बलता, धूर्तता, दैहिक सबलता तथा पुष्टता से सम्बन्धित सभी ग्रहयोगों तथा पाठकों की जिज्ञासा का तर्कसंगत विवेचन, विवरण, व्यावहारिक विश्लेषण सहित प्रत्युत्तर सन्निहित, समाहित व समायोजित है।
किसी भी जन्मांग से सम्बन्धित भविष्य के आकलन हेतु ग्रहयोगों का विस्तृत, सारगर्भित, सारस्वत व तलस्पर्शी अध्ययन, अनुभव, अभ्यास और अनुसंधान का महत्व सर्वोपरि है जिसके अभाव में जातक की प्रभुता, सत्ता, संपदा, समृद्धि तथा प्रशासन आदि से संदर्भित सटीक अनुमान सम्भव नहीं है।
योग पारिजात को 1. राजयोग, 2. भाग्य योग, 3. धन योग, तथा 4. अनुपम योग से शीर्षांकित किया गया है जिसके अंतर्गत 850 प्रामाणिक, शास्त्रगर्भित तथा आचार्यानुमोदित ग्रहयोग, विविध व्यावहारिक जन्मांगों के उदाहरण सहित सन्निहित हैं। इसके अतिरिक्त सूर्य और चन्द्रमा से संदर्भित ग्रहयोग, केन्द्रत्रिकोण राजयोग, महापुरुष राजयोग, महाभाग्य योग, अखण्ड साम्राज्य योग, उच्चस्थ ग्रहकृत राजयोग, राशिकृत राजयोग, विपरीत राजयोग, नीचभंग तथा राजभंग ग्रहयोग, विपन्नता प्रदायक ग्रहयोग, नाभस योग, नवांश संदर्भित शुभ और अशुभ ग्रहयोग तथा नवांश चक्र पर आधारित राजयोग आदि शीर्षांकित विविध अध्यायों में संस्कृत के श्लोकों में वर्णित ग्रहयोगों को ज्योतिष शास्त्र के वैज्ञानिक धरातल पर परखकर तथा सहस्रों जातकों, जातिकाओं आदि के जन्मांगों पर क्रियान्वित करने के उपरान्त जिज्ञासु पाठकों के कल्याणार्थ योग पारिजात में सुरुचिपूर्ण स्वरूप में समायोजित किया गया है।₹450.00 -
सुरभित साधना सेतु
₹400.00सुरभित साधना सेतु समस्त भक्तजनों, सामान्य साधकों और गंभीर आराधकों के लिए अत्यन्त उपयोगी कृति है जिसमें अन्यान्य अभिलाषाओं, आकांक्षाओं, अपेक्षाओं और आशाओं के प्राशीष प्रसाद में रूपान्तरित होने हेतु विविध सुगम साधनाएँ तथा समस्याओं के समाधान के प्रमाणिक प्रावधान का समायोजन किया गया है। ऐसी अन्यान्य साधनाएँ, स्तोत्र, मंत्र एवं प्रयोग आदि हमें भारतीय परम्परा के अन्तर्गत ऋषि-महर्षियों और सिद्ध तपस्वियों द्वारा उपलब्ध हुए हैं, जिनके सविधि सतर्क संपादन से अभिलाषाओं और मनोकामनाओं की सम्पूर्ति होती है।
सुरभित साधना सेतु अभीष्ट संसिद्धि के संसुप्त संज्ञान की जागृति का अभिनव अनुसंधान है जिसमें अन्यान्य अवरोधों, विविध व्यथाओं तथा अप्रत्याशित अनिष्टों का शास्त्रसंगत समाधान सन्निहित है। जीवन जटिल समस्याओं का सिन्धु है। ऐसी अनेक समस्याओं के सरल, सुगम, सर्वसुलभ, सरस समाधान सुरभित साधना सेतु में संयोजित, संकलित एवं सम्पादित किए गए हैं, जिनका सतर्क अनुकरण समग्र समस्याओं के संत्रास को महकते मधुमास में रूपान्तरित करेगा, यही सदास्था है।
सुरभित साधना सेतु को पंद्रह विविध अध्यायों में विभाजित, व्याख्यायित किया गया है। इस कृति में अनेक दुर्लभ और अनुभूत सावताएँ आविष्ठित हैं जिनके सहज अनुक्रण से संदर्भित अभिलाषा की संसिद्धि के साथ-साथ समस्त व्याधियों, विपत्तियों, आपत्तियों, व्यथाओं, चिंताओं, संकटों, समस्याओं, आरोपों और दुर्दमनीय दारूण दुःखों की वेदना से साधक मुक्त हो जाता है। सुरभित साधना सेतु विविध विघट्न एवं विप्लवकारी विकृतियों, विसंगतियों, विषमताओं और विरोधी गतिविधियों के निराकरण का सर्वसुलभ, सरल समाधान है। सुरभित साधना सेतु मंत्रशास्त्र की उपादेयता से सम्बन्धित सशक्त, शास्त्रानुमोदित संरचना है जो पाठकों के लिए प्रमाणित, परीक्षित एवं प्रतीक्षित सामग्री के अभाव को सम्पुष्ट करने वाला, सशक्त सुरभित साधना सेतु है। ज्योतिष एवं मंत्र विज्ञान के दुर्लभ रहस्य के सम्यक् संज्ञान हेतु समस्त ज्योतिर्विद एवं मंत्र अध्येताओं को अध्ययन, अनुभव, अनुसंधान के निमित्त सुरभित साधना सेतु एक अद्वितीय एवं अमूल्य निधि है जो सभी के लिए पठनीय, अनुकरणीय और संग्रहणीय है।
₹500.00 -
योग पारिजातअनुपम योग
₹360.00टी.पी. त्रिवेदी
श्रीमती मृदुला त्रिवेदीयोग पारिजात में समस्त प्रसिद्ध, प्रतिष्ठित, प्रशंसित, प्राचीन ज्योतिष शास्त्र के प्रमाणित शास्त्रीय ग्रन्थों के मनन, मन्धन और चिन्तन के अथक प्रयास, परिश्रमसाध्य साधना के उपरान्त विविध विशिष्ट ग्रहयोगों को व्यावहारिक जन्मांगों के निकष पर परख कर, उनका स्पष्ट सतर्क श्रृंखलाबद्ध चयन और संकलन करके प्रबुद्ध पाठकों को अनादिकाल से चली आ रही जिज्ञासा का सम्यक्, संपुष्ट, सारगर्भित, सार्वभौमिक, सर्वजनहितार्थ समाधान से संदर्भित ग्रहयोगों से सम्बन्धित तथा व्यक्ति के व्यवसाय, व्यस्तता, विलासिता की उपलब्धता, प्रभुता, अधिकारों की समग्रता, ऐश्वर्य, कीर्ति, वैभव, सम्पत्ति, समृद्धि, सत्ता, सम्पदा, सौभाग्य के अतिरिक्त सिंहासन तथा राज्य प्राप्ति के अन्यान्य योगों के साथ-साथ विपन्नता, दरिद्रता, चिन्ता, विपत्ति, विनाश, विफलता, विकृति, व्यवधान, अवरोध, अनैतिकता, दुर्भाग्य, दुर्दमनीय दारुण दुखों की व्यथा, धनहानि, आस्था तथा विश्वास की निर्बलता, धूर्तता, दैहिक सबलता तथा पुष्टता से सम्बन्धित सभी ग्रहयोगों तथा पाठकों की जिज्ञासा का तर्कसंगत विवेचन, विवरण, व्यावहारिक विश्लेषण सहित प्रत्युत्तर सन्निहित, समाहित व समायोजित है।
किसी भी जन्मांग से सम्बन्धित भविष्य के आकलन हेतु ग्रहयोगों का विस्तृत, सारगर्भित, सारस्वत व तलस्पर्शी अध्ययन, अनुभव, अभ्यास और अनुसंधान का महत्व सर्वोपरि है जिसके अभाव में जातक की प्रभुता, सत्ता, संपदा, समृद्धि तथा प्रशासन आदि से संदर्भित सटीक अनुमान सम्भव नहीं है।
योग पारिजात को 1. राजयोग, 2. भाग्य योग, 3. धन योग, तथा 4. अनुपम योग से शीर्षांकित किया गया है जिसके अंतर्गत 850 प्रामाणिक, शास्त्रगर्भित तथा आचार्यानुमोदित ग्रहयोग, विविध व्यावहारिक जन्मांगों के उदाहरण सहित सन्निहित हैं। इसके अतिरिक्त सूर्य और चन्द्रमा से संदर्भित ग्रहयोग, केन्द्रत्रिकोण राजयोग, महापुरुष राजयोग, महाभाग्य योग, अखण्ड साम्राज्य योग, उच्चस्थ ग्रहकृत राजयोग, राशिकृत राजयोग, विपरीत राजयोग, नीचभंग तथा राजभंग ग्रहयोग, विपन्नता प्रदायक ग्रहयोग, नाभस योग, नवांश संदर्भित शुभ और अशुभ ग्रहयोग तथा नवांश चक्र पर आधारित राजयोग आदि शीर्षांकित विविध अध्यायों में संस्कृत के श्लोकों में वर्णित ग्रहयोगों को ज्योतिष शास्त्र के वैज्ञानिक धरातल पर परखकर तथा सहस्रों जातकों, जातिकाओं आदि के जन्मांगों पर क्रियान्वित करने के उपरान्त जिज्ञासु पाठकों के कल्याणार्थ योग पारिजात में सुरुचिपूर्ण स्वरूप में समायोजित किया गया है।₹450.00 -
चद्र दशा फलदीपिका
₹400.00चन्द्रमा अनादि काल से सौन्दर्य का प्रतीक स्वीकारा गया है। चन्द्रमा के दर्शन मात्र से जीवन की अनेक क्लिष्ट स्थितियों के समाधान का पथ प्रशस्त होता है। दर्शन करने में चन्द्रमा जितना निर्मल कोमल और स्वच्छ प्रतीत होता है, वास्तव में देह उतना ही जटिल है। चन्द्रमा के महत्व को समझना सुगम है परंतु उसके वास्तविक फलाफल का सटीक विवेचन अधिक दुःसाध्य है। पृथ्वी के चारों ओर परिभ्रमण करने वाला चन्द्रमा, पृथ्वीवासियों पर सर्वाधिक प्रभाव डालता है इसीलिए चन्द्रमा को जन्मांग का प्राप्ण घोषित किया गया है। चन्द्रमा का बलाबल और स्थिति ही जन्मांग की प्रबलता या निर्बलता का आधार है। चन्द्रमा की विंशोत्तरी दशा पर केन्द्रित अनुकूल-प्रतिकूल फलाफल का तलस्पर्शी अध्ययन और उसके क्रियान्वयन हेतु अनेक शोधपरक सिद्धान्तों तथा विशिष्ट सूत्रों का उपयुक्त समायोजन चन्द्र दशाफल दीपिका में किया गया है ताकि चन्द्रमा की दशान्तर्दशा के अन्तर्गत होने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं का सटीक आकलन किया जाना संभव हो सके।
इस कृति को 12 अध्यायों में विभाजित किया गया है जिनके अध्ययन से चन्द्रमा की महादशा व अंतर्दशा के विषय में सम्यक् संज्ञान प्राप्त करके सटीक भविष्यकथन किया जा सकता है: 1. ग्रहस्थिति एवं फलकथन, 2. भावगत दशाफल विवेचन, 3. ज्योतिष शास्त्र में चन्द्रग्रह का महत्व, 4. विविध भावगत चन्द्रमा की दशा का फल, 5. बारह जन्म राशियों का फल. 6. बारह राशियों में चन्द्रमा का फल, 7. लग्न फल, 8. विविध लग्नों के लिए भावगत चन्द्रमा का फल. 9. चन्द्रमा की महादशा का संभावित फलाफल, 10. चन्द्रमा की महादशा का फल, 11. चन्द्रमा की महादशा के मध्य अंतर्दशाओं का फल, तथा 12. चन्द्र पीड़ा परिहार विधान।
यह एक व्यावहारिक और ज्योतिष शास्त्र पर केन्द्रित शताधिक शोध प्रबन्धों के रचनाकार ज्योतिर्विदों का प्रथम प्रयास है कि विंशोत्तरी दशा पर केन्द्रित प्रत्येक ग्रह की महादशा और अंतर्दशाओं का इतना वृहद, संपुष्ट और अनुभूत फलकथन दशाफल दीपिका की श्रृंखला के अंतर्गत किया जाना संभव हो सका। सर्वविदित है-कि विश्व में सबसे अधिक उपयोग विंशोत्तरी दशाओं का ही होता है इसलिए इस दशाफल दीपिका श्रृंखला को विंशोत्तरी दशाओं तक ही सीमित रखा गया है। विश्वास है कि विंशोत्तरी दशाफल से सम्बन्धित कृति के अध्ययन की आंकाक्षा व समस्त दशाओं की संरचना के परिणाम से सम्बन्धित जिज्ञासा का सशक्त सारभूत व सारगर्भित समाधान है चन्द्र दशाफल दीपिका जो प्रबुद्ध पाठकों, जिज्ञासु छात्रो व ज्योतिष शास्त्र के अध्येताओं के लिए पठनीय, अनुकरणीय एवं संग्रहणीय है।
₹500.00 -
बृहस्पति दशा फलदीपिका
₹320.00महादशा में हम स्वबाहुबल द्वारा अपार धन, यश, कीर्ति, वैभव, समृद्धि, सम्मान, पद एवं प्रतिष्ठा अर्जित करेंगे।
समय व्यतीत होता चला गया और बृहस्पति की महादशा के 16 वर्ष भी व्यतीत हो गए तथा हम पूरी बृहस्पति की महादशा पर्यन्त भीख ही माँगते रहे। हमारे सामने आर्थिक विषमता की ऐसी-ऐसी स्थितियाँ आयीं कि हमें आठ-आठ दिन तक भोजन भी उपलब्ध नहीं हुआ। अत्यन्त विपन्नता ने हमारे आत्मविश्वास को झकझोर कर रख दिया। तब हमें ज्ञात हुआ कि बृहस्पति धन और समृद्धि नहीं प्रदान करता है। इन 16 वर्षों में हमने ज्योतिष शास्त्र का गहन अध्ययन किया और ज्योतिष शास्त्र की हिन्दी और अंग्रेजी की लगभग सभी पुस्तकों का मनन, चिन्तन किया, जो बाद में हमारे बहुत काम आया। हम इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि बृहस्पति धन नहीं, बल्कि ज्ञान देता है। बृहस्पति दशाफल दीपिका के अन्तर्गत हमने दशाफल अध्ययन हेतु जो शोध सिद्धान्त प्रस्तुत किए हैं, उनके अध्ययन और क्रियान्वयन से हमारे प्रबुद्ध पाठकगण ऐसे अन्यान्य तथ्यों को भलीभांति समझ सकेंगे।
₹400.00










Be the first to review “ज्योतिषीय गणित एवं खगोल शास्त्र”