जातकसारावलीअष्टम भाव

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इस संसार का सर्वाधिक प्रबल पक्ष है मृत्यु। जिसको जीवन मिला है, उसकी मृत्यु होना सुनिश्चित है। प्रत्येक व्यक्ति इस सत्य से अवगत है कि कभी न कभी काल के कराल कर उसके जीवन को ध्वस्त कर देंगे। किसी का जीवन पल मात्र का होता है और किसी का जीवन सौ वर्ष से भी अधिक होता है। इस सत्य को सभी को भलीभांति समझने का प्रयास करना चाहिए कि हमें विधाता ने जितने दिन भी जीने को दिए हैं, उसे हमें एक पराक्रमी, साहसी, निर्भीक, परिश्रमी और आनन्द की समस्त विधाओं को गले लगाने और दूसरों में खुशियाँ बाँटने के लिए सदा तत्पर रहना चाहिए। मृत्यु तो एक दिन आनी ही है और उसी क्षण आनी है, जिस क्षण विधाता ने लिखी है। जीवन के इस वास्तविक सत्य को सभी को सदा आत्मसात करना चाहिए।

राजा परीक्षित ने आचार्य शुकदेव जी से श्रीमद्भागवतपुराण खूब मन लगाकर सुना। अन्त में शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित से प्रश्न किया है- हे राजन् ! मैंने तुम्हें श्रीमद्भागवत पुराण सुनाया। अब एक प्रश्न मैं तुमसे पूछना चाहता हूँ। राजा परीक्षित बोले- जी, अवश्य पूछिए । आचार्य शुकदेव ने पूछा कि क्या तुम मरोगे? राजा परीक्षित ने कहा कि मैं कभी नहीं मरूँगा और यही जीवन का यथार्थ है।

इस संसार का सर्वाधिक प्रबल पक्ष है मृत्यु। जिसको जीवन मिला है, उसकी मृत्यु होना सुनिश्चित है। प्रत्येक व्यक्ति इस सत्य से अवगत है कि कभी न कभी काल के कराल कर उसके जीवन को ध्वस्त कर देंगे। किसी का जीवन पल मात्र का होता है और किसी का जीवन सौ वर्ष से भी अधिक होता है। इस सत्य को सभी को भलीभांति समझने का प्रयास करना चाहिए कि हमें विधाता ने जितने दिन भी जीने को दिए हैं, उसे हमें एक पराक्रमी, साहसी, निर्भीक, परिश्रमी और आनन्द की समस्त विधाओं को गले लगाने और दूसरों में खुशियाँ बाँटने के लिए सदा तत्पर रहना चाहिए। मृत्यु तो एक दिन आनी ही है और उसी क्षण आनी है, जिस क्षण विधाता ने लिखी है। जीवन के इस वास्तविक सत्य को सभी को सदा आत्मसात करना चाहिए।

राजा परीक्षित ने आचार्य शुकदेव जी से श्रीमद्भागवतपुराण खूब मन लगाकर सुना। अन्त में शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित से प्रश्न किया है- हे राजन् ! मैंने तुम्हें श्रीमद्भागवत पुराण सुनाया। अब एक प्रश्न मैं तुमसे पूछना चाहता हूँ। राजा परीक्षित बोले- जी, अवश्य पूछिए । आचार्य शुकदेव ने पूछा कि क्या तुम मरोगे? राजा परीक्षित ने कहा कि मैं कभी नहीं मरूँगा और यही जीवन का यथार्थ है।

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