आयुष्य विचार
₹210.00₹250.00
आयुष्य विचार या आयुर्दाय मनुष्य की जीवन अवधि को जानने की रोचक विधि है। भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद द्वारा आयोजित ज्योतिष विशारद के प्रश्न पत्र-III का यह प्रथम भाग है।
आयुष्य विचार या आयुर्दाय मनुष्य की जीवन अवधि को जानने की रोचक विधि है। भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद द्वारा आयोजित ज्योतिष विशारद के प्रश्न पत्र-III का यह प्रथम भाग है।
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जातकसारावलीप्रथम भाव
₹320.00ग्रन्थ-परिचय
ज्योतिष शास्त्र के अभिनव अभिज्ञान के अन्यान्य शोध सिद्धान्तों के अभ्युदय के इस अभियान के रत्नमण्डित सोपान के प्रथम सुरमित सूत्र परिज्ञान को जातक सारावली-प्रथम *भाव से शीषांकित किया गया है। इसके अंतर्गत समस्त ज्योतिष शास्त्रों के सौरभूत सिद्धांतों एवं शोध सूत्रों के सम्यक् संकलन की अनिवार्यता सभी ज्योतिष प्रेमी अनादि काल से अनुभव करते रहे हैं जिसका आचार्यानुमोदित समाधान कृति की संरचना का सार्वभौमिक, सार्वलौकिक प्रयोजन है।
भारतवर्ष के बहुप्रतिष्ठित ज्योतिर्विद श्रीमती मृदुला त्रिवेदी एवं श्री टी.पी. त्रिवेदी ने विविध ग्रन्थों एवं ज्योतिष शास्त्रों से स्वर्णिम सिद्धान्तों का सतर्कतापूर्वक चयन एवं संकलन करके इस कृति में सुंदर स्वरूप में सुव्यवस्थित व समायोजित किया है ताकि प्रखर जिज्ञासुओं व समस्त ज्योतिष प्रेमियों को एक ही स्थल पर अधिकाधिक ज्योतिष शास्त्र का तलस्पर्शी संज्ञान उपलब्ध हो सके और सत्य व सटीक भविष्यकथन करने में सफलता प्राप्त हो।
ग्रहों की विविध भाव स्थिति, भावाधिपति की पृथक् पृथक् भाव स्थिति का फल, विभिन्न भावों के स्वामियों के लग्नगत होने का परिणाम, लग्नगत ग्रहों के साथ अन्य ग्रहों की युति तथा दृष्टि आदि का सम्यक् विवेचन इस कृति का वैशिष्ट्य है।
कृति को बारह अत्यन्त उपयोगी एवं महत्वपूर्ण भागों में विभाजित, व्याख्यायित तथा अग्रांकित शीर्षकों से नामांकित किया गया है- 1. ग्रहीय आयाम एवं राशि चक्र, 2. ज्योतिष शास्त्र के सारभूत सूत्र, 3. फलित ज्योतिष के स्वर्णिम सिद्धान्त, 4. नवांश : सन्निहित यथार्थ, 5. प्रथम भाव फल निर्णय, 6. समय संज्ञान एवं समीक्षा, 7. शनि-शुक्र अथवा शुक्र-बृहस्पति की दशान्तर्दशा, 8. लग्न में नवग्रहों की स्थिति के अनुसार फलाफल, 9. लग्नगत विभिन्न राशियों का फलाफल, 10. लग्नेश के भिन्न-भिन्न भावगत होने का फलाफल, 11. लग्न में विभिन्न ग्रह युति फल, तथा 12. प्रमाणित, प्रतिष्ठित एवं परीक्षित प्रयोग।
जातक सारावली-प्रथम भाव के अन्तिम अध्याय में ज्योतिष शास्त्र के सौ से अधिक ऐसे ज्ञातव्य शोध सूत्रों को प्रस्तुत किया गया है जो कदाचित अन्यत्र उपलब्ध नहीं हैं। यह सिद्धान्त सूत्र, भविष्यकथन में आश्चर्यजनक सत्यता, सूक्ष्मता, सतर्कता, सहज ही परिलक्षित करते हैं।
जातक सारावली-प्रथम भाव ज्योतिष शास्त्र का रत्नमण्डित अमृत कलश है, जिसमें सन्निहित समस्त सिद्धान्तों को आत्मसात् कर लेने की अनिवार्यता असंदिग्ध है क्योंकि लेखकद्वय ने गागर में सागर भरने की श्रमसाध्य चेष्टा की है। जातक सारावली-प्रथम भाव समस्त ज्योतिष प्रेमियों और अध्येताओं के लिए अनिवार्य रूप से पठनीय, अनुकरणीय, सराहनीय एवं संग्रहणीय है।
₹400.00 -
योग पारिजातधन योग
₹360.00टी.पी. त्रिवेदी
श्रीमती मृदुला त्रिवेदीयोग पारिजात में समस्त प्रसिद्ध, प्रतिष्ठित, प्रशंसित, प्राचीन ज्योतिष शास्त्र के प्रमाणित शास्त्रीय ग्रन्थों के मनन, मन्धन और चिन्तन के अथक प्रयास, परिश्रमसाध्य साधना के उपरान्त विविध विशिष्ट ग्रहयोगों को व्यावहारिक जन्मांगों के निकष पर परख कर, उनका स्पष्ट सतर्क श्रृंखलाबद्ध चयन और संकलन करके प्रबुद्ध पाठकों को अनादिकाल से चली आ रही जिज्ञासा का सम्यक्, संपुष्ट, सारगर्भित, सार्वभौमिक, सर्वजनहितार्थ समाधान से संदर्भित ग्रहयोगों से सम्बन्धित तथा व्यक्ति के व्यवसाय, व्यस्तता, विलासिता की उपलब्धता, प्रभुता, अधिकारों की समग्रता, ऐश्वर्य, कीर्ति, वैभव, सम्पत्ति, समृद्धि, सत्ता, सम्पदा, सौभाग्य के अतिरिक्त सिंहासन तथा राज्य प्राप्ति के अन्यान्य योगों के साथ-साथ विपन्नता, दरिद्रता, चिन्ता, विपत्ति, विनाश, विफलता, विकृति, व्यवधान, अवरोध, अनैतिकता, दुर्भाग्य, दुर्दमनीय दारुण दुखों की व्यथा, धनहानि, आस्था तथा विश्वास की निर्बलता, धूर्तता, दैहिक सबलता तथा पुष्टता से सम्बन्धित सभी ग्रहयोगों तथा पाठकों की जिज्ञासा का तर्कसंगत विवेचन, विवरण, व्यावहारिक विश्लेषण सहित प्रत्युत्तर सन्निहित, समाहित व समायोजित है।
किसी भी जन्मांग से सम्बन्धित भविष्य के आकलन हेतु ग्रहयोगों का विस्तृत, सारगर्भित, सारस्वत व तलस्पर्शी अध्ययन, अनुभव, अभ्यास और अनुसंधान का महत्व सर्वोपरि है जिसके अभाव में जातक की प्रभुता, सत्ता, संपदा, समृद्धि तथा प्रशासन आदि से संदर्भित सटीक अनुमान सम्भव नहीं है।
योग पारिजात को 1. राजयोग, 2. भाग्य योग, 3. धन योग, तथा 4. अनुपम योग से शीर्षांकित किया गया है जिसके अंतर्गत 850 प्रामाणिक, शास्त्रगर्भित तथा आचार्यानुमोदित ग्रहयोग, विविध व्यावहारिक जन्मांगों के उदाहरण सहित सन्निहित हैं। इसके अतिरिक्त सूर्य और चन्द्रमा से संदर्भित ग्रहयोग, केन्द्रत्रिकोण राजयोग, महापुरुष राजयोग, महाभाग्य योग, अखण्ड साम्राज्य योग, उच्चस्थ ग्रहकृत राजयोग, राशिकृत राजयोग, विपरीत राजयोग, नीचभंग तथा राजभंग ग्रहयोग, विपन्नता प्रदायक ग्रहयोग, नाभस योग, नवांश संदर्भित शुभ और अशुभ ग्रहयोग तथा नवांश चक्र पर आधारित राजयोग आदि शीर्षांकित विविध अध्यायों में संस्कृत के श्लोकों में वर्णित ग्रहयोगों को ज्योतिष शास्त्र के वैज्ञानिक धरातल पर परखकर तथा सहस्रों जातकों, जातिकाओं आदि के जन्मांगों पर क्रियान्वित करने के उपरान्त जिज्ञासु पाठकों के कल्याणार्थ योग पारिजात में सुरुचिपूर्ण स्वरूप में समायोजित किया गया है।₹450.00 -
राहु केतु
₹210.00श्री कृष्ण कुमार द्वारा लिखित ज्योतिष और रोग पर यह ग्रन्थ मेरे हाथों में है। इसका विहंगम अध्ययन यह सिद्ध करने के लिये काफी है कि इसमें प्रयुक्त विभिन्न
सिद्धान्तों का संकलन भिन्न-भिन्न शास्त्रों से किया गया है तथा इसमें काफी प्रयत्न तया परिश्रम किया गया है।₹250.00 -
बृहस्पति दशा फलदीपिका
₹320.00महादशा में हम स्वबाहुबल द्वारा अपार धन, यश, कीर्ति, वैभव, समृद्धि, सम्मान, पद एवं प्रतिष्ठा अर्जित करेंगे।
समय व्यतीत होता चला गया और बृहस्पति की महादशा के 16 वर्ष भी व्यतीत हो गए तथा हम पूरी बृहस्पति की महादशा पर्यन्त भीख ही माँगते रहे। हमारे सामने आर्थिक विषमता की ऐसी-ऐसी स्थितियाँ आयीं कि हमें आठ-आठ दिन तक भोजन भी उपलब्ध नहीं हुआ। अत्यन्त विपन्नता ने हमारे आत्मविश्वास को झकझोर कर रख दिया। तब हमें ज्ञात हुआ कि बृहस्पति धन और समृद्धि नहीं प्रदान करता है। इन 16 वर्षों में हमने ज्योतिष शास्त्र का गहन अध्ययन किया और ज्योतिष शास्त्र की हिन्दी और अंग्रेजी की लगभग सभी पुस्तकों का मनन, चिन्तन किया, जो बाद में हमारे बहुत काम आया। हम इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि बृहस्पति धन नहीं, बल्कि ज्ञान देता है। बृहस्पति दशाफल दीपिका के अन्तर्गत हमने दशाफल अध्ययन हेतु जो शोध सिद्धान्त प्रस्तुत किए हैं, उनके अध्ययन और क्रियान्वयन से हमारे प्रबुद्ध पाठकगण ऐसे अन्यान्य तथ्यों को भलीभांति समझ सकेंगे।
₹400.00 -
जातकसारावलीपंचम भाव
₹370.00ग्रन्य-परिचय
संतति-सुख के अभाव में, दाम्पत्य सुख की सम्पूर्णता सदा ही संदिग्ध रहती है।
सन्तान भविष्य की नियामक होने के साथ-साथ, उत्तरदायित्व एवं कर्तव्यों के मध्य निर्मित होने वाले सुन्दर समीकरण का स्वर्णिम सुदीप है। संतति-सुख के विविध पक्षों की शास्त्रानुमोदित व्याख्या तथा फलादेश के प्रमाणित, परीक्षित तथा प्रतिष्ठित सूत्रों के संतुलित समायोजन के साथ-साथ, पंचम भावगत नवग्रहों के फलाफल का विस्तृत विवेचन एवं संदर्भित सूत्रों की प्रामाणिकता को विविध जन्मांगों की व्याख्या द्वारा इस कृति में सिद्ध किया गया है। पुत्र और पुत्रियों की संख्या, संततिहीनता अथवा दत्तक संतति सम्बन्धी ग्रहयोगों को विविध उदाहरणों द्वारा प्रस्तुत किया गया है।
पंचम भाव से बुद्धि की प्रखरता, ज्ञान की दिशा, रचनात्मकता, कलात्मकता, बौद्धिक क्षमता, स्मरण शक्ति, शिक्षा, विद्वत्ता, बौद्धिक कौशल, प्रेम सम्बन्धों की सफलता अथवा विफलता तथा संतति सुख का उल्लास एवं संततिहीनता के संत्रास आदि के अनुमान से संदर्भित विविध दुर्लभ सूत्र, जातक सारावली-पंचम भाव का वैशिष्ट्य है।
जातक सारावली-पंचम भाव अग्रांकित अध्यायों में विभाजित एवं व्याख्यायित है-1. पंचम भावगत राशियाँ, तथ्य एवं तत्त्व आदि; 2. पंचमेश की विभिन्न भावस्थिति के अनुसार फल; 3. विभिन्न भावेशों के पंचम भावगत होने तथा ग्रहों की दृष्टि का समीकरण; 4. पंचम भाव से सम्बद्ध विशिष्ट शोध सिद्धान्त; 5. पंचम भावगत सूर्य का फल; 6. पंचम भावगत चन्द्रमा का फल; 7. पंचम भावगत मंगल का फल; 8. पंचम भावगत बुध का फल; 9. पंचम भावगत बृहस्पति का फल; 10. पंचम भावगत शुक्र का फल; 11. पंचम भावगत शनि का फल; 12. पंचम भावगत राहु का फल; 13. पंचम भावगत केतु का फल; 14. पंचम भाव बौद्धिक प्रखरता एवं शिक्षा; 15 पंचम भाव से संदर्भित कतिपय विशेष ग्रहयोग; 16 पुत्र सुखः परिज्ञान एवं परिणाम; 17. मुख्यतः कन्याओं के जन्म हेतु ग्रहयोग; 18. सन्तानहीनता एक अभिशाप; 19. दत्तक पुत्र हेतु ग्रहीय आयाम तथा 20. पंचमेश की महादशा का फल।
जातक सारावली-पंचम भाव ज्योतिष शास्त्र का रत्नमण्डित अमृत कलश है, जिसमें सन्निहित समस्त सिद्धान्तों को आत्मसात् कर लेने की अनिवार्यता असंदिग्ध है क्योंकि लेखकद्वय ने ‘गागर में सागर’ भरने की श्रमसाध्य चेष्टा की है। यह कृति समस्त ज्योतिष प्रेमियों और अध्येताओं के लिए अनिवार्य रूप से पठनीय, अनुकरणीय एवं संग्रहणीय है।
₹450.00 -
शुक्र दशाफलदीपिका
शुक्र दशाफल दीपिका को अग्रांकित 20 अध्यायों में व्याख्यायित और विभाजित किया गया है जिसमें शुक्र की महादशा के फल के साथ-साथ शुक्र की महादशा के मध्य अन्तर्दशाओं का भी विस्तृत अनुसंधानात्मक अध्ययन पाठकों के कल्याणार्थ प्रस्तुत किया गया है। इस कृति में जहाँ एक ओर समस्त ज्योतिष शास्त्र के शास्त्रीय ग्रंथों में व्याख्यायित उन श्लोकों का उल्लेख है जो ऋषियों ने अब से सैकड़ों या सहस्रों वर्ष पूर्व लिखे थे, वहीं दूसरी ओर इतने लम्बे अंतराल के उपरान्त प्रकृति में होने वाले परिवर्तन ने दशाफल निरूपण में जिस प्रकार के अद्भुत, अविश्वसनीय और समयानुरूप परिवर्तन किये हैं, जिन्हें पूर्णतः समझ पाने के लिए हमने ज्योतिष शास्त्र में दशाफल पर केन्द्रित अपने 40-45 वर्षों के अनुभव और साधना का मर्मस्पर्शी, प्रखर, संज्ञानात्मक, अध्ययनात्मक उपयोग करने के उपरान्त प्रबुद्ध पाठकों के कल्याणार्थ इस कृति को साकार स्वरूप प्रदान किया है।
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गीता मंत्र गंगोत्री
₹290.00श्रीमद्भगवद्गीता को महाकाव्य महाभारत का प्राण स्वीकारा गया है जो धरतीवासियों के लिए प्रार्थना पथ नहीं, बल्कि अलौकिक प्रसादामृत और पंचामृत है जिसकी एक बूँद ही मानव का ब्रह्म में विलय करके उसे मोक्षगति प्रदान करके अमरत्व की ओर प्रशस्त करती है। श्रीमद्भगवदगीता की मंत्रशक्ति से प्रायः अधिकांश भक्तजन, साधक, आराधक, पाठक तथा जिज्ञासुगण अनभिज्ञ हैं जिसे प्रबुद्ध पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करना अपेक्षित है। गीता की मंत्रात्मक शक्ति एवं उसकी व्याख्या, गीता मंत्र गंगोत्री में सहज और सघन स्वरूप में सन्निहित है। गीता मंत्र गंगोत्री बारह अध्यायों में व्याख्यायित विभाजित है जिन्हें अग्रांकित नामों से शीर्षांकित किया गया है:
₹350.00 -
ज्योतिष विज्ञानसिद्धांत शिरोमणि
₹240.00जातक सारावली-दशम भाव आकाशीय पिंडों के अध्ययन एवं ज्योतिष शास्त्र के शोध सिद्धांतों से आलोकित व्यवसाय पक्ष का प्रज्वलित प्रकाश पुंज है। व्यवसाय और कर्म के अधिष्ठाता महाप्रभु की परमपावन पुनीत पदरज का मंगल तिलक है जातक सारावली-दशम भाव। व्यवसाय अर्थात् जीविकोपार्जन का माध्यम, समस्त मानव जाति की गति, मति, प्रगति, उन्नति की सम्यक् स्थिति का सक्रिय अभिनव अंग है। व्यवसाय का गौरव ही नर-नारियों की प्रभुता व सत्ता, अधिकार व कर्तव्य, कर्म व दायित्व की त्रिवेणी है और यही जीवन की विविध व्यवस्थाओं और पारिस्थितिक से अलंकृत कर्म का ऐसा सिंधु है, जिसमें अनवरत, अनंत, अविरल, निर्मल, कोमल मधु एवं दुग्ध स्तंभ का समायोजन एवं निरंतर प्रवाह होता रहता है। मनोनुकूल व्यवसाय प्रत्येक व्यक्ति की प्राथमिकता होती है। व्यवसाय पक्ष पर केंद्रित अनेक ग्रंथ उपलब्ध हैं लेकिन अधिकांश ग्रंथों की प्रामाणिकता संदिग्ध है
किसी कुशल ज्योतिर्विद् से पूछे जाने वाली प्रमुख जिज्ञासाओं में जातक/जातिका के व्यवसाय से संबंधित प्रश्न को समेकित किया जा सकता है। वह नौकरी करेगा या व्यापार में सफलता प्राप्त करेगा, उद्योगपति बनेगा या उद्योग बनकर धनार्जन करेगा। यदि उद्योगपति बनेगा तो किस स्तर का होगा, क्या देश के प्रतिष्ठित और यशस्वी उद्योगपतियों में उसके नाम की गणना होगी या फिर कोई साधारण नौकरी करके मात्र जीवनयापन कर सकेगा। ऐसे कई प्रश्न अभिभावकगण प्रायः पूछते रहते हैं और यह स्वाभाविक होने के साथ ही अनिवार्य भी है। जातक सारावली-दशम भाव का वैशिष्ट्य है, नवांश चक्र द्वारा उपयुक्त व्यवसाय को समेकित करना। नवांश चक्र के अध्ययन के अभाव में किसी भी जातक के व्यवसाय का सटीक अनुमान करना लगभग उसी प्रकार है, जैसे किसी व्यक्ति का चित्र देखकर संबंधित व्याधियों का रेखांकन करना। अस्तु, नवांश चक्र का तलस्पर्शी मर्म तथा ऐसे अनेक विषयों के प्रामाणिक व परिक्षित शोधसूत्र, इस कृति में समाहित हैं जो इसे व्यवसाय पक्ष पर केंद्रित एक असाधारण कृति के रूप में संतुलित करते हैं
कृति को विषय के विस्तृत धरातल के आधार पर 19 शोधपरक एवं ज्ञानवर्द्धक अध्यायों में व्याख्यायित किया गया है। इस कृति के अंतर्गत श्रीमती मृदुला त्रिवेदी एवं श्री टी.पी. त्रिवेदी ने अपने पूर्व 40 वर्षों के अध्ययन, अनुभव, अनुसंधान के पावन प्रांजल पीयूष का अनुसरण किया है। समस्त जिज्ञासु पाठकों एवं ज्योतिष प्रेमियों के लिए जातक सारावली-दशम भाव पठनीय, अनुकरणीय और संग्रहणीय है जिसमें सन्निहित सिद्धान्तों के क्रियान्वयन से व्यवसाय पक्ष से परिप्रेक्ष्य भविष्य कथन करने का अपूर्व कौशल और सामर्थ्य प्राप्त होना संभव है₹300.00










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