
अनिष्ट ग्रह उपचार
सभी द्वादश भावों में शुभ व अशुभ प्रभाव के योग दिए हैं। इसके बाद उपचार संबंधी मंत्र, स्तोत्र व कवच दिए हैं। पुस्तक का आरंभिक उपाय के उपयोग दृष्टिने वाले पाँच उदाहरणों से हुआ है। इसके बाद ग्रहों पर नक्षत्रों का प्रभाव तथा उपचार के सिद्धान्त पर चर्चा हुई है। अध्याय 4 में अनिष्ट ग्रह गोचर में वैदिक मंत्र का उपयोग तथा अध्याय 5 में कुछ सरल व सटीक उपचारों पर चर्चा हुई है
| Category: | Alpha |
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व्याधि विभावरी( रोगमुक्त जीवन )
₹320.00व्याधि विकार और विविध विकृतियों से विमुक्त होने हेतु किसी सघन और प्रमाणित सामग्री के अभाव ने ही देश के प्रतिष्ठित, विद्वान श्रीमती मृदुला त्रिवेदी तथा श्री टी.पी. त्रिवेदी को व्याधि पर केन्द्रित व्याधि विभावरी नामक शोध प्रबन्ध की संरचना हेतु प्रेरित व प्रोत्साहित किया। यजुर्वेद तथा अथर्ववेद में अनेक ऐसे मंत्र प्रयोग सन्निहित हैं, जिनके नियमित एवं निरन्तर अनुसरण से कैंसर और एड्स जैसी कर्मज व्याधियों का भी शमन संभव है।
व्याधि विभावरी से तात्पर्य है व्याधिमुक्त करने वाली आनन्दप्रदायक सुखपूर्ण रात्रि। ज्योतिष शास्त्र में विविध वीभत्स व्याधियों के ग्रहयोगों के अनेकानेक विधान व्याख्यायित व विवेचित हैं। व्याधियों की चिकित्सा और निदान की अनिवार्यता भी असंदिग्ध है। किसी भी व्यक्ति के व्याधिग्रस्त होने पर प्रायः महामृत्युंजय जप का परामर्श प्रदान कर दिया जाता है। कब, कहाँ, किस स्थिति में मृत्युंजय मंत्र शीघ्र लाभप्रदायक सिद्ध होगा, इसकी अनिवार्यता असंदिग्ध है। क्या महामृत्युंजय के जप मात्र से कैंसर, एड्स, पक्षाघात, हृदयाघात, लीवर सिरोसिस, ब्रेन हैमरेज व पागलपन जैसी असाध्य व्याधियों की चिकित्सा के समय महामृत्युंजय मंत्रजप का अनुष्ठान करने से अपेक्षित सफलता उपलब्ध हो सकती है? ऐसी असाध्य व्याधियों से मुक्त होने हेतु अनेक विशिष्ट मंत्रजप, स्तोत्र पाठ आदि का सविधि अनुष्ठान संपादन करने से व्याधिग्रस्त व्यक्ति का व्याधिमुक्त होना, अनेक अवसरों पर अनुभवसिद्ध है।
स्वास्थ्य रक्षा हेतु विविध असाध्य व्याधियों से मुक्ति हेतु अनेक दुर्लभ मंत्र अनुष्ठान, स्तोत्र पाठ तथा अनुष्ठान विधान व्याधि विभावरी के अंतर्गत आविष्ठित हैं। कब, कहाँ, किन स्थितियों में किस मंत्र प्रयोग का अनुकरण करके साधक शीघ्र व्याधिमुक्त हो सकेगा, इसका विस्तृत विवेचन कृति के अग्रांकित अध्यायों में व्याख्यायित व विश्लेषित हैः 1. नवग्रहकृत परिहार, 2. विविध ग्रहकृत व्याधिविधान एवं समाधान, 3. बालरोग शमन साधना, 4. कर्मज व्याधि शमन विधान, 5. मंत्र शक्ति द्वारा व्याधिमुक्ति विधान, 6. ज्येष्ठा नक्षत्र में जन्म का संत्रास, 7. गण्डमूल में जन्म : अनिष्ट शमन, 8. अशुभ जन्म समय संज्ञान, 9. गंभीर व्याधि परिहार परिज्ञानः प्रबल मारकेश शमन विधान, 10. अथर्ववेद के अन्तर्गत व्याधि शमन विधान, 11. गुरु परम्परा : सिद्ध अनुष्ठान।
असाध्य व्याधि से आक्रांत व्यक्ति हेतु व्याधि विभावरी में सन्निहित मंत्र प्रयोग, अनुष्ठान आदि संजीवनी सिद्ध होंगे, इसमें किंचित सन्देह नहीं है। व्याधि विभावरी मात्र ज्योतिषियों अथवा ज्योतिष प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि सभी व्यक्तियों के लिए पठनीय, अनुकरणीय और संग्रहणीय शोध प्रबन्ध है।
₹400.00 -
संतति संहिता
₹360.00संतति संहिता उन समस्त सबल, सशक्त, सारस्वत, शाश्वत संकल्पों का साकार स्वरूप है, जो सन्तान सम्बन्धी प्रामाणिक सामग्री से सन्निहित संरचनाओं के अभाव के कारण रचनाकार के मन मस्तिष्क के पटल पर अंकित और अंकुरित हुए। संततिहीनता से त्रस्त, संतति वियोग से व्याकुल, पुत्र अथवा पुत्रियों के जन्म की अत्यधिक आतुर आकांक्षा और अभिलाषा की विफलता से संतप्त, दत्तक संतति की चिन्ता से आक्रान्त, परजात शिशु के संशय से व्यथित, विकृत अथवा विकलांग संतति की संभावना से प्रकम्पित, संतति जन्म के अनुमानित समय संज्ञान हेतु जिज्ञासारत, नालवेष्टित शिशु की आशंका से ग्रस्त, युगल सन्तान जन्म की संभावना, संततिहीनता का कारण विविध शापों से अभिशप्त जातक, पत्नी के गर्भधारण करने की क्षमता, सन्तान संख्या तथा अपनी संतति के साथ संभावित सम्बन्धों की मधुरता अथवा कटुता, शत्रुता अथवा आत्मीयता के बोधतुल्य अनेक ऐसे प्रकरण हैं, जिनके विश्लेषण और व्याख्या के उपरान्त तलस्पर्शी अनुसंधान की अनिवार्यता असंदिग्ध है जिन पर किसी भी सामयिक ज्योतिर्विद् अथवा लेखक ने प्रामाणिक शोध सूत्र, जिज्ञासु और प्रबुद्ध पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने की चेष्टा नहीं की।
संतान सम्बन्धी अन्यान्य पक्षों पर शोध साधना में अवगाहन करने हेतु विविध सत्य एवं प्रामाणिक तथ्यों ने देश के प्रसिद्ध लेखकद्वय श्रीमती मृदुला त्रिवेदी तथा श्री टी.पी. त्रिवेदी को आंदोलित व व्यथित किया। उनकी शोध यात्रा का सर्वाधिक सुरभित सुमन है संतति संहिता, जिसका प्रत्येक पृष्ठ समस्त शास्त्रीय ग्रंथों के सबल प्रमाणों से अभिसिंचित है। कृति को अग्रांकित 21 अध्यायों में व्याख्यायित, विवेचित व विश्लेषित किया गया है।
1. पंचम भावगत ग्रहों का फल, 2. पंचम भावगत विभिन्न राशियों का फल, 3. द्वादश भाव के स्वामियों की पंचम भावस्थ स्थिति का फल, 4. पंचम भाव में ग्रहों की दृष्टि का फल, 5. पंचमेश की विभिन्न भावों में स्थिति के अनुसार फल, 6. संतति जन्म प्रकार और प्रसंग, 7. नालवेष्टित शिशु एक भयावह स्थिति, 8. युगल संतान सम्बन्धित संज्ञान, 9. विभिन्न शाप एवं संतति संताप, 10. नारी और गर्भधारण करने की क्षमता, 11. संतान संख्या: संज्ञान सिद्धांत, 12. संततिहीनता का विकल्प दत्तक संतान, 13. संतति और समय की सत्ता, 14. संतान जन्म का समय गणना के विभिन्न आधार, 15. प्रसवकाल संज्ञान, 16. संतति सुख हेतु प्रभूत प्रयत्न एवं प्रतीक्षा, 17. गर्भवती युवती की मृत्यु, 18. शिशु के माता-पिता की मृत्यु सम्बन्धी ग्रहयोग, 19. माता अथवा पिता से त्यक्त संतान हेतु ग्रह ज्ञान, 20. ऋतुकाल एवं गर्भकाल ज्ञातव्य सूत्र, 21. ग्रह स्थितियाँ तथा शिशु के सम्बन्धी ।
संतति संहिता सन्तान पक्ष की एक ऐसी आधारशिला है जिसमें समस्त शास्त्रीय ग्रंथों के प्रामाणिक सूत्रों की संसिद्धि हेतु विविध व्यावहारिक जन्मांगों में विद्यमान ग्रहयोगों की सत्यता को परिलक्षित व प्रदर्शित किया गया है। संतति संहिता सन्तान पक्ष पर केन्द्रित एक अद्भुत ग्रन्थ है जो अनुभूत सूत्रों पर आधारित है और जिसका अध्ययन, अनुगमन, अनुसरण समस्त ज्योतिष प्रेमियों, प्रबुद्ध पाठकों और जिज्ञासु छात₹450.00 -
सूर्यदशा फलदीपिका
₹320.00ज्योतिष विज्ञान की महत्ता व समय की सत्ता के मध्य निर्मित होने वाले समीकरण की स्वर्णमण्डित शिला ही दशाफल दीपिका का सबलतम है जिसका रहस्य भारतीय ऋषि-मनीषियों ने अपनी योग साधना के बल पर समस्त मानवता के कल्याण हेतु समय-समय पर उद्घाटित किया था। ज्योतिष शास्त्र में विंशोत्तरी दशा सर्वाधिक विश्वसनीय व अनुकरणीय है। सूर्यग्रह की महादशा, अंतर्दशा व प्रत्यंतरदशा पर केंद्रित सूर्य दशाफल दीपिका नामक यह शोधप्रबन्ध दशान्तदंशा के संदर्भ में सत्य भविष्यकथन हेतु क्रांतिकारक सिद्ध होगा। इस सम्बन्ध में समस्त ज्योतिष ग्रन्थों में अनगिनत सूत्र उपलब्ध हैं जिनका उपयुक्त समन्वय व समायोजन कृति का सर्वस्व है। वस्तुतः यह कृति विंशोत्तरी दशाफल कथन करने की अद्भुत तकनीक का उत्कृष्ट प्रमाण है। विंशोत्तरी दशा के क्रियान्वयन से पूर्व ज्योतिष शास्त्र के ग्रन्थों में सन्निहित समस्त श्लोकों के मर्म को आत्मसात् करके उनके सटीक क्रियान्वयन करने की कला के अभ्यास के अभाव में जन्मांग के आधार पर भविष्य में होने वाली अनुकूल, प्रतिकूल घटनाओं के समय की घोषणा कदापि नहीं करनी चाहिए। दशाफल कथन की अविश्वसनीयता व अल्पज्ञान की सत्ता को देखकर लेखकों का मन करुण क्रन्दन कर उठा और उन्हें विंशोत्तरी दशा पर शोधपरक चिंतन व लेखन करने हेतु विवश किया।
सूर्य दशाफल दीपिका को अग्रांकित 12 अध्यायों में व्याख्यायित किया गया है: 1. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का महत्व, 2. विंशोत्तरी दशाफल निर्णय, 3. दशाफल कथन हेतु कतिपय आवश्यक सूत्र, 4. नक्षत्र के आधार पर विंशोत्तरी दशा का फलकथन, 5. सूर्य की महादशा का फल. 6. विविध भावगत सूर्य की महादशा का फल, 7. बारह राशियों में सूर्य की दशा का फल, 8. उच्च-नीच आदि राशिगत सूर्य की दशा का फल, 9. सूर्य की महादशा में विविध ग्रहों की अंतर्दशा का फल, 10. सूर्य की महादशा में प्रत्यंतर दशाओं का फल, 11. सूर्यग्रहण एवं चन्द्रग्रहण परिज्ञान एवं परिहार, तथा 12. सूर्य की महादशा की अनुकूलता हेतु अनुभूत व अद्भुत परिहार।
प्रबुद्ध पाठकों व जिज्ञासु छात्रों के प्रबल आग्रह पर कृति में परिहार का भी संयोजन किया गया है क्योंकि इसके अभाव में कृति की पूर्णता संदिग्ध थी। प्रबुद्ध पाठक व जिज्ञासु छात्र सूर्यग्रह पीड़ा परिहार के अध्ययन से अवश्य लाभान्वित होंगे। विंशोत्तरी दशा पर केन्द्रित शताधिक पुस्तकों के अध्ययन ने ही लेखकद्वय को प्रत्येक ग्रह की दशान्तर्दशा पर आधारित दशाफल श्रृंखला की पुस्तकों की संरचना हेतु प्रेरित किया ताकि विविध दशान्तर्दशाओं के विषय को अनुभव के निकष पर कस कर वास्तव में प्रतिफलित होने वाली घटनाओं के सम्यक् उल्लेख का समायोजन किया जा सके। विश्वास है कि सूर्य दशाफल दीपिका में विद्यमान सूत्रों का सटीक क्रियान्वयन शत-प्रतिशत सत्य भविष्यकथन करने में अत्यन्त सहायक सिद्ध होगा।
₹400.00 -
मंत्र मंदाकिनी
₹320.00मंत्र मंदाकिनी में समस्त सामान्य समस्याओं के सुगम समाधान का शास्त्रसंगत उल्लेख किया गया है जिसमें शताधिक मंत्रों में से, स्वयं के लिए अनुकूल मंत्र चयन की दुष्कर प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती। प्रत्येक अभीष्ट की संसिद्धि हेतु पूर्ण परिहार प्रदान करने हेतु पृथक् पृथक् परामर्श प्रपत्र का प्रबल पथ मंत्र मंदाकिनी में प्रस्तुत किया गया है। ये सभी परिहार, अनुष्ठान अथवा प्रयोग दीर्घकाल से लेखकद्वय द्वारा परीक्षित हैं तथा सहस्राधिक अवसरों पर अभिशंसित, प्रशंसित और चर्चित हुए हैं जिनसे प्राप्त परिणाम के प्रमाण और परिमाण से साधक व पाठकगण निरन्तर प्रेरित, आनन्दित, आह्ह्लादित, हर्षित और उल्लसित हुए हैं।
मंदाकिनी मंत्र के 19 अध्यायों में विभाजित है जिसमें मंत्र शक्ति के अद्भुत प्रभाव का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया गया है-1. मंत्रः वैज्ञानिक व्याख्या; 2. मंत्र विज्ञानः विविध विभाग, 3. ग्रह शांतिः 4. विवाहसंबंधी समस्याएं एवं समाधान; 5. संतति सुखः परिहार परिज्ञान; 6. निकृष्ट ग्रह योग कृत निषेध शमन, 7. प्रचुर धनप्राप्ति अनुभूत साधनाएँ: 8. शत्रु शमन तथा प्रतिद्वंदी शमन; 9. व्याधि शमनः स्वास्थ्यवर्धन; 10. परीक्षा और प्रतियोगिता में सर्वोच्च सफलता; 11. सभी दोस्तों को निर्मूल मन की संस्तुति; 12. इलेक्ट्रोइलेक्ट्रॉनिक वृत्तान्तः 13. विस्तृत व्रतविधान; 14. दान अनुष्ठानः श्रेष्ठ परिहार प्रार्थनाएँ: 15. श्रीदुर्गासप्तशती सन्निहित उपासनाएँ: अभीष्ट संसिद्धि साधनाएँ: 16. अन्यान्य प्रार्थनाओं के समाधान जिज्ञासा एवं सुगमता साकेतिक साधनाएँ: 17. सुखद दाम्पत्य उपासना उपासना साकेतिक साधनाएँ: 18. मानस मंत्र साधना; 19. षट्कर्म प्रयोग। ज्योतिष एवं मंत्र विज्ञान के गूढ़ रहस्य सभी ज्योतिष प्रेमी एवं मंत्र अध्येताओं के अध्ययन एवं अनुसंधान के निमित्त मंत्र मंदाकिनी एक अमूल्य निधि है।
₹400.00 -
योग पारिजातभाग्य योग
₹360.00टी.पी. त्रिवेदी
श्रीमती मृदुला त्रिवेदीयोग पारिजात में समस्त प्रसिद्ध, प्रतिष्ठित, प्रशंसित, प्राचीन ज्योतिष शास्त्र के प्रमाणित शास्त्रीय ग्रन्थों के मनन, मन्धन और चिन्तन के अथक प्रयास, परिश्रमसाध्य साधना के उपरान्त विविध विशिष्ट ग्रहयोगों को व्यावहारिक जन्मांगों के निकष पर परख कर, उनका स्पष्ट सतर्क श्रृंखलाबद्ध चयन और संकलन करके प्रबुद्ध पाठकों को अनादिकाल से चली आ रही जिज्ञासा का सम्यक्, संपुष्ट, सारगर्भित, सार्वभौमिक, सर्वजनहितार्थ समाधान से संदर्भित ग्रहयोगों से सम्बन्धित तथा व्यक्ति के व्यवसाय, व्यस्तता, विलासिता की उपलब्धता, प्रभुता, अधिकारों की समग्रता, ऐश्वर्य, कीर्ति, वैभव, सम्पत्ति, समृद्धि, सत्ता, सम्पदा, सौभाग्य के अतिरिक्त सिंहासन तथा राज्य प्राप्ति के अन्यान्य योगों के साथ-साथ विपन्नता, दरिद्रता, चिन्ता, विपत्ति, विनाश, विफलता, विकृति, व्यवधान, अवरोध, अनैतिकता, दुर्भाग्य, दुर्दमनीय दारुण दुखों की व्यथा, धनहानि, आस्था तथा विश्वास की निर्बलता, धूर्तता, दैहिक सबलता तथा पुष्टता से सम्बन्धित सभी ग्रहयोगों तथा पाठकों की जिज्ञासा का तर्कसंगत विवेचन, विवरण, व्यावहारिक विश्लेषण सहित प्रत्युत्तर सन्निहित, समाहित व समायोजित है।
किसी भी जन्मांग से सम्बन्धित भविष्य के आकलन हेतु ग्रहयोगों का विस्तृत, सारगर्भित, सारस्वत व तलस्पर्शी अध्ययन, अनुभव, अभ्यास और अनुसंधान का महत्व सर्वोपरि है जिसके अभाव में जातक की प्रभुता, सत्ता, संपदा, समृद्धि तथा प्रशासन आदि से संदर्भित सटीक अनुमान सम्भव नहीं है।
योग पारिजात को 1. राजयोग, 2. भाग्य योग, 3. धन योग, तथा 4. अनुपम योग से शीर्षांकित किया गया है जिसके अंतर्गत 850 प्रामाणिक, शास्त्रगर्भित तथा आचार्यानुमोदित ग्रहयोग, विविध व्यावहारिक जन्मांगों के उदाहरण सहित सन्निहित हैं। इसके अतिरिक्त सूर्य और चन्द्रमा से संदर्भित ग्रहयोग, केन्द्रत्रिकोण राजयोग, महापुरुष राजयोग, महाभाग्य योग, अखण्ड साम्राज्य योग, उच्चस्थ ग्रहकृत राजयोग, राशिकृत राजयोग, विपरीत राजयोग, नीचभंग तथा राजभंग ग्रहयोग, विपन्नता प्रदायक ग्रहयोग, नाभस योग, नवांश संदर्भित शुभ और अशुभ ग्रहयोग तथा नवांश चक्र पर आधारित राजयोग आदि शीर्षांकित विविध अध्यायों में संस्कृत के श्लोकों में वर्णित ग्रहयोगों को ज्योतिष शास्त्र के वैज्ञानिक धरातल पर परखकर तथा सहस्रों जातकों, जातिकाओं आदि के जन्मांगों पर क्रियान्वित करने के उपरान्त जिज्ञासु पाठकों के कल्याणार्थ योग पारिजात में सुरुचिपूर्ण स्वरूप में समायोजित किया गया है।₹450.00 -
योग पारिजातराजयोग
₹360.00योग पारिजात में समस्त प्रसिद्ध, प्रतिष्ठित, प्रशंसित, प्राचीन ज्योतिष शास्त्र के प्रमाणित शास्त्रीय ग्रन्थों के मनन, मन्धन और चिन्तन के अथक प्रयास, परिश्रमसाध्य साधना के उपरान्त विविध विशिष्ट ग्रहयोगों को व्यावहारिक जन्मांगों के निकष पर परख कर, उनका स्पष्ट सतर्क श्रृंखलाबद्ध चयन और संकलन करके प्रबुद्ध पाठकों को अनादिकाल से चली आ रही जिज्ञासा का सम्यक्, संपुष्ट, सारगर्भित, सार्वभौमिक, सर्वजनहितार्थ समाधान से संदर्भित ग्रहयोगों से सम्बन्धित तथा व्यक्ति के व्यवसाय, व्यस्तता, विलासिता की उपलब्धता, प्रभुता, अधिकारों की समग्रता, ऐश्वर्य, कीर्ति, वैभव, सम्पत्ति, समृद्धि, सत्ता, सम्पदा, सौभाग्य के अतिरिक्त सिंहासन तथा राज्य प्राप्ति के अन्यान्य योगों के साथ-साथ विपन्नता, दरिद्रता, चिन्ता, विपत्ति, विनाश, विफलता, विकृति, व्यवधान, अवरोध, अनैतिकता, दुर्भाग्य, दुर्दमनीय दारुण दुखों की व्यथा, धनहानि, आस्था तथा विश्वास की निर्बलता, धूर्तता, दैहिक सबलता तथा पुष्टता से सम्बन्धित सभी ग्रहयोगों तथा पाठकों की जिज्ञासा का तर्कसंगत विवेचन, विवरण, व्यावहारिक विश्लेषण सहित प्रत्युत्तर सन्निहित, समाहित व समायोजित है।
किसी भी जन्मांग से सम्बन्धित भविष्य के आकलन हेतु ग्रहयोगों का विस्तृत, सारगर्भित, सारस्वत व तलस्पर्शी अध्ययन, अनुभव, अभ्यास और अनुसंधान का महत्व सर्वोपरि है जिसके अभाव में जातक की प्रभुता, सत्ता, संपदा, समृद्धि तथा प्रशासन आदि से संदर्भित सटीक अनुमान सम्भव नहीं है।
योग पारिजात को 1. राजयोग, 2. भाग्य योग, 3. धन योग, तथा 4. अनुपम योग से शीर्षांकित किया गया है जिसके अंतर्गत 850 प्रामाणिक, शास्त्रगर्भित तथा आचार्यानुमोदित ग्रहयोग, विविध व्यावहारिक जन्मांगों के उदाहरण सहित सन्निहित हैं। इसके अतिरिक्त सूर्य और चन्द्रमा से संदर्भित ग्रहयोग, केन्द्रत्रिकोण राजयोग, महापुरुष राजयोग, महाभाग्य योग, अखण्ड साम्राज्य योग, उच्चस्थ ग्रहकृत राजयोग, राशिकृत राजयोग, विपरीत राजयोग, नीचभंग तथा राजभंग ग्रहयोग, विपन्नता प्रदायक ग्रहयोग, नाभस योग, नवांश संदर्भित शुभ और अशुभ ग्रहयोग तथा नवांश चक्र पर आधारित राजयोग आदि शीर्षांकित विविध अध्यायों में संस्कृत के श्लोकों में वर्णित ग्रहयोगों को ज्योतिष शास्त्र के वैज्ञानिक धरातल पर परखकर तथा सहस्रों जातकों, जातिकाओं आदि के जन्मांगों पर क्रियान्वित करने के उपरान्त जिज्ञासु पाठकों के कल्याणार्थ योग पारिजात में सुरुचिपूर्ण स्वरूप में समायोजित किया गया है।₹450.00 -
सुरभित साधना सेतु
₹400.00सुरभित साधना सेतु समस्त भक्तजनों, सामान्य साधकों और गंभीर आराधकों के लिए अत्यन्त उपयोगी कृति है जिसमें अन्यान्य अभिलाषाओं, आकांक्षाओं, अपेक्षाओं और आशाओं के प्राशीष प्रसाद में रूपान्तरित होने हेतु विविध सुगम साधनाएँ तथा समस्याओं के समाधान के प्रमाणिक प्रावधान का समायोजन किया गया है। ऐसी अन्यान्य साधनाएँ, स्तोत्र, मंत्र एवं प्रयोग आदि हमें भारतीय परम्परा के अन्तर्गत ऋषि-महर्षियों और सिद्ध तपस्वियों द्वारा उपलब्ध हुए हैं, जिनके सविधि सतर्क संपादन से अभिलाषाओं और मनोकामनाओं की सम्पूर्ति होती है।
सुरभित साधना सेतु अभीष्ट संसिद्धि के संसुप्त संज्ञान की जागृति का अभिनव अनुसंधान है जिसमें अन्यान्य अवरोधों, विविध व्यथाओं तथा अप्रत्याशित अनिष्टों का शास्त्रसंगत समाधान सन्निहित है। जीवन जटिल समस्याओं का सिन्धु है। ऐसी अनेक समस्याओं के सरल, सुगम, सर्वसुलभ, सरस समाधान सुरभित साधना सेतु में संयोजित, संकलित एवं सम्पादित किए गए हैं, जिनका सतर्क अनुकरण समग्र समस्याओं के संत्रास को महकते मधुमास में रूपान्तरित करेगा, यही सदास्था है।
सुरभित साधना सेतु को पंद्रह विविध अध्यायों में विभाजित, व्याख्यायित किया गया है। इस कृति में अनेक दुर्लभ और अनुभूत सावताएँ आविष्ठित हैं जिनके सहज अनुक्रण से संदर्भित अभिलाषा की संसिद्धि के साथ-साथ समस्त व्याधियों, विपत्तियों, आपत्तियों, व्यथाओं, चिंताओं, संकटों, समस्याओं, आरोपों और दुर्दमनीय दारूण दुःखों की वेदना से साधक मुक्त हो जाता है। सुरभित साधना सेतु विविध विघट्न एवं विप्लवकारी विकृतियों, विसंगतियों, विषमताओं और विरोधी गतिविधियों के निराकरण का सर्वसुलभ, सरल समाधान है। सुरभित साधना सेतु मंत्रशास्त्र की उपादेयता से सम्बन्धित सशक्त, शास्त्रानुमोदित संरचना है जो पाठकों के लिए प्रमाणित, परीक्षित एवं प्रतीक्षित सामग्री के अभाव को सम्पुष्ट करने वाला, सशक्त सुरभित साधना सेतु है। ज्योतिष एवं मंत्र विज्ञान के दुर्लभ रहस्य के सम्यक् संज्ञान हेतु समस्त ज्योतिर्विद एवं मंत्र अध्येताओं को अध्ययन, अनुभव, अनुसंधान के निमित्त सुरभित साधना सेतु एक अद्वितीय एवं अमूल्य निधि है जो सभी के लिए पठनीय, अनुकरणीय और संग्रहणीय है।
₹500.00 -
गीता मंत्र गंगोत्री
₹290.00श्रीमद्भगवद्गीता को महाकाव्य महाभारत का प्राण स्वीकारा गया है जो धरतीवासियों के लिए प्रार्थना पथ नहीं, बल्कि अलौकिक प्रसादामृत और पंचामृत है जिसकी एक बूँद ही मानव का ब्रह्म में विलय करके उसे मोक्षगति प्रदान करके अमरत्व की ओर प्रशस्त करती है। श्रीमद्भगवदगीता की मंत्रशक्ति से प्रायः अधिकांश भक्तजन, साधक, आराधक, पाठक तथा जिज्ञासुगण अनभिज्ञ हैं जिसे प्रबुद्ध पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करना अपेक्षित है। गीता की मंत्रात्मक शक्ति एवं उसकी व्याख्या, गीता मंत्र गंगोत्री में सहज और सघन स्वरूप में सन्निहित है। गीता मंत्र गंगोत्री बारह अध्यायों में व्याख्यायित विभाजित है जिन्हें अग्रांकित नामों से शीर्षांकित किया गया है:
₹350.00








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