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प्रश्नज्योतिष के पाँच पुष्प
₹75.00पुस्तक के बारे में
“प्रश्न-ज्योतिष” के द्वारा मानवीय जिज्ञासाओं की शान्ति सम्भव है। जिन लोगों के जन्म के समय का ठीक ज्ञान नहीं है, उनके लिए प्रश्नकुण्डली अत्यावश्यक है। विद्वान लेखक ने अपनी इस लघु पुस्तक में भारतीय ज्योतिष के पाँच मूल ग्रन्थ क्रमशः वाराहमिहिर की रचना “दैवज्ञवल्लभा”, पृथुयशस् की रचना “षपंचाशिका”, पद्मप्रभुदेव विरचित “भुवन दीपक”, नलकंठ रचित “प्रश्न तंत्र”, तथा भयेसल रचित “आर्यासप्तति” को जो एक स्थान पर एकत्रित करके सरल तथा सुबोध हिन्दी भाषा में प्रस्तुत किया है वह ज्ञान-भण्डार की दृष्टि से स्वागत योग्य है। इसके पूर्व ऐसा शोधपूर्ण ऐतिहासिक ग्रन्थ इस विषय पर पहले किसी ने लिखने का प्रयास नहीं किया है। -
प्रारंभिक फलित ज्योतिष
₹250.00पुस्तक-सार
प्रत्येक जन्मकुंडली के ग्रह जातक के जीवन पर दो प्रकार का प्रभाव डालते हैं। उसमें एक होता है स्थायी और दूसरी सामयिक। जन्मकालिक ग्रहों का जातक के पारिवारिक-सामाजिक, उसकी शारीरिक बनावट, व्यक्तित्व, स्वभाव तथा संस्कारों से विशेष संबंध रहता है जबकि वही ग्रह अपने दशाकाल में जातक के जीवन में समय-समय पर उसके उत्थान-पतन, उन्नति-अवनति, स्वास्थ्य-रोग, हानि-लाभ, यश-अपयश, जीवन-मरण, आदि इष्ट-अनिष्ठ अव्यवस्थाओं को पैदा करने में सहायक या बाधक हो जाते हैं अथवा इनकी सूचना देते हैं। जीवन की इन्हीं अवस्थाओं को साधारण बोलचाल की भाषा में जातक के ‘अच्छे या बुरे दिन’ कहा जाता है। इन अच्छे या बुरे दिनों को जानने के लिए फलित ज्योतिष में अनेक पद्धतियाँ प्रचलित हैं जिनमें नक्षत्र, राशि, दशा, गोचर, तत्व आदि के आधार पर फलनिर्णय किए जाते हैं तथा घटना के सटीक रूप से घटित होने की अवधि निर्धारित की जाती है।
आपके समक्ष प्रस्तुत इस पुस्तक में फलित करने के सभी आवश्यक अवयवों का विस्तार से वर्णन किया गया है जिसका ज्ञान प्राप्त करना ज्योतिष के सभी शिक्षार्थियों के लिए आवश्यक है। यद्यपि कि इस पुस्तक के सभी आवश्यक अवयवों का सारगर्भित विश्लेषण दिया गया है फिर भी गंभीर फलादेश के दृष्टिकोण से शिक्षार्थियों को और भी विशद् सिद्धांतों एवं तकनीकों का अध्ययन करना पड़ेगा जो हमारी दूसरी पुस्तक ‘बृहत् फलित ज्योतिष’ में दी हुई है। इस पुस्तक को कुल 14 अध्यायों में विभाजित किया गया है जिसमें फलित के सभी आवश्यक सिद्धांत समाविष्ट हैं।
₹400.00 -
फलित सूत्रम्
₹250.00यह रचना उसकी है, जो सभी के मन में बैठकर अपने हजार हाथों से सभी कुछ तो करता है। ऐसा तो शायद कुछ भी नहीं जो उसकी रजामंदी के बिना संपन्न हो सके।
उस हजार हाथ वाले का धन्यवाद। इस जंजीर से जुड़े सभी जन उसकी कृपा से स्वास्थ्य, सम्मान व सुख पाएँ। अपने ठाकुर से बस यही प्रार्थना है।₹300.00 -
बुध दशाफल दीपिका”
₹350.00दशाफल दीपिका शीर्षांकित इस ग्रन्थ को हमने दस अध्यायों में व्याख्यायित, विश्लेषित और विवेचित करने की चेष्टा की है। “बुध दशाफल दीपिका” का प्रथम अध्याय बुध ग्रह : पौराणिक एवं वैज्ञानिक सत्य तथ्य पर केन्द्रित है। इस अध्याय में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि बुध ग्रह की वास्तविकता यह है कि वह नवग्रहों में सर्वाधिक लघु पिण्ड है परन्तु जन्मांग में बुध ग्रह की भूमिका की महिमा अनन्त है। बुध बुद्धि की क्षमता, बौद्धिक प्रखरता, तलस्पर्शी विवेचन, विश्लेषण, स्मरण शक्ति के स्थायित्व या निर्बलता के अतिरिक्त विश्व में
होने वाली समस्त शोध और अनुसंधानों के लिए उत्तरदायी ग्रह है। बुद्धि ही इस पृथ्वी को संचालित करती है और जन्मांग में बुध जितना प्रबल, विशुद्ध, पापरहित, शुभग्रहों से दृष्ट, शुभ ग्रहों की राशि, नवांश, नक्षत्र में संस्थिति और साथ ही साथ अपनी उच्च, स्वराशि या मूलत्रिकोण अथवा नवांश में स्थित होता है। जातक की बौद्धिक गरिमा उतनी ही अधिक प्रशंसित चर्चित होती है।₹430.00 -
बृहज्जातकम्
₹400.00ज्योतिष सत्य है और सत्य ही ज्योतिष है। इसके सिद्धांत इतने गहन और अचूक हैं कि ब्रह्मांडीय प्रक्रिया को समझने और सत्य के दर्शन को समझने में भ्रांतियों की संभावना नगण्य हो जाती है। आत्मा के पूर्व जन्म के व्यवहार का पता द्वादश भाव एवं उसके स्वामी के गुण-धर्म से लगाया जा सकता है जबकि नवम भाव आत्मा का भाग्यस्थान है, अवशिष्ट कार्मिक ऊर्जा हस्ताक्षरों के बारे में सभी आवश्यक जानकारी प्रदान करता है। इस प्रकार नियति एवं भाग्य और कुछ नहीं बल्कि केवल पिछली चीजों के कार्यों का परिणाम है। ज्योतिष हमें भविष्य को आकार देने के तरीके दिखाता है क्योंकि यदि पिछले जन्म के कर्मों का फल वर्तमान जन्म के भाग्य के रूप में उभर सकता है, तो वर्तमान कर्म निश्चित रूप से अगले जन्म के भाग्य को आकार देने में मदद कर सकते हैं। इस प्रकार, ज्योतिष कर्म में तपस्या और विचारों की शुद्धता पर जोर देता है ताकि जब तक आत्मा जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त न हो जाए, तब तक प्रत्येक क्रमिक जन्म में अनुकूलता और सौभाग्य के माध्यम से देवत्व के मार्ग पर तेजी से प्रगति की जा सके।
ज्योतिष में आत्मसात किए गए शाश्वत सत्य घटनाओं के रूप में प्रतिबिम्बित सार्वभौमिक घटनाओं के पीछे परम वास्तविक का एक आवरण आसानी से अनुभव किया जा सकता है। यह असीमित स्थान में समय की सीमाओं की भी व्याख्या करता है। असंख्य शताब्दियाँ बीत जाने के बाद भी, यह विज्ञान हर उम्र के लोगों को आध्यात्मिकता का अनुसरण करने के मार्गदर्शन के साथ-साथ उनकी व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान भी आश्चर्यजनक सटीकता और अत्यधिक लाभ के साथ देने में सक्षम है।
₹450.00 -
बृहत वैदिक अङ्क संहिताभाग -2
₹260.00अङ्कों के प्राचीन विज्ञान का उद्भव प्रागैतिहासिक काल में हुआ है। हमारे प्राचीन लोगों के साथ हिंदू ऋषि-महर्षि, प्रकृति के नियम की खोज करने वाले लोग सभी अङ्कों के महत्व से संबंधित विषयों के ज्ञाता थे। कैल्डियन, हिब्रू एवं मिस्रवासी अङ्क ज्योतिष का अभ्यास करते थे। ₹300.00 -
बृहत्पाराशर होराशास्थभाग-1
किताब के बारे में
यह कहना सुरक्षित है कि हिंदू ज्योतिष का जन्म ऋषियों के ऋषि पाराशर की शिक्षाओं के माध्यम से हुआ। ऋषि ने अपने शिष्य, प्रख्यात मैत्रेय को निर्देश देते हुए अपने दिव्य ज्ञान के माध्यम से अपने होरा शास्त्र में विभिन्न सिद्धांतों को स्थापित किया। बाद के सभी लेखकों आदि ने अपने कार्यों को संकलित करने से पहले ऋषियों के सिद्धांतों को अच्छी तरह से आत्मसात किया।
इस पुस्तक में कुछ मुख्य अंश इस प्रकार बताए गए हैं: राशियों के सोलह वर्ग, उनका उपयोग, राशियों के पहलू, शिशु की बुराइयाँ, 12 भावों के परिणाम, दीर्घायु, अन्य भावों में भाव स्वामियों की स्थिति के परिणाम। उपग्रहों के प्रभाव, पाद कारकांश, राजयोग, गरीबी पैदा करने वाले संयोजन, विभिन्न ग्रह अवस्थाओं के प्रभाव, चर दशा, सूक्ष्म दशा, नक्षत्र दशा, काल चक्र दशा आदि के विस्तृत प्रभाव। अष्टक वर्ग योजना, महिला कुंडली, खोई हुई कुंडली, ग्रहों की किरणें और विभिन्न कष्ट जैसे सूर्य प्रवेश, ग्रहण, मूल नक्षत्र आदि।
संक्षेप में कहें तो, यह पुस्तक भविष्यसूचक ज्योतिष के सभी आवश्यक बुनियादी सूत्रों और उन्नत सिद्धांतों से संबंधित है।
पाराशर होराशास्त्र
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बृहत्पाराशर होराशास्थभाग-2
₹80.00डॉ. मनोज कुमार
एम. ए. (इतिहास एवं लोक प्रशासन), पीएच. डी. ज्योतिषाचार्य (के.पी., पाराशरी एवं जैमिनी पद्धति) अंक ज्योतिषी (पाइथागोरियन, वैदिक एवं चीनीज पद्धति) वास्तु-फेंगशुई विशेषज्ञ एवं पास्ट लाइफ रिग्रेशन थेरेपिस्ट₹1,000.00 -
बृहस्पति दशा फलदीपिका
₹320.00महादशा में हम स्वबाहुबल द्वारा अपार धन, यश, कीर्ति, वैभव, समृद्धि, सम्मान, पद एवं प्रतिष्ठा अर्जित करेंगे।
समय व्यतीत होता चला गया और बृहस्पति की महादशा के 16 वर्ष भी व्यतीत हो गए तथा हम पूरी बृहस्पति की महादशा पर्यन्त भीख ही माँगते रहे। हमारे सामने आर्थिक विषमता की ऐसी-ऐसी स्थितियाँ आयीं कि हमें आठ-आठ दिन तक भोजन भी उपलब्ध नहीं हुआ। अत्यन्त विपन्नता ने हमारे आत्मविश्वास को झकझोर कर रख दिया। तब हमें ज्ञात हुआ कि बृहस्पति धन और समृद्धि नहीं प्रदान करता है। इन 16 वर्षों में हमने ज्योतिष शास्त्र का गहन अध्ययन किया और ज्योतिष शास्त्र की हिन्दी और अंग्रेजी की लगभग सभी पुस्तकों का मनन, चिन्तन किया, जो बाद में हमारे बहुत काम आया। हम इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि बृहस्पति धन नहीं, बल्कि ज्ञान देता है। बृहस्पति दशाफल दीपिका के अन्तर्गत हमने दशाफल अध्ययन हेतु जो शोध सिद्धान्त प्रस्तुत किए हैं, उनके अध्ययन और क्रियान्वयन से हमारे प्रबुद्ध पाठकगण ऐसे अन्यान्य तथ्यों को भलीभांति समझ सकेंगे।
₹400.00 -
भारतीय ज्योतिषऔर मौसम विज्ञान
₹140.00भारत कृषि प्रधान देश है। यहाँ की ऋतुओं में कृषि की दृष्टि से वर्षा ऋतु अधिक उपयोगी मानी जाती है। कब पानी बरसेगा, कब नहीं बरसेगा का ज्ञान होते रहने पर ही किसान कृषि कार्यों के सम्बन्ध में अधिक सतर्क रह सकते हैं। अन्य ऋतुओं के दैनन्दिन पर्यवेक्षण से आगामी वर्षा का अधिकांश ज्ञान सम्भव है। भारतीय आचार्यों ने ऋतु-सम्बन्धी वर्षा, वायु, मेघ और आकाशीय विद्युत आदि के विषय में अनुसन्धान करके अपने अनुभवों को लिपिबद्ध किया है, जो संस्कृत वाङ्मय में यत्र-तत्र मिलते हैं। बृहत् संहिता, मेघमाला और बृहदैवज्ञरंजन आदि ग्रन्थों में वह संग्रह रूप में भी उपलब्ध है। भारत की प्रत्येक भाषा में थोड़ी-बहुत ऋतु-सम्बन्धी कहावतें भी प्रचलित हैं। हिन्दी साहित्य में ऋतु-सम्बन्धी कहावतों के लिए घाघ, राउत और भड्डरी आदि का नाम विशेष उल्लेखनीय है। इनकी ऋतु-सम्बन्धी कहावतें बहुधा सत्य सिद्ध होती हैं।
‘भारतीय ज्योतिष और मौसम विज्ञान’ इन्होंने इस पुस्तक में अपने अनुसन्धानों और ऋतु-सम्बन्धी विवरणों का तुलनात्मक अध्ययन किया है और उपलब्ध प्राचीन साहित्य के आधार पर यह पुस्तक तैयार की है। इस पुस्तक में उद्धृत श्लोकों का हिन्दी अनुवाद क्रमशः पुस्तक के अन्त में दिया गया है जिससे कि पाठकों को सुविधा हो। यह छोटा-सा ग्रन्थ, आशा है, हिन्दी के पाठकों को रुचिकर और उपयोगी प्रतीत होगा।
₹150.00 -
भाव भावेश फल विचार
₹60.00इस पुस्तक में ग्रहों का विभिन्न भावों में स्थित होने का फल दिया गया है, जिसका ज्ञान किसी अन्य ज्योतिष ग्रन्थ में अप्राप्य है। भावफल और दशाफल विस्तृत रूप से दिया गया है। यह भी बताया गया है कि एक भावाधिपति का द्वादश भावों में स्थित होने से क्या फल होता है। इस प्रकार 144 (12×12) योगों के फलों का पूर्ण विवरण दिया गया है। दशाफल के विचार को इतना अधिक महत्व दिया गया है कि लगभग आधी पुस्तक इसी सम्बन्ध में है। इतनी सूक्ष्मता और विस्तृत रूप से इस विषय पर किसी अन्य ज्योतिष ग्रन्थ में विचार नहीं किया गया है। इस पुस्तक में ग्रहों के नवांशों, भावों, राशियों आदि में स्थित होने से जो फल होते हैं उनके विश्लेषणात्मक फलादेश करने का अनूठा तरीका बताया गया है। इस कारण यह पुस्तक ज्योतिष में नवीन प्रविष्ट पाठकों व ज्योतिष के धुरन्धर विद्वानों, दोनों के लिए अत्यन्त उपयोगी और ज्ञानवर्द्धक सिद्ध होगी।
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भावार्थ रत्नाकर
₹160.00नई शताब्दी के आरम्भ में मेरा सम्पर्क ज्योतिष शोध मंडल के सदस्यों से हुआ। बातचीत के दौरान भावार्थ रत्नाकर व उसके महत्व पर भी चर्चा हुई। वर्ष 2006 में लगभग 8 माह तक इस श्रेष्ठ कृति का अध्ययन व अध्यापन चला।
आदरणीय डॉ. बी.वी. रमण ने अंग्रेज़ी में, तो श्री जगन्नाथ भसीन ने हिन्दी में इस ग्रन्थ पर टीका लिखी है। श्री गोपेश कुमार ओझा ने अपनी फलदीपिका में भावार्थ रत्नाकर के योगों₹200.00 -
भृगु नवनीतम्(भृगु सूत्र तथा भृगु संहिता पर आधारित)
₹80.00पुस्तक परिचय
भृगु के नाम पर ऐसी भी पुस्तकें प्रकाशित हो रही है जिनका भृगुकालीन होना संदेहास्पद है। ‘भृगु-नवनीतम’ तथा ‘भृगु-सूत्रम्’ तथा ‘भृगु-संहितोक्त श्लोको’ को ही सम्मिलित किया है क्योंकि हजारों वर्षों से श्रुति-स्मृति के माध्यम से इन्हीं दोनों का देशव्यापी प्रचार होता रहा है। संस्कृत के सूत्रों तथा श्लोकों की बोधगम्य व्याख्या पाठकों को उल्लसित करेगी। देश-काल-पात्र-परिवर्तन के आलोक में लेखक ने सूत्रों तथा श्लोकों के सन्दर्भ में जो नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है उससे पाठक लाभन्वित होंगे। पुस्तक उपयोगी तथा स्वागत-योग्य है। -
मंगल दशा फलदीपिका
₹450.00अनादिकाल से मंगल ग्रह का रक्ताभ सौन्दर्य नवविवाहित दम्पत्तियों के लिए जिज्ञासा और कौतूहल का परम्परागत स्तम्भ रहा है। विवाह के परिपेक्ष्य में जन्मांग में मंगल की अप्रिय स्थिति वर-वधू के अभिभावकों को प्रकम्पित कर देती है। प्रायः मंगल को एक विध्वंसात्मक ग्रह के रूप में स्वीकार किया जाता है परन्तु मंगल दशाफल दीपिका का निहितार्थ इस आस्था को मिथ्या सिद्ध कर देने हेतु चेतना की जागृति का एक परिश्रमसाध्य अनुष्ठान है। मंगल दशाफल दीपिका में सन्निहित, संकलित, संयोजित सामग्री मंगल की दशान्तर्दशा के फलकथन के सन्दर्भ में अत्यधिक महत्वपूर्ण, उपयोगी, अद्भुत और अनुभूत है। प्रतिकूल मंगल की दशा का अत्यन्त अल्पज्ञता और अज्ञानतापूर्ण संज्ञान, दुर्घटना, कलह, आक्रमण, अपराध, अपहरण, आन्दोलन, अग्निकाण्ड, हिंसा, हत्या, दुर्भिक्ष, अतिऊष्मा, पराजय, सूखा, रक्तविकार, शल्यक्रिया, ट्यूमर, पेप्टिक अल्सर, असंतुलित रक्तचाप, विविध व्याधि, युद्ध आदि के रूप में प्रचलित है जबकि अनुकूल मंगल की स्थिति अन्तरंग आनन्द व प्रेम सम्बन्ध, आत्मीयता, प्रसिद्धि, धनधान्य, ऐश्वर्य, कीर्ति, वैभव, सम्पत्ति, सम्पदा, समृद्धि, सम्मान, शासन-प्रशासन, सत्ता, राज्य प्राप्ति, अधिकार प्राप्ति एवं विजय, पराक्रम, पदोन्नति, पद-प्रतिष्ठा, प्रगति, उन्नति, साहस, निर्भीकता, भूमि, भूखण्ड, भवन के अतिरिक्त हर्षोल्लास, उमंग, उत्साह, ऊर्जा का अभिनव अभियान है।
मंगल दशाफल दीपिका को अग्रांकित 19 सुगम, सरल, सारगर्भित, सार्वभौमिक व सारस्वत अध्यायों तथा 600 पृष्ठों में अन्यान्य व्यावहारिक जन्मांगों के उदाहरण के साथ विभाजित, व्याख्यायित एवं विश्लेषित किया गया है: 1. मंगल ग्रहः पौराणिक एवं वैज्ञानिक सत्य तथ्य; 2. दशाफल कथन रहस्य एवं सिद्धान्तः 3. बारह राशियों में मंगल की दशा का फल; 4. मंगल की महादशा का फल; अध्याय 5 से 16 तक विविध भावगत मंगल की दशान्तर्दशा का फल; 17. मंगल की महादशा में विविध ग्रहों की अन्तर्दशा का फल 18. मंगल की महादशा के मध्य प्रत्यंतर दशाओं का फल, तथा 19. मंगल ग्रहकृत पीड़ा परिहार विधान।
विंशोत्तरी दशा पर केन्द्रित मंगल दशाफल दीपिका इस श्रृंखला का हीरक हस्ताक्षर है जिसके अध्ययन, अनुभव, अनुसरण और अभ्यास से मंगल ग्रह के दशान्तर्दशा के सन्दर्भ में समस्त भय, भ्रम एवं भ्रांतियाँ ध्वस्त हो जायेंगी और हमारे प्रबुद्ध पाठकों, जिज्ञासु छात्रों, गम्भीर अध्येताओं, भक्तों एवं साधकों को मंगल ग्रह के संदर्भ में अभिनव अभिज्ञान के साथ-साथ मंगल ग्रहकृत पीड़ा परिहार विधान अत्यन्त सम्पुष्ट साकार-आकार में मंगल दशाफल दीपिका के अन्तर्गत एक ही स्थल पर उपलब्ध व सम्भव हो सकेगा।
₹550.00 -
मंत्र मंदाकिनी
₹320.00मंत्र मंदाकिनी में समस्त सामान्य समस्याओं के सुगम समाधान का शास्त्रसंगत उल्लेख किया गया है जिसमें शताधिक मंत्रों में से, स्वयं के लिए अनुकूल मंत्र चयन की दुष्कर प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती। प्रत्येक अभीष्ट की संसिद्धि हेतु पूर्ण परिहार प्रदान करने हेतु पृथक् पृथक् परामर्श प्रपत्र का प्रबल पथ मंत्र मंदाकिनी में प्रस्तुत किया गया है। ये सभी परिहार, अनुष्ठान अथवा प्रयोग दीर्घकाल से लेखकद्वय द्वारा परीक्षित हैं तथा सहस्राधिक अवसरों पर अभिशंसित, प्रशंसित और चर्चित हुए हैं जिनसे प्राप्त परिणाम के प्रमाण और परिमाण से साधक व पाठकगण निरन्तर प्रेरित, आनन्दित, आह्ह्लादित, हर्षित और उल्लसित हुए हैं।
मंदाकिनी मंत्र के 19 अध्यायों में विभाजित है जिसमें मंत्र शक्ति के अद्भुत प्रभाव का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया गया है-1. मंत्रः वैज्ञानिक व्याख्या; 2. मंत्र विज्ञानः विविध विभाग, 3. ग्रह शांतिः 4. विवाहसंबंधी समस्याएं एवं समाधान; 5. संतति सुखः परिहार परिज्ञान; 6. निकृष्ट ग्रह योग कृत निषेध शमन, 7. प्रचुर धनप्राप्ति अनुभूत साधनाएँ: 8. शत्रु शमन तथा प्रतिद्वंदी शमन; 9. व्याधि शमनः स्वास्थ्यवर्धन; 10. परीक्षा और प्रतियोगिता में सर्वोच्च सफलता; 11. सभी दोस्तों को निर्मूल मन की संस्तुति; 12. इलेक्ट्रोइलेक्ट्रॉनिक वृत्तान्तः 13. विस्तृत व्रतविधान; 14. दान अनुष्ठानः श्रेष्ठ परिहार प्रार्थनाएँ: 15. श्रीदुर्गासप्तशती सन्निहित उपासनाएँ: अभीष्ट संसिद्धि साधनाएँ: 16. अन्यान्य प्रार्थनाओं के समाधान जिज्ञासा एवं सुगमता साकेतिक साधनाएँ: 17. सुखद दाम्पत्य उपासना उपासना साकेतिक साधनाएँ: 18. मानस मंत्र साधना; 19. षट्कर्म प्रयोग। ज्योतिष एवं मंत्र विज्ञान के गूढ़ रहस्य सभी ज्योतिष प्रेमी एवं मंत्र अध्येताओं के अध्ययन एवं अनुसंधान के निमित्त मंत्र मंदाकिनी एक अमूल्य निधि है।
₹400.00 -
मान सागरी
₹240.00ज्योतिष शास्त्र का यह प्राचीन ग्रन्थ ‘मानसागर’ के नाम से रचा गया था, किन्तु बाद में इसकी पद्धति की विशेषता के कारण ‘मानसागरी’ नाम दिया गया और तब यह ग्रन्थ अपनी पद्धति विशेष के अनुरूप ‘मानसागरी’ नाम से ही प्रसिद्ध हो गया। वस्तुतः इसमें वर्णित पद्धति के अनुसार किया गया गणित अधिक यथार्थ फलितार्थ उपस्थित करने में समर्थ है। यही कारण है कि आज भी इस ग्रन्थ का उतना ही मान है, जितना पूर्वाचार्यों के समय में था। विशेषकर जाने माने प्रबुद्ध ज्योतिषाचार्य तो इसी ग्रन्थ को अधिक मान्य सनझते है।
कुछ विद्वानों का मत है कि यह ग्रन्थ बहुत प्राचीन है, किन्तु कुछ विद्वान् इसे १६वीं शती की रचना मानते हैं। एक वृद्ध ज्योतिषाचार्य के पास ‘मानसागर की हस्तलिपि देखी थी, उसमें भी यह सभी श्लोक पाये गये जो इस ग्रन्थ में उपलब्ध हैं। वस्तुतः यवनकाल में बहुत बड़ी संख्या में भारतीय कला, संस्कृति, धर्म, अध्यात्मशास्त्र, ज्योतिष शास्त्र आदि के ग्रन्थ जलाकर भस्म कर दिये गये तो भी कुछ विद्वानों ने थाती के रूप में अनेक संग्रह अपने पास रख छोड़े थे। बहुतों ने संग्रह न होते हुए भी अनेक विषय कण्ठस्थ किये हुए थे। आज भी ऐसे अनेक विद्वान् मिल जायेंगे, जिनकी स्मरण शक्ति बहुत तीव्र है और जिन्होंने अपनी रुचि के अनुसार विभिन्न श्लोकों को कण्ठस्थ किया हुआ है।
₹300.00 -
मुहूर्त मीमांसा
₹260.00जिस समय सभी ग्रह नक्षत्र शुभ फलदायक दशा में होते हैं उस समय को शुभ मुहूर्त कहते हैं। ग्रह नक्षत्र की शुभ चाल में नए या माङ्गलिक कार्य को सम्पन्न करना शुभमुहूर्त में कार्य संपन्न करना कहलाता है। माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में कार्य करने से शुभ फल मिलते हैं, काम सफल होता है और उसमें कोई रुकावट नहीं आती है। प्राचीन काल से ही हिंदू धर्म में मुहूर्त को महत्व दिया जाता रहा है। मुहूर्त को लेकर किए गए कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि, ग्रह और नक्षत्रों की स्थिति की गणना करके ही मुहूर्त का निर्धारण किया जाता है। हिंदू समाज में लोग आज भी माङ्गलिक कार्यों के सफलतापूर्वक संपन्न होने की कामना के लिए शुभ घड़ी का इंतजार करते हैं। इसके अलावा हर महत्वपूर्ण और शुभ कार्य के दौरान यज्ञ और हवन करने की परंपरा है। भारतीय संस्कृति के षोडश संस्कारों में मुहूर्त के विषय में मुहूर्त शास्त्र में पृथक रूप से वर्णन प्राप्त होता है जिसमें यह बताया गया है कि तिथि, वार, नक्षत्र आदि के संयोग से भी मुहूर्त बनते हैं, जिनमें संस्कार एवं विशिष्ट कार्यों के अतिरिक्त अन्य कार्य भी किये जा सकते हैं।
प्रस्तुत पुस्तक 12 अध्यायों में विभाजित है जिसमें वैदिक वाङ्गमय के सभी महत्वपूर्ण संस्कारों से सम्बन्धित मुहूर्तों के चयन हेतु सभी विशिष्ट अवयवों एवं मुहूर्त के विभिन्न घटकों की विस्तार से चर्चा की गयी है। ज्योतिष के शिक्षार्थियों को मुहूर्त विषय सन्दर्भ सीखने, उनके आधार पर सभी आवश्यक मुहूर्तों की गणना करने एवं उनके आधार पर संस्कारों को सम्पादित करने में महती सहायता मिलेगी। आशा है कि यह पुस्तक ज्योतिष विषय के जिज्ञासुओं के लिए मील का पत्थर साबित होगी
₹300.00 -
मुहूर्त विचार
₹35.00इस ‘मुहूर्त विचार’ में ‘मुहूर्तचिन्तामणि’, ‘शीघ्र बोध’, ‘बालबोध’, ‘मुहूर्त पारिजात’ आदि से लेकर सरल भाषा में लिखने का प्रयास किया गया है। अशुद्धि/कमी को विद्वान महानुभाव अपने बहुमूल्य विचारों द्वारा आशीर्वाद के रूप में अवगत कराकर कृतार्थ करेंगे।
मुहूर्त लिखने की प्रेरणा (ICAS) भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद के विद्वानों के शुभाशीर्वाद से मिली। मैं विशेष रूप से दिल्ली चेप्टर-1 के सभी विद्वानों का आभार प्रकट कर संस्था के संस्थापक स्वर्गीय रमन जी के चरणों में इसे समर्पित करता हूँ।
₹40.00 -
मेदिनी ज्योतिष
₹320.00समय का ज्ञान, काल-चिन्तन ही ज्योतिष का कार्य क्षेत्र है। अच्छे समय में दूसरों की सेवा, सहायता करो, दानी व परापकारी बनो। बुरे समय में धैर्य मत छोडो, अधीर या निराश मत बनो। क्योंकि अच्छा व बुरा वक्त सभी के जीवन में आता-जाता है।
ज्योतिष अवसर को पहचानने की सशक्त विधा है। अवसर पहचान कर किया गया कार्य सुख व सफलता देता है। शायद यही ज्योतिष का उपयोग है।₹400.00 -
योग पारिजातअनुपम योग
₹360.00टी.पी. त्रिवेदी
श्रीमती मृदुला त्रिवेदीयोग पारिजात में समस्त प्रसिद्ध, प्रतिष्ठित, प्रशंसित, प्राचीन ज्योतिष शास्त्र के प्रमाणित शास्त्रीय ग्रन्थों के मनन, मन्धन और चिन्तन के अथक प्रयास, परिश्रमसाध्य साधना के उपरान्त विविध विशिष्ट ग्रहयोगों को व्यावहारिक जन्मांगों के निकष पर परख कर, उनका स्पष्ट सतर्क श्रृंखलाबद्ध चयन और संकलन करके प्रबुद्ध पाठकों को अनादिकाल से चली आ रही जिज्ञासा का सम्यक्, संपुष्ट, सारगर्भित, सार्वभौमिक, सर्वजनहितार्थ समाधान से संदर्भित ग्रहयोगों से सम्बन्धित तथा व्यक्ति के व्यवसाय, व्यस्तता, विलासिता की उपलब्धता, प्रभुता, अधिकारों की समग्रता, ऐश्वर्य, कीर्ति, वैभव, सम्पत्ति, समृद्धि, सत्ता, सम्पदा, सौभाग्य के अतिरिक्त सिंहासन तथा राज्य प्राप्ति के अन्यान्य योगों के साथ-साथ विपन्नता, दरिद्रता, चिन्ता, विपत्ति, विनाश, विफलता, विकृति, व्यवधान, अवरोध, अनैतिकता, दुर्भाग्य, दुर्दमनीय दारुण दुखों की व्यथा, धनहानि, आस्था तथा विश्वास की निर्बलता, धूर्तता, दैहिक सबलता तथा पुष्टता से सम्बन्धित सभी ग्रहयोगों तथा पाठकों की जिज्ञासा का तर्कसंगत विवेचन, विवरण, व्यावहारिक विश्लेषण सहित प्रत्युत्तर सन्निहित, समाहित व समायोजित है।
किसी भी जन्मांग से सम्बन्धित भविष्य के आकलन हेतु ग्रहयोगों का विस्तृत, सारगर्भित, सारस्वत व तलस्पर्शी अध्ययन, अनुभव, अभ्यास और अनुसंधान का महत्व सर्वोपरि है जिसके अभाव में जातक की प्रभुता, सत्ता, संपदा, समृद्धि तथा प्रशासन आदि से संदर्भित सटीक अनुमान सम्भव नहीं है।
योग पारिजात को 1. राजयोग, 2. भाग्य योग, 3. धन योग, तथा 4. अनुपम योग से शीर्षांकित किया गया है जिसके अंतर्गत 850 प्रामाणिक, शास्त्रगर्भित तथा आचार्यानुमोदित ग्रहयोग, विविध व्यावहारिक जन्मांगों के उदाहरण सहित सन्निहित हैं। इसके अतिरिक्त सूर्य और चन्द्रमा से संदर्भित ग्रहयोग, केन्द्रत्रिकोण राजयोग, महापुरुष राजयोग, महाभाग्य योग, अखण्ड साम्राज्य योग, उच्चस्थ ग्रहकृत राजयोग, राशिकृत राजयोग, विपरीत राजयोग, नीचभंग तथा राजभंग ग्रहयोग, विपन्नता प्रदायक ग्रहयोग, नाभस योग, नवांश संदर्भित शुभ और अशुभ ग्रहयोग तथा नवांश चक्र पर आधारित राजयोग आदि शीर्षांकित विविध अध्यायों में संस्कृत के श्लोकों में वर्णित ग्रहयोगों को ज्योतिष शास्त्र के वैज्ञानिक धरातल पर परखकर तथा सहस्रों जातकों, जातिकाओं आदि के जन्मांगों पर क्रियान्वित करने के उपरान्त जिज्ञासु पाठकों के कल्याणार्थ योग पारिजात में सुरुचिपूर्ण स्वरूप में समायोजित किया गया है।₹450.00



















