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Secrets of Vaastu Vol. II
₹230.00
Vastu Shastra is an ancient Vidya of structure, which taught the users the art of harmo-nious living with the nature’s field of energy (Jal, Prithvi, Agni, Vayu and Akash). The energies generated by the great elements of Panch Bhootas follow the straight path and the experience of feeling the energy reflection depends upon the shape of the object i e. the Plot On physical level dimension is a measurement of length, breadth and height /depth in con-ventional design. Dimension lines are used to scale and preparation design elements prop-erly
The square is the best shape and thereafter the rectangular with certain restriction on the dimensions. It is not that the other shapes of the plot or the building are unfit for the use or the west or the south directions will bring hardships. The shapes are largely link to generation of energy field. The irregular shapes like triangle, pentagon, circular, etc. will create imbalance in the creation and dispersal of energies. Having a square or rectangular plot/building without proportion to length, breadth and height will be of no use, it is as bad as any other profile because such plot will not generate the adequate energies or vibrations. The volume of space generated and material consumed must be in harmony with the plot/building dimensions. From design perspective if the diinension of the bed/sofa are greater than the dimension of the space, the bed/sofa is too big. The condition is obviously out of balance and may cause much dimensional problems. When an individual is comfortable at physical & emotional level then & then only the spiritual aspects of the individual can be awakened & explored. The more conscious you are about the spiritual aspects of yourself, the greater the experience on the other level. Even without spiritual consciousness when you enhance the energy of a space your sub-conscious mind still recognizes the benefit. Therefore the dimension at physical plain suggest many layers of experience we human beings have like all rounder, self satisfied personality, etc.
₹250.00 -
अध्यात्म ज्योतिष भाग 2
₹240.00इस पुस्तक का उद्देश्य मात्र इतना भर कहना है, कि नीच व हीन बली शुभग्रह भले ही लौकिक सुविधाओं के लिए अशुभ या अनिष्टकर जान पड़ें, किन्तु साधन मार्ग पर आगे बढ़ाकर संत या सिद्ध बनने में उपयोगी होते हैं। मनुष्य को तमोगुणी प्रवृत्ति का त्याग, रजोगुणी स्वभाव का नियमन/नियंत्रण तो सात्विक स्वभाव को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। सत्य, अहिंसा, अस्तेय धर्म के सिद्धान्त निश्चय ही व्यक्ति व समाज की प्रगति व समृद्धि के लिए आवश्यक हैं।
₹300.00 -
अनिष्ट ग्रह उपचार
₹300.00ज्योतिष में अनिष्ट से रक्षा
ज्योतिष में उपाय पक्ष की उपयोगिता के पाँच उदाहरण
ज्योतिषीय उपचार के सिद्धांत
अनिष्ट ग्रह का उपचार और वैदिक मंत्र₹350.00 -
अष्टाध्यायी
₹130.00भारतीय ज्योतिष का संक्षिप्पो इतिहास, भगवान श्रीराम से लेकर मनमोहन सिंह तक तेईस राजप्रमुखों की जन्मकुंडलियों की विवेचना, कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों के दुःखद अंत की परम्परा का रहस्य, साथ ही न्यायाधीशों-उद्योगपतियों तथा ब्यूरोक्रेट्स की जन्मकुंडलियों की विवेचना से परिपूर्ण यह पुस्तक धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष- इन चार वैदिक त्रिकोणों पर आधारित भारतीय ज्योतिष का पुनर्मूल्यांकन तथा समाधान भी प्रस्तुत करती है। लेखक ने वैदिक त्रिकोणों के आधार पर रत्नों के चुनाव तथा ग्रहों की शांति के अकाट्य उपाय बताये हैं जो इस पुस्तक की अनुपम उपलब्धि है। भाग्यशाली रत्नों के चुनाव तथा अरिष्ट निवारक ज्योतिषीय उपायों की पृथक् से चर्चा सम्मिलित कर इस पुस्तक को और भी उपयोगी बना दिया गया है। ‘प्रश्नमार्ग’ के सुझावों तथा ‘कालसर्प योग की शांति’ को पाठकों के विशेष आग्रह पर शामिल किया गया है। आठ अध्यायों की यह लघु पुस्तक ज्योतिष के विभिन्न अंगों-यथा इतिहास, वैदिक त्रिकोणों के आलोक में ज्योतिष का पुनर्मूल्यांकन, उपचारीय ज्योतिष, मेडिकल ऐस्ट्रोलौजी तथा वोकेशनल ऐस्ट्रोलौजी की दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण तथा उपयोगी पुस्तक है।
₹150.00 -
आजीविका विचार ज्योतिष के झरोखे से भाग-2
₹310.00यह पुस्तक ज्योतिषियों के लिए ही नहीं वरन व्यावसायिक सलाहकारों तथा मानवीय संसाधनों के नियोजकों के लिए भी अत्यंत उपयोगी लगती है। क्योंकि, विद्वान लेखक ने इस पुस्तक में व्यवसाय संबंधी ज्योतिष के लगभग सभी नियमों का श्रेष्ठ संकलन कि ₹350.00 -
आजीविका विचारज्योतिष के झरोखे सेभाग-1
₹300.00यह पुस्तक ज्योतिषियों के लिए ही नहीं वरन व्यावसायिक सलाहकारों तथा मानवीय संसाधनों के नियोजकों के लिए भी अत्यंत उपयोगी लगती है। क्योंकि, विद्वान लेखक ने इस पुस्तक में व्यवसाय संबंधी ज्योतिष के लगभग सभी नियमों का श्रेष्ठ संकलन कि
₹350.00 -
आयु निर्णय शोध सिद्धांत एवं प्रयोग
₹130.00जातक के जन्मांग पर नाना प्रकार के राजयोग-धनयोग आदि पर विचार करने से पूर्व प्रत्येक ज्योतिषी को सर्वप्रथम जातक की आयु पर विचार करना चाहिये। यदि जातक को आयु ही प्राप्त न हो, तो ज्योर्तिविद के फलादेशों का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। इसके अतिरिक्त उसकी प्रतिष्ठा भी दाँव पर लग जाती है। आयु जैसे दुरूह विषय में परांगत होना अत्याधिक दुष्कर कार्य है तथा प्राचीन विद्वानों, ऋषि-मुनियों द्वारा ज्योतिष में किए गए कार्य सर्वप्रथम तो पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं है, जो उपलब्ध हैं भी उनमें विभिन्न प्रकार का मत-मतान्तर देखने को मिलता है। जिसका एक कारण तो अनुवाद की त्रुटि है, दूसरा कारण उपलब्ध साहित्य की अपूर्णता। प्राप्त ग्रन्थों में आयु-निर्णय की अनेक गणितीय तथा अन्य विधियाँ दी गई हैं। यथा – अंशायु, पिण्डायु, निर्सगायु, अष्टकवर्गायु, योगायु तथा जैमिनी पद्धिति से आयु निर्धारण आदि का वर्णन मिलता है।
उक्त सभी पद्धतियों से जैमिनी ऋषि का PAM (पाम) सिद्धान्त तथा महर्षि पाराशर के योगायु के सिद्धान्तों को परस्पर समावेश कर आयु के निकटतम स्थूल बिन्दु को प्राप्त किया जा सकता है, चूंकि यह बहुत ही गूढ़ विषय है अतः इस कलिकाल की अल्पायु में इसे पूरी तरह समझ पाना असंभव नहीं तो मुश्किल अवश्य है।
यद्यपि जैमिनी ऋषि के सिद्धान्त अपने आप में परिपूर्ण और सत्यता के अत्याधिक निकट माने जाते हैं। परन्तु, उनके सिद्धान्तों को सरलीकृत कर समझने के लिये ऋषि ज्योतिषी योगी के०एन० राव जी जैसी दिव्यात्माओं की आवश्यकता है। अन्यथा जैमिनी ज्योतिष की उपलब्ध भाषा टीकाओं के मत-मतान्तर रूपी मकड़ाजाल में एक जिज्ञासु ज्योतिष उलझकर रह जाएगा।
₹150.00 -
आयुष्य विचार
₹210.00आयुष्य विचार या आयुर्दाय मनुष्य की जीवन अवधि को जानने की रोचक विधि है। भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद द्वारा आयोजित ज्योतिष विशारद के प्रश्न पत्र-III का यह प्रथम भाग है।
₹250.00 -
उत्तर कालामृत
₹310.00कवि कालिदास के उत्तर कालामृत पर आदरणीय वी. सुब्रह्मण्यम शास्त्री और श्री पी.एस. शास्त्री की टीकाएँ अंग्रेजी भाषा में तथा श्री जगन्नाथ भसीन की टीका हिन्दी भाषा में उपलब्ध है।
कदाचित् इस पर नई टीका की आवश्यकता नहीं थी किन्तु इस अचरजपूर्ण ग्रन्थ को पढ़ने पर लगा कि शायद कहीं कुछ छूट गया है। उसे पूरा करने का यह छोटा सा प्रयास है।₹350.00 -
उद्यम उन्नति
₹400.00ग्रन्थ-परिचय
यदि जीवन का लक्ष्य उन्नति है तो व्यक्ति का उद्यम ही यथार्थ है। उद्यम के अभाव से उन्नति एवं प्रगति संभव नहीं होती और वह दिशाषिहीन जीवन को जन्म देती है। उद्यम पूर्व उन्नति का संयुक्त पर्याय है आजीविका अथवा व्यवसाय। व्यवसाय की महत्ता तथा समय की सत्ता के मध्य निर्मित होने वाले समीकरण का सुगम समाधान है, व्यवसाय पक्ष पर केन्द्रित यह अद्भुत कृति उद्यम एवं उन्नति। खेद का विषय है कि ज्योतिष शास्त्र के विविध पक्षों से सम्बन्धित स्तरीय सामग्री और समृद्ध साहित्य का हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में अभाव है। लगभग समस्त शास्त्रीय ज्योतिष ग्रन्थों में व्यवसाय पक्ष पर अत्यन्त अल्प सामग्री ही उपलब्ध है। व्यवसाय पक्ष पर आधारित सभी शोध कार्यों का अध्ययन अनिवार्य है जो भारतवर्ष की बहुचर्चित अंग्रेजी पत्रिका ‘द एस्ट्रोलॉजिकल मैगजीन’ में अनेक अनुसंधानकर्ताओं द्वारा पूर्व लगभग 70 वर्षों से ज्योतिष विद्या के उत्तरोत्तर उत्थान हेतु प्रस्तुत किया जाता रहा है।
जातक के व्यवसाय के सटीक संज्ञान हेतु दशम भाव के साथ-साथ द्वितीय भाव का भी विश्लेषण सम्यक रूप से किया जाना चाहिए। प्रत्येक नौकरी या व्यापार के लिए पृथक-पृथक् ग्रह स्थितियों, कारकों, भावों और भावाधिपतियों की विशिष्ट स्थितियों का अध्ययन अपेक्षित है।
महाकाय, महाकाल, तिमिराकार शनि ग्रह को दुर्दमनीय दारुण दुःखों व दुःखों के संत्रास और विविध व्यथाओं का पर्याय आऔर प्रदाता स्वीकारा जाता है। इस कृति में जन्मांग में विद्यमान शनि की स्थिति के आधार पर उपयुक्त व्यवसाय, व्यापार अथवा नौकरी की दिशा का सटीक अनुमान करने की प्रामाणिक शोध प्रस्तुत की गई है। जहाँ एक एक ओर 3 सभी को प्रकंपित और भयमीत करने वाला शनि जातक को सतह से उठाकर शिखर तक पहुँचाने के अद्भुत सामर्थ्य से अभिसिंचित है, वहीं दूसरी ओर शनि की साढ़ेसाती और ढड्या, कब अनुकूल और प्रतिकूल फल प्रदान करती है, इसका भी सम्यक् संज्ञान आवश्यक है जो इस कृति में विविध व्यावहारिक उदाहरणों एवं प्रसंगों के माध्यम से आविष्ठित है।
उद्यम एवं उन्नति नामक इस कृति को विविध 10 अध्यायों में विभाजित और व्याख्यायित किया गया है। व्यवसाय पक्ष के विविध संताप से ग्रस्त मानव की पीड़ा का सनाधान प्रस्तुत करने के प्रयोजन से इस कृति में उपयुक्त परिहार को भी स्थान प्रदान किया गया है। परिहार के सविधि अनुसरण से नौकरी, व्यापार, अवनति, हानि, निलम्बन आदि समस्त संत्रास को मधुरिम मुस्कान के मधुमास में रूपांतरित करना संभव है। यह शोध प्रबन्ध समस्त ज्योतिष प्रेमियों, जिज्ञासु पाठकों, प्रबुद्ध छात्रों एवं श्रेष्ठ ज्योतिर्विदों द्वारा पठनीय, अनुकरणीय एवं संग्रहणीय है।
₹500.00 -
कालचक्र दशा से फलित
₹70.00पुस्तक के बारे में
वर्तमान समय में जो पुस्तकें कालचक्र दशा में सम्बन्धित है, उनमें ऐसे ही उदाहरणों को रखा गया है जिसमें देहादि संज्ञक राशि या उनके स्वामी पीड़ित हैं। जबकि उन पुस्तकों में ऐसे उदाहरणों को भी रखा जाना चाहिए था जिनमें देहादि संज्ञक राशि दशा में मृत्यु नहीं हुई हो, परन्तु शास्त्रीय सिद्धान्त लागू होते हों, ताकि विद्यार्थीगण दोनों स्थितियों से भिज्ञ हो जाते।
कुछ उदाहरणों में मृत्यु दशा ही गलत लगा रखी है।
कुछ उहाहरणों में प्रथम चक्र की देहादि संज्ञक राशि दशा में मृत्यु होना दर्शाया गया है जबकि जातक द्वितीय चक्र की दशा राशि में मृत्यु को प्राप्त हुआ है।
अन्तर्दशा गणना हेतु परमायु वर्षों के महत्त्व को नहीं बताया गया है।
₹80.00 -
कालसर्पयोग
₹70.00लेखक की चाह
हो सकता है कि कालसर्प योग पर बाज़ार में अन्य अनेक पुस्तकें विज्ञ पाठकों के लिए उपलब्ध हों। परन्तु कुछ लेखक कालसर्प योग के द्वारा पाठकों में भय या घम उत्पन्न करना चाहते हैं, तो कुछ लेखक कालसर्प योग को केवल अन्य ज्योतिष योगों की भान्ति योग मानकर चलना चाहते हैं। परन्तु अनुभव में आया है कि वास्तविक स्थिति कुछ और ही है। यह भी मांगलिक दोष, विष कन्या या गोचर की साढ़ेसाती की भान्ति जातक के जीवन के कुछ तथ्यों की ओर संकेत करता है। कुछ जातकों के लिए कालसर्प दोष वरदान हे तो कुछ के लिए अभिशाप। मैंने कालसर्प का इसी दृष्टि से अध्ययन किया है कि कालसर्प किनके लिए वरदान है तथा किन जातकों के लिए अभिशाप ।
मेरी पुस्तक लिखने की एक ही चाह रही है कि में विज्ञ पाठकों के सामने वास्तविक स्थिति को रख सकूँ। इसमें मैंने अपनी ओर से न तो कुछ जोड़ा है, न कुछ छिपाने की कोशिश की है। शास्त्रों में मुझे जो मिला वह मैंने पाठकों के समक्ष रखा है। मेरे मित्रों व विद्यार्थियों ने जो अनुभव बतलाए उनको लेखनी से पंक्तिबद्ध किया है।
पुस्तक पढ़ने के बाद पाठक अनुभव करेंगे कि कालसर्प योग वास्तव में जीवन में सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव डालता है। यह पूर्व जन्मों के कर्मों की ओर संकेत देता है। यह कार्मिक योग है। जातक पर प्रभाव ज़रूर डालता है। कालसर्प योग वाले जातक किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए जन्म लेते हैं। उनका जीवन संघर्षमय रहता है। यदि पूर्व जन्मों में किसी प्राकृतिक नियम का उल्लंघन किया है या किसी जीव को कष्ट पहुँचाया है या अशुभ बचनों को अर्जित किया है, बद-दुआओं को अर्जित किया है तो जातक को इस जन्म में उसका फल भोगना पड़ता है यह ज्योतिष का आधार भी है। कालसर्पयोग सीप-सीढ़ी के खेल की तरह जातक को जीवन संघर्ष में ऊपर व नीचे, हार व जीत होती रहती है। साँप की तरह टेढ़ा मेढ़ा चलता रहता है।
₹75.00 -
कुण्डली मिलान
₹180.00पुस्तक के बारे में
विवाह जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना है। जातक के माता-पिता इसे पूर्ण विचार-विमर्श करके करना चाहते हैं। गृहस्थ जीवन समाज का आधार है। इसके सुखी होने से बूढ़े, बच्चे व समाज सब ओर प्रसन्नता व हर्षोल्लास फैलता है। समाज में शान्ति व्यवस्था व हर्षोल्लास स्थापित हो इसको ध्यान में रखकर यह पुस्तक लिखी गई है।
विभिन्न संस्कारों में परस्पर विरोधी बातों का समन्वय करते हुए दक्षिण व उत्तर भारतीय रूपों व मान्यताओं का समाहार करते हुए लेखक ने विस्त त जानकारी देने की कोशिश की है। विवह के अवसर पर पूर्ण ज्ञान देने के लिये आयु निर्णय, दोष साम्य, मांगलिक दोष व विवाह के समय का निर्धारण, दर्शानर्तदशा साम्य आदि का विचार किया गया है। कन्या व वर में पाये जाने वाले अशुभयोगों की जानकारी दी गई है। विवाह की प्रत्येक समस्या को सुलझाने की पूर्ण रूपेण कोशिश की गई है।
प्रत्येक दोष का परिहार दिया गया है तथा ाधारण तौर पर पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तार भी अलग से दिया गया है। जिससे कुण्डली मिलान एवं विवाह पर एक अनूठी पुस्तक बन पड़ी है। यह केवल विद्यार्थियों के लिए ही नहीं अपितु कुण्डली मिलान करने वाले विद्वान पंडितों के लिये भी यह एक उपयोगी पुस्तक है।
₹200.00 -
गणेश होरा शास्त्रम्भाव विवेचनभाग – 1
₹250.00पुस्तक के बारे में
इस पुस्तक में, वर्णित सिद्धांत वीरभद्र ज्योतिष पर आधारित तथा वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार, यथासंभव व्यवस्थित हैं। पुस्तक की विषय वस्तु का प्रारूप, इस प्रकार तैयार किया गया है, कि मौलिक ज्योतिष सिद्धांतों (परिचय), विभिन्न भावों में स्थित ग्रहों के प्रभावों, भाव विश्लेषण तथा लग्न भाव से द्वादश भाव तक उपयुक्त उदाहरण कुण्डलियों सहित, सभी भावों का परिज्ञान प्रबुद्ध पाठकों को प्रदान किया जा सके। प्रथम छह स्थानों की व्याख्या के पश्चात्, एक उदाहरण कुण्डली का, प्रथम छह भावों के लिए, विस्तृत विश्लेषण किया गया है एवम् शेष छह स्थानों का विस्तृत विश्लेषण उनकी व्याख्या के पश्चात् किया गया है। तत्पश्चात् बारह स्थानों का विश्लेषण किया गया है। बारह भावों, भावेशों और ग्रहों के पारस्परिक सम्बन्धों पर इसमें, न केवल यथेष्ट तथ्य हैं, अपितु उनको तर्कसंगत रूप से समझाया भी है। पाठकों को अवश्य ही इससे लाभ होगा।
₹300.00 -
गीता मंत्र गंगोत्री
₹290.00श्रीमद्भगवद्गीता को महाकाव्य महाभारत का प्राण स्वीकारा गया है जो धरतीवासियों के लिए प्रार्थना पथ नहीं, बल्कि अलौकिक प्रसादामृत और पंचामृत है जिसकी एक बूँद ही मानव का ब्रह्म में विलय करके उसे मोक्षगति प्रदान करके अमरत्व की ओर प्रशस्त करती है। श्रीमद्भगवदगीता की मंत्रशक्ति से प्रायः अधिकांश भक्तजन, साधक, आराधक, पाठक तथा जिज्ञासुगण अनभिज्ञ हैं जिसे प्रबुद्ध पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करना अपेक्षित है। गीता की मंत्रात्मक शक्ति एवं उसकी व्याख्या, गीता मंत्र गंगोत्री में सहज और सघन स्वरूप में सन्निहित है। गीता मंत्र गंगोत्री बारह अध्यायों में व्याख्यायित विभाजित है जिन्हें अग्रांकित नामों से शीर्षांकित किया गया है:
₹350.00 -
गोचर फल विचार
₹130.00वर्तमान पुस्तक “गोचर फल विचार” में गोचर-फल-विकास के सेल अध्यायों में प्रकाश डाला गया है। प्रथम अध्याय में दर्शन फल विचार के महत्व पर संक्षेप में प्रकाश डाला गया है। द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम, पष्ठ, सप्तम, अष्टम और नवम अध्यायों में शास्त्रीय ग्रंथों में क्रमशः नारद-संहिता, बृहसंहिता, फलदीपिका, ज्योतिषाभरण, ज्योतिषार्घव-नवनीतम् ज्योतिषादेशमार्ग, कालप्रकाशिका, बृहज्ज्योतिषसार और फलित-मार्तण्ड में ज्योतिष शास्त्र से संबंधित सिद्धांतों का वर्णन किया गया है। शास्त्रीय ग्रंथों में जन्मकालीन चन्द्र-नक्षत्र के आधार पर ही दर्शन फल विचार का सारा ताना-बाना बना हुआ है जिसमें स्थायित्व नहीं बताया जा सकता।
₹150.00 -
गोचर फलदर्पण (एक आधुनिक और वैज्ञानिक अध्ययन)
₹250.00* ज्योतिष शास्त्र के गोचर विषय पर लिखी गयी पहली पुस्तक जिसमें लेखक के वर्षों पढ़ाने के अनुभव का निचोड़ है।
* क्रमवार ढंग तथा उदाहरणों के माध्यम से गोचर की अनूठी और सही व्याख्या ।
* प्राचीन सिद्धान्तों को आधार मानकर वर्तमान काल में गोचर की अचूक उपयोगिता ।
* गोचर का वर्गों में प्रयोग-एक अद्वितीय विधि ।
* समुदाय अष्टक वर्ग और सर्वाष्टक वर्ग के सूक्ष्म भेद तथा गोचर के अभिनव प्रयोग।
* अष्टक वर्ग में गोचर देखकर ‘दिन कैसा बीतेगा’ बताने में प्रवीणता आदि-आदि अनेक व्यावहारिक उपयोगों पर मौलिक पुस्तक ।
₹280.00 -
ग्रह योग संक्षेपिका
₹320.00ग्रन्थ-परिचय
ग्रहयोगों की महत्ता का अनुमान कोई प्रबुद्ध ज्योतिष प्रेमी ही लगा सकता है। कितने ही जन्मांगों का गहन विश्लेषण करने पर भी, उनके मध्य सन्निहित मर्म को तब तक नहीं जाना जा सकता, जब तक ग्रहयोगों और उनके परिणाम का सम्यक् ज्ञान न हो। डा. राधाकृष्णन, पं. जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गाँधी, डा. राजेन्द्र प्रसाद एवं नरेन्द्र मोदी आदि के अत्यंत साधारण दिखने वाले जन्मांगों का रहस्य ग्रहयोगों के संज्ञान के अभाव में कदापि स्पष्ट नहीं हो सकता है। वस्तुतः ग्रहयोग ज्योतिष शास्त्र की आत्मा है। ग्रहयोगों की उपेक्षा करके जन्मांग में छिपे रहस्य को कदापि नहीं जाना जा सकता चाहे ग्रह स्थितियों, उनके बलाबल, दृष्टि, युति, स्वामित्व, नक्षत्र, राशि, भाव आदि की कितनी भी व्याख्या की जाए। ग्रहों का अपनी उच्च या नीच राशि में स्थित होना, अनुकूल फल प्रदान करेगा या प्रतिकूल, यह ग्रहयोगों पर निर्भर करता है। प्रायः देखने में आता है कि जिन जन्मांगों में छह ग्रह भी अपनी उच्च राशि में स्थित हैं, वह नितांत सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं; तथा जिनके जन्मांगों में अनेक नीच राशिस्थ ग्रह हैं, वह सतह से उठकर शिखर तक पहुँचे हैं। इसका रहस्य तभी स्पष्ट हो सकता है जब ग्रहयोगों के सम्यक् संज्ञान एवं सटीक क्रियान्वयन का अनुमान हो।
ग्रह योग संक्षेपिका के अध्ययन, अनुसंधान व अभ्यास के साथ-साथ ग्रहयोगों के मनन, चिंतन और मंथन में अत्यन्त सुगमता होगी। जो जिज्ञासु ज्योतिष प्रेमी एक दृष्टि में ग्रहयोगों को आत्मसात् करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक शीघ्र संदर्भित पुस्तिका के समतुल्य है। श्रीमती मृदुला त्रिवेदी एवं श्री टी.पी. त्रिवेदी ने अथक चेष्टा की है कि कोई भी ग्रहयोग, जो किसी भी ग्रहयोग से सम्बन्धित कृति में सन्निहित है, वह इस कृति के अन्तर्गत अवश्य उपलब्ध हो। लगभग 1200 ग्रहयोगों का संदर्भ, उनकी परिभाषा एवं परिणाम इस कृति का वैशिष्ट्य है। प्रबुद्ध और प्रखर ज्योतिष प्रेमियों को, जो मात्र योग की संरचना एवं उनके परिणाम के विषय में जानना चाहते हैं, उनके लिए इस कृति का अध्ययन मात्र ही पर्याप्त है।
ग्रह योग संक्षेपिका को सात अध्यायों में विभाजित किया गया है–1. विविध योग, 2. धन योग, 3. विवाह योग, 4. संतान योग, 5. आयु योग, 6. भवन एवं वाहन योग, तथा 7. विद्या, बुद्धि एवं शिक्षा योग।
ग्रह योग संक्षेपिका ग्रहयोगों पर केन्द्रित एक सम्पूर्ण व सरल कृति है जिसके अध्ययन से किसी भी जन्मांग में निर्मित होने वाले अन्यान्य ग्रहयोगों को रेखांकित करना सुगम है। अतः यह समस्त प्रबुद्ध पाठकों, जिज्ञासु छात्रों तथा विद्वान ज्योतिर्विदों के लिए पठनीय, अनुकरणीय, सराहनीय एवं संग्रहणीय ग्रन्थ है।
₹400.00 -
ग्रहफल विचारप्लूटो नेपच्यून व यूरेनस सहित
₹250.00पुस्तक एक दृष्टि में
बहुधा ग्रह अपने नैसर्गिक कारकत्व के साथ, जिस भाव में बैठें या जिस भाव के स्वामी हों उनका फल देते हैं। अतः पुस्तक का आरंभ व समापन भाव विवेचन से हुआ है। देखें पृष्ठ 1-18 व परिशिष्ट पृष्ठ 275-278।
अध्याय दो में भाव विचार के नियम (भाव संबंधी शुभता-अशुभता का बोध) तो परिशिष्ट 2, में भावेश की भाव गत स्थिति का फल दिया है। देखें पृष्ठ 19-30, तथा पृष्ठ 279-295।₹300.00 -
चद्र दशा फलदीपिका
₹400.00चन्द्रमा अनादि काल से सौन्दर्य का प्रतीक स्वीकारा गया है। चन्द्रमा के दर्शन मात्र से जीवन की अनेक क्लिष्ट स्थितियों के समाधान का पथ प्रशस्त होता है। दर्शन करने में चन्द्रमा जितना निर्मल कोमल और स्वच्छ प्रतीत होता है, वास्तव में देह उतना ही जटिल है। चन्द्रमा के महत्व को समझना सुगम है परंतु उसके वास्तविक फलाफल का सटीक विवेचन अधिक दुःसाध्य है। पृथ्वी के चारों ओर परिभ्रमण करने वाला चन्द्रमा, पृथ्वीवासियों पर सर्वाधिक प्रभाव डालता है इसीलिए चन्द्रमा को जन्मांग का प्राप्ण घोषित किया गया है। चन्द्रमा का बलाबल और स्थिति ही जन्मांग की प्रबलता या निर्बलता का आधार है। चन्द्रमा की विंशोत्तरी दशा पर केन्द्रित अनुकूल-प्रतिकूल फलाफल का तलस्पर्शी अध्ययन और उसके क्रियान्वयन हेतु अनेक शोधपरक सिद्धान्तों तथा विशिष्ट सूत्रों का उपयुक्त समायोजन चन्द्र दशाफल दीपिका में किया गया है ताकि चन्द्रमा की दशान्तर्दशा के अन्तर्गत होने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं का सटीक आकलन किया जाना संभव हो सके।
इस कृति को 12 अध्यायों में विभाजित किया गया है जिनके अध्ययन से चन्द्रमा की महादशा व अंतर्दशा के विषय में सम्यक् संज्ञान प्राप्त करके सटीक भविष्यकथन किया जा सकता है: 1. ग्रहस्थिति एवं फलकथन, 2. भावगत दशाफल विवेचन, 3. ज्योतिष शास्त्र में चन्द्रग्रह का महत्व, 4. विविध भावगत चन्द्रमा की दशा का फल, 5. बारह जन्म राशियों का फल. 6. बारह राशियों में चन्द्रमा का फल, 7. लग्न फल, 8. विविध लग्नों के लिए भावगत चन्द्रमा का फल. 9. चन्द्रमा की महादशा का संभावित फलाफल, 10. चन्द्रमा की महादशा का फल, 11. चन्द्रमा की महादशा के मध्य अंतर्दशाओं का फल, तथा 12. चन्द्र पीड़ा परिहार विधान।
यह एक व्यावहारिक और ज्योतिष शास्त्र पर केन्द्रित शताधिक शोध प्रबन्धों के रचनाकार ज्योतिर्विदों का प्रथम प्रयास है कि विंशोत्तरी दशा पर केन्द्रित प्रत्येक ग्रह की महादशा और अंतर्दशाओं का इतना वृहद, संपुष्ट और अनुभूत फलकथन दशाफल दीपिका की श्रृंखला के अंतर्गत किया जाना संभव हो सका। सर्वविदित है-कि विश्व में सबसे अधिक उपयोग विंशोत्तरी दशाओं का ही होता है इसलिए इस दशाफल दीपिका श्रृंखला को विंशोत्तरी दशाओं तक ही सीमित रखा गया है। विश्वास है कि विंशोत्तरी दशाफल से सम्बन्धित कृति के अध्ययन की आंकाक्षा व समस्त दशाओं की संरचना के परिणाम से सम्बन्धित जिज्ञासा का सशक्त सारभूत व सारगर्भित समाधान है चन्द्र दशाफल दीपिका जो प्रबुद्ध पाठकों, जिज्ञासु छात्रो व ज्योतिष शास्त्र के अध्येताओं के लिए पठनीय, अनुकरणीय एवं संग्रहणीय है।
₹500.00



















