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Comprehensive VEDIC Numerology vol -II
₹240.00Name numerology in Vedic esotericism is just one of four different types of personal number interpretation systems. Each of the four systems represents a certain aspect of our ₹300.00 -
Remedial Astrology
₹230.00indu Remedial Astrology is a compilation and collection of my constant research efforts on various aspects of Remedial Astrology made during last 35 years in a bid to get it recognised as an independent paper in higher examinations of Astrology. If studies of Astrology have to be made useful and attractive in the present century, we have to expand the scope of two important wring of Astrology viz Vocational Astrology and Remedial Astrology. I have made an extensive and intensive research on both. A part of my research in vocational Astrology stands incorporated in my book Astrological Counselling published by Nishkaam Peeth Prakashan, New Delhi. My another Voluminous Book “Principles and practices of vocational Astrology” is belong published by Alpha Publication Delhi.
₹280.00 -
अध्यात्म ज्योतिष भाग 1
₹240.00इस पुस्तक का उद्देश्य मात्र इतना भर कहना है, कि नीच व हीन बली शुभग्रह भले ही लौकिक सुविधाओं के लिए अशुभ या अनिष्टकर जान पड़ें, किन्तु साधन मार्ग पर आगे बढ़ाकर संत या सिद्ध बनने में उपयोगी होते हैं। मनुष्य को तमोगुणी प्रवृत्ति का त्याग, रजोगुणी स्वभाव का नियमन/नियंत्रण तो सात्विक स्वभाव को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। सत्य, अहिंसा, अस्तेय धर्म के सिद्धान्त निश्चय ही व्यक्ति व समाज की प्रगति व समृद्धि के लिए आवश्यक हैं।
₹300.00 -
अध्यात्म ज्योतिष भाग 2
₹240.00इस पुस्तक का उद्देश्य मात्र इतना भर कहना है, कि नीच व हीन बली शुभग्रह भले ही लौकिक सुविधाओं के लिए अशुभ या अनिष्टकर जान पड़ें, किन्तु साधन मार्ग पर आगे बढ़ाकर संत या सिद्ध बनने में उपयोगी होते हैं। मनुष्य को तमोगुणी प्रवृत्ति का त्याग, रजोगुणी स्वभाव का नियमन/नियंत्रण तो सात्विक स्वभाव को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। सत्य, अहिंसा, अस्तेय धर्म के सिद्धान्त निश्चय ही व्यक्ति व समाज की प्रगति व समृद्धि के लिए आवश्यक हैं।
₹300.00 -
अनिष्ट ग्रह उपचार
सभी द्वादश भावों में शुभ व अशुभ प्रभाव के योग दिए हैं। इसके बाद उपचार संबंधी मंत्र, स्तोत्र व कवच दिए हैं। पुस्तक का आरंभिक उपाय के उपयोग दृष्टिने वाले पाँच उदाहरणों से हुआ है। इसके बाद ग्रहों पर नक्षत्रों का प्रभाव तथा उपचार के सिद्धान्त पर चर्चा हुई है। अध्याय 4 में अनिष्ट ग्रह गोचर में वैदिक मंत्र का उपयोग तथा अध्याय 5 में कुछ सरल व सटीक उपचारों पर चर्चा हुई है
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अनिष्ट ग्रह उपचार
₹300.00ज्योतिष में अनिष्ट से रक्षा
ज्योतिष में उपाय पक्ष की उपयोगिता के पाँच उदाहरण
ज्योतिषीय उपचार के सिद्धांत
अनिष्ट ग्रह का उपचार और वैदिक मंत्र₹350.00 -
अष्टके वर्गसिद्धांत एवं फलित
₹110.00ज्योतिष शास्त्र में अष्टक वर्ग पद्धति का गौरवपूर्ण स्थान है। पलक झपकते ही इसके द्वारा जातक के स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति, आध्यात्मिक विकास, आजीविका तथा अन्य अच्छी-बुरी सम्भावनाओं की सही जानकारी प्राप्त की जा सकती है। अन्य किसी विद्या में अष्टक वर्ग सरीखा अचूकता से गोचर ग्रह के प्रभाव का आकलन सम्भव ही नहीं। अष्टक वर्ग सारिणी पर दृष्टिपात करने से जातक की आजीविका क्षेत्र में सफलता व सम्पन्नता तथा विभिन्न ग्रहों की दशा का फल सटीक व प्रभावशाली ढंग से बताया जा सकता है। अष्टक वर्ग के अभाव में ये जान पाना असम्भव है कि श्री गुलजारीलाल नन्दा तथा श्री चरणसिंह इतनी अल्प अवधि के लिए प्रधानमंत्री क्यों बने तथा पंडित जवाहरलाल नेहरू एवम् इंदिरा गांधी का प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल इतना लम्बा क्यों चला।
भयप्रद साढ़े साती के परिणाम भी अष्टक वर्ग की सहायता से सहज व सही ढंग से जाने जाते हैं। इसकी सहायता से पता लगता है कि शनि के अष्टक वर्ग में अधिक बिन्दु पाने वाली राशि पर शनि का संचार दुख व हताशा नहीं देता अपितु धैर्य, उत्साह व कार्यक्षमता बढ़ाता है।
इस विद्या का प्रयोग मुहुर्त विचार में भी किया जा सकता है। किस दिशा में सफलता व सम्पन्नता मिलेगी, किस तरह की पत्नी शुभ व सौभाग्यप्रद् होगी आदि। चुनाव में पर्चा भरने, साक्षात्कार पर जाने, औषधि लेने या अन्तरिक्ष यान छोड़ने का सही समय अष्टक वर्ग द्वारा सहज बताया जा सकता है। मित्र सहयोगी के चयन में भी अष्टक वर्ग उपयोगी है
₹120.00 -
अष्टाध्यायी
₹130.00भारतीय ज्योतिष का संक्षिप्पो इतिहास, भगवान श्रीराम से लेकर मनमोहन सिंह तक तेईस राजप्रमुखों की जन्मकुंडलियों की विवेचना, कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों के दुःखद अंत की परम्परा का रहस्य, साथ ही न्यायाधीशों-उद्योगपतियों तथा ब्यूरोक्रेट्स की जन्मकुंडलियों की विवेचना से परिपूर्ण यह पुस्तक धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष- इन चार वैदिक त्रिकोणों पर आधारित भारतीय ज्योतिष का पुनर्मूल्यांकन तथा समाधान भी प्रस्तुत करती है। लेखक ने वैदिक त्रिकोणों के आधार पर रत्नों के चुनाव तथा ग्रहों की शांति के अकाट्य उपाय बताये हैं जो इस पुस्तक की अनुपम उपलब्धि है। भाग्यशाली रत्नों के चुनाव तथा अरिष्ट निवारक ज्योतिषीय उपायों की पृथक् से चर्चा सम्मिलित कर इस पुस्तक को और भी उपयोगी बना दिया गया है। ‘प्रश्नमार्ग’ के सुझावों तथा ‘कालसर्प योग की शांति’ को पाठकों के विशेष आग्रह पर शामिल किया गया है। आठ अध्यायों की यह लघु पुस्तक ज्योतिष के विभिन्न अंगों-यथा इतिहास, वैदिक त्रिकोणों के आलोक में ज्योतिष का पुनर्मूल्यांकन, उपचारीय ज्योतिष, मेडिकल ऐस्ट्रोलौजी तथा वोकेशनल ऐस्ट्रोलौजी की दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण तथा उपयोगी पुस्तक है।
₹150.00 -
आजीविका विचारज्योतिष के झरोखे सेभाग-1
₹300.00यह पुस्तक ज्योतिषियों के लिए ही नहीं वरन व्यावसायिक सलाहकारों तथा मानवीय संसाधनों के नियोजकों के लिए भी अत्यंत उपयोगी लगती है। क्योंकि, विद्वान लेखक ने इस पुस्तक में व्यवसाय संबंधी ज्योतिष के लगभग सभी नियमों का श्रेष्ठ संकलन कि
₹350.00 -
आपका भाग्यरत्न
“आपका भाग्य रत्न कौन-सा रत्न है” इसकी संपूर्ण जानकारी देने वाली हिंदी भाषा की एकमात्र प्रामाणिक किताब
आपका भाग्यरत्न
ग्रह एवं रत्नों की उत्पत्ति, इतिहास, भौतिक गुण, औषधि गुण, दैवी शक्ति, रत्नों की परीक्षा, स्वर्ग लोक एवं मृत्यु लोक के रत्न, उनका प्रभाव, रत्न धारण विधि, पर्यायी रत्न, भाग्य रत्न कौन सा? उपरत्नों की जानकारी, पंचदशी त्रिशांति यंत्र, नवग्रह मुद्रिका, नवग्रहों के रत्नों की पूजा, मंत्र, जप आदि की जानकारी से अद्यतित हिंदी की वास्तविक भाषा। -
आयुष्य विचार
₹210.00आयुष्य विचार या आयुर्दाय मनुष्य की जीवन अवधि को जानने की रोचक विधि है। भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद द्वारा आयोजित ज्योतिष विशारद के प्रश्न पत्र-III का यह प्रथम भाग है।
₹250.00 -
उद्यम उन्नति
₹400.00ग्रन्थ-परिचय
यदि जीवन का लक्ष्य उन्नति है तो व्यक्ति का उद्यम ही यथार्थ है। उद्यम के अभाव से उन्नति एवं प्रगति संभव नहीं होती और वह दिशाषिहीन जीवन को जन्म देती है। उद्यम पूर्व उन्नति का संयुक्त पर्याय है आजीविका अथवा व्यवसाय। व्यवसाय की महत्ता तथा समय की सत्ता के मध्य निर्मित होने वाले समीकरण का सुगम समाधान है, व्यवसाय पक्ष पर केन्द्रित यह अद्भुत कृति उद्यम एवं उन्नति। खेद का विषय है कि ज्योतिष शास्त्र के विविध पक्षों से सम्बन्धित स्तरीय सामग्री और समृद्ध साहित्य का हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में अभाव है। लगभग समस्त शास्त्रीय ज्योतिष ग्रन्थों में व्यवसाय पक्ष पर अत्यन्त अल्प सामग्री ही उपलब्ध है। व्यवसाय पक्ष पर आधारित सभी शोध कार्यों का अध्ययन अनिवार्य है जो भारतवर्ष की बहुचर्चित अंग्रेजी पत्रिका ‘द एस्ट्रोलॉजिकल मैगजीन’ में अनेक अनुसंधानकर्ताओं द्वारा पूर्व लगभग 70 वर्षों से ज्योतिष विद्या के उत्तरोत्तर उत्थान हेतु प्रस्तुत किया जाता रहा है।
जातक के व्यवसाय के सटीक संज्ञान हेतु दशम भाव के साथ-साथ द्वितीय भाव का भी विश्लेषण सम्यक रूप से किया जाना चाहिए। प्रत्येक नौकरी या व्यापार के लिए पृथक-पृथक् ग्रह स्थितियों, कारकों, भावों और भावाधिपतियों की विशिष्ट स्थितियों का अध्ययन अपेक्षित है।
महाकाय, महाकाल, तिमिराकार शनि ग्रह को दुर्दमनीय दारुण दुःखों व दुःखों के संत्रास और विविध व्यथाओं का पर्याय आऔर प्रदाता स्वीकारा जाता है। इस कृति में जन्मांग में विद्यमान शनि की स्थिति के आधार पर उपयुक्त व्यवसाय, व्यापार अथवा नौकरी की दिशा का सटीक अनुमान करने की प्रामाणिक शोध प्रस्तुत की गई है। जहाँ एक एक ओर 3 सभी को प्रकंपित और भयमीत करने वाला शनि जातक को सतह से उठाकर शिखर तक पहुँचाने के अद्भुत सामर्थ्य से अभिसिंचित है, वहीं दूसरी ओर शनि की साढ़ेसाती और ढड्या, कब अनुकूल और प्रतिकूल फल प्रदान करती है, इसका भी सम्यक् संज्ञान आवश्यक है जो इस कृति में विविध व्यावहारिक उदाहरणों एवं प्रसंगों के माध्यम से आविष्ठित है।
उद्यम एवं उन्नति नामक इस कृति को विविध 10 अध्यायों में विभाजित और व्याख्यायित किया गया है। व्यवसाय पक्ष के विविध संताप से ग्रस्त मानव की पीड़ा का सनाधान प्रस्तुत करने के प्रयोजन से इस कृति में उपयुक्त परिहार को भी स्थान प्रदान किया गया है। परिहार के सविधि अनुसरण से नौकरी, व्यापार, अवनति, हानि, निलम्बन आदि समस्त संत्रास को मधुरिम मुस्कान के मधुमास में रूपांतरित करना संभव है। यह शोध प्रबन्ध समस्त ज्योतिष प्रेमियों, जिज्ञासु पाठकों, प्रबुद्ध छात्रों एवं श्रेष्ठ ज्योतिर्विदों द्वारा पठनीय, अनुकरणीय एवं संग्रहणीय है।
₹500.00 -
उपचारीय ज्योतिष कौमुदी
₹110.00पुस्तक के बारे में
गत कुछ वर्षों में उपचारीय ज्योतिष को युक्तिसंगत स्वरूप प्रदान करने में जिन कुछेक विद्वानों ने अमूल्य योगदान दिया है उनमें पाठकजी का विशिष्ट स्थान है। एल्फा पब्लिकेशन के विशेष आग्रह पर पाठकजी ने उपचारीय ज्योतिष सम्बन्धी अपने शोधपूर्ण विचार कई पुस्तकों की एक श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है, जिसकी प्रथम कड़ी “उपचारीय ज्योतिष कौमुदी” के रूप में आपके सम्मुख प्रस्तुत है। यह पुस्तक छः अध्यायों की है किन्तु, इसे पढ़कर तथा समझकर कोई भी मेधावी ज्योतिषी उपचारीय ज्योतिष के क्षेत्र में पारंगत हो सकता है। प्रथम अध्याय में, वर्णित ज्योतिष के मूलभूत सिद्धान्त को समझकर आप कुंडली के बारह भावों से सम्बन्धित समस्याओं को हल करने में समर्थ हो सकते हैं। द्वितीय अध्याय में, रत्नों की आवश्यकता पर जो शोधपूर्ण विस्तृत सामग्री दी गई है वैसी उपयोगी सामग्री आपको अन्यत्र अभी तक देखने को नहीं मिली होगी। तृतीय अध्याय में, लेखक ने पराशरीय उपचार विधि की जो झलक प्रस्तुत की है वह पूर्णतः शास्त्रोक्त होते हुए भी देश-काल-पात्र के समीचीन है। चतुर्थ अध्याय में लेखक ने पैंतीस दोषपूर्ण ग्रहयुतियों के परिहार बताये हैं। पंचम अध्याय में, ग्रहों की शान्ति हेतु लेखक ने तेईस हिन्दू पौराणिक देवी-देवताओं के मंत्र जाप तथा स्तुति का जो विस्तृत विवरण दिया है उससे देवोपचार में दक्षता आ सकती है। षष्ठ अध्याय में, लाल किताब के कुछ सुप्रसिद्ध टोटके दिये गये हैं जिसमें कालसर्पयोग को शमन करने के टोटके भी शामिल हैं। यदि “जातक चन्द्रिका” को ललित ज्योतिष के आधार ग्रन्थ के रूप में मान्यता प्रदान की जा सकती है, तो कोई कारण नहीं कि “उपचारीय ज्योतिष कौमुदी” को उपचारीय ज्योतिष के आधार ग्रन्थ के रूप में मान्यता न दी जाये। पाठकों के आग्रह पर हम शीघ्र ही उपचारीय ज्योतिष श्रृंखला में पाठक जी की अन्य महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का भी प्रकाशन करने जा रहे हैं।₹130.00 -
कालचक्र दशा से फलित
₹70.00पुस्तक के बारे में
वर्तमान समय में जो पुस्तकें कालचक्र दशा में सम्बन्धित है, उनमें ऐसे ही उदाहरणों को रखा गया है जिसमें देहादि संज्ञक राशि या उनके स्वामी पीड़ित हैं। जबकि उन पुस्तकों में ऐसे उदाहरणों को भी रखा जाना चाहिए था जिनमें देहादि संज्ञक राशि दशा में मृत्यु नहीं हुई हो, परन्तु शास्त्रीय सिद्धान्त लागू होते हों, ताकि विद्यार्थीगण दोनों स्थितियों से भिज्ञ हो जाते।
कुछ उदाहरणों में मृत्यु दशा ही गलत लगा रखी है।
कुछ उहाहरणों में प्रथम चक्र की देहादि संज्ञक राशि दशा में मृत्यु होना दर्शाया गया है जबकि जातक द्वितीय चक्र की दशा राशि में मृत्यु को प्राप्त हुआ है।
अन्तर्दशा गणना हेतु परमायु वर्षों के महत्त्व को नहीं बताया गया है।
₹80.00 -
कालसर्पयोग
₹70.00लेखक की चाह
हो सकता है कि कालसर्प योग पर बाज़ार में अन्य अनेक पुस्तकें विज्ञ पाठकों के लिए उपलब्ध हों। परन्तु कुछ लेखक कालसर्प योग के द्वारा पाठकों में भय या घम उत्पन्न करना चाहते हैं, तो कुछ लेखक कालसर्प योग को केवल अन्य ज्योतिष योगों की भान्ति योग मानकर चलना चाहते हैं। परन्तु अनुभव में आया है कि वास्तविक स्थिति कुछ और ही है। यह भी मांगलिक दोष, विष कन्या या गोचर की साढ़ेसाती की भान्ति जातक के जीवन के कुछ तथ्यों की ओर संकेत करता है। कुछ जातकों के लिए कालसर्प दोष वरदान हे तो कुछ के लिए अभिशाप। मैंने कालसर्प का इसी दृष्टि से अध्ययन किया है कि कालसर्प किनके लिए वरदान है तथा किन जातकों के लिए अभिशाप ।
मेरी पुस्तक लिखने की एक ही चाह रही है कि में विज्ञ पाठकों के सामने वास्तविक स्थिति को रख सकूँ। इसमें मैंने अपनी ओर से न तो कुछ जोड़ा है, न कुछ छिपाने की कोशिश की है। शास्त्रों में मुझे जो मिला वह मैंने पाठकों के समक्ष रखा है। मेरे मित्रों व विद्यार्थियों ने जो अनुभव बतलाए उनको लेखनी से पंक्तिबद्ध किया है।
पुस्तक पढ़ने के बाद पाठक अनुभव करेंगे कि कालसर्प योग वास्तव में जीवन में सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव डालता है। यह पूर्व जन्मों के कर्मों की ओर संकेत देता है। यह कार्मिक योग है। जातक पर प्रभाव ज़रूर डालता है। कालसर्प योग वाले जातक किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए जन्म लेते हैं। उनका जीवन संघर्षमय रहता है। यदि पूर्व जन्मों में किसी प्राकृतिक नियम का उल्लंघन किया है या किसी जीव को कष्ट पहुँचाया है या अशुभ बचनों को अर्जित किया है, बद-दुआओं को अर्जित किया है तो जातक को इस जन्म में उसका फल भोगना पड़ता है यह ज्योतिष का आधार भी है। कालसर्पयोग सीप-सीढ़ी के खेल की तरह जातक को जीवन संघर्ष में ऊपर व नीचे, हार व जीत होती रहती है। साँप की तरह टेढ़ा मेढ़ा चलता रहता है।
₹75.00 -
कुण्डली मिलान
₹180.00पुस्तक के बारे में
विवाह जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना है। जातक के माता-पिता इसे पूर्ण विचार-विमर्श करके करना चाहते हैं। गृहस्थ जीवन समाज का आधार है। इसके सुखी होने से बूढ़े, बच्चे व समाज सब ओर प्रसन्नता व हर्षोल्लास फैलता है। समाज में शान्ति व्यवस्था व हर्षोल्लास स्थापित हो इसको ध्यान में रखकर यह पुस्तक लिखी गई है।
विभिन्न संस्कारों में परस्पर विरोधी बातों का समन्वय करते हुए दक्षिण व उत्तर भारतीय रूपों व मान्यताओं का समाहार करते हुए लेखक ने विस्त त जानकारी देने की कोशिश की है। विवह के अवसर पर पूर्ण ज्ञान देने के लिये आयु निर्णय, दोष साम्य, मांगलिक दोष व विवाह के समय का निर्धारण, दर्शानर्तदशा साम्य आदि का विचार किया गया है। कन्या व वर में पाये जाने वाले अशुभयोगों की जानकारी दी गई है। विवाह की प्रत्येक समस्या को सुलझाने की पूर्ण रूपेण कोशिश की गई है।
प्रत्येक दोष का परिहार दिया गया है तथा ाधारण तौर पर पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तार भी अलग से दिया गया है। जिससे कुण्डली मिलान एवं विवाह पर एक अनूठी पुस्तक बन पड़ी है। यह केवल विद्यार्थियों के लिए ही नहीं अपितु कुण्डली मिलान करने वाले विद्वान पंडितों के लिये भी यह एक उपयोगी पुस्तक है।
₹200.00 -
गणेश होरा शास्त्रम्भाव विवेचनभाग – 1
₹250.00पुस्तक के बारे में
इस पुस्तक में, वर्णित सिद्धांत वीरभद्र ज्योतिष पर आधारित तथा वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार, यथासंभव व्यवस्थित हैं। पुस्तक की विषय वस्तु का प्रारूप, इस प्रकार तैयार किया गया है, कि मौलिक ज्योतिष सिद्धांतों (परिचय), विभिन्न भावों में स्थित ग्रहों के प्रभावों, भाव विश्लेषण तथा लग्न भाव से द्वादश भाव तक उपयुक्त उदाहरण कुण्डलियों सहित, सभी भावों का परिज्ञान प्रबुद्ध पाठकों को प्रदान किया जा सके। प्रथम छह स्थानों की व्याख्या के पश्चात्, एक उदाहरण कुण्डली का, प्रथम छह भावों के लिए, विस्तृत विश्लेषण किया गया है एवम् शेष छह स्थानों का विस्तृत विश्लेषण उनकी व्याख्या के पश्चात् किया गया है। तत्पश्चात् बारह स्थानों का विश्लेषण किया गया है। बारह भावों, भावेशों और ग्रहों के पारस्परिक सम्बन्धों पर इसमें, न केवल यथेष्ट तथ्य हैं, अपितु उनको तर्कसंगत रूप से समझाया भी है। पाठकों को अवश्य ही इससे लाभ होगा।
₹300.00 -
गीता मंत्र गंगोत्री
₹290.00श्रीमद्भगवद्गीता को महाकाव्य महाभारत का प्राण स्वीकारा गया है जो धरतीवासियों के लिए प्रार्थना पथ नहीं, बल्कि अलौकिक प्रसादामृत और पंचामृत है जिसकी एक बूँद ही मानव का ब्रह्म में विलय करके उसे मोक्षगति प्रदान करके अमरत्व की ओर प्रशस्त करती है। श्रीमद्भगवदगीता की मंत्रशक्ति से प्रायः अधिकांश भक्तजन, साधक, आराधक, पाठक तथा जिज्ञासुगण अनभिज्ञ हैं जिसे प्रबुद्ध पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करना अपेक्षित है। गीता की मंत्रात्मक शक्ति एवं उसकी व्याख्या, गीता मंत्र गंगोत्री में सहज और सघन स्वरूप में सन्निहित है। गीता मंत्र गंगोत्री बारह अध्यायों में व्याख्यायित विभाजित है जिन्हें अग्रांकित नामों से शीर्षांकित किया गया है:
₹350.00 -
गोचर फल विचार
₹130.00वर्तमान पुस्तक “गोचर फल विचार” में गोचर-फल-विकास के सेल अध्यायों में प्रकाश डाला गया है। प्रथम अध्याय में दर्शन फल विचार के महत्व पर संक्षेप में प्रकाश डाला गया है। द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम, पष्ठ, सप्तम, अष्टम और नवम अध्यायों में शास्त्रीय ग्रंथों में क्रमशः नारद-संहिता, बृहसंहिता, फलदीपिका, ज्योतिषाभरण, ज्योतिषार्घव-नवनीतम् ज्योतिषादेशमार्ग, कालप्रकाशिका, बृहज्ज्योतिषसार और फलित-मार्तण्ड में ज्योतिष शास्त्र से संबंधित सिद्धांतों का वर्णन किया गया है। शास्त्रीय ग्रंथों में जन्मकालीन चन्द्र-नक्षत्र के आधार पर ही दर्शन फल विचार का सारा ताना-बाना बना हुआ है जिसमें स्थायित्व नहीं बताया जा सकता।
₹150.00 -
ग्रह योग संक्षेपिका
₹320.00ग्रन्थ-परिचय
ग्रहयोगों की महत्ता का अनुमान कोई प्रबुद्ध ज्योतिष प्रेमी ही लगा सकता है। कितने ही जन्मांगों का गहन विश्लेषण करने पर भी, उनके मध्य सन्निहित मर्म को तब तक नहीं जाना जा सकता, जब तक ग्रहयोगों और उनके परिणाम का सम्यक् ज्ञान न हो। डा. राधाकृष्णन, पं. जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गाँधी, डा. राजेन्द्र प्रसाद एवं नरेन्द्र मोदी आदि के अत्यंत साधारण दिखने वाले जन्मांगों का रहस्य ग्रहयोगों के संज्ञान के अभाव में कदापि स्पष्ट नहीं हो सकता है। वस्तुतः ग्रहयोग ज्योतिष शास्त्र की आत्मा है। ग्रहयोगों की उपेक्षा करके जन्मांग में छिपे रहस्य को कदापि नहीं जाना जा सकता चाहे ग्रह स्थितियों, उनके बलाबल, दृष्टि, युति, स्वामित्व, नक्षत्र, राशि, भाव आदि की कितनी भी व्याख्या की जाए। ग्रहों का अपनी उच्च या नीच राशि में स्थित होना, अनुकूल फल प्रदान करेगा या प्रतिकूल, यह ग्रहयोगों पर निर्भर करता है। प्रायः देखने में आता है कि जिन जन्मांगों में छह ग्रह भी अपनी उच्च राशि में स्थित हैं, वह नितांत सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं; तथा जिनके जन्मांगों में अनेक नीच राशिस्थ ग्रह हैं, वह सतह से उठकर शिखर तक पहुँचे हैं। इसका रहस्य तभी स्पष्ट हो सकता है जब ग्रहयोगों के सम्यक् संज्ञान एवं सटीक क्रियान्वयन का अनुमान हो।
ग्रह योग संक्षेपिका के अध्ययन, अनुसंधान व अभ्यास के साथ-साथ ग्रहयोगों के मनन, चिंतन और मंथन में अत्यन्त सुगमता होगी। जो जिज्ञासु ज्योतिष प्रेमी एक दृष्टि में ग्रहयोगों को आत्मसात् करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक शीघ्र संदर्भित पुस्तिका के समतुल्य है। श्रीमती मृदुला त्रिवेदी एवं श्री टी.पी. त्रिवेदी ने अथक चेष्टा की है कि कोई भी ग्रहयोग, जो किसी भी ग्रहयोग से सम्बन्धित कृति में सन्निहित है, वह इस कृति के अन्तर्गत अवश्य उपलब्ध हो। लगभग 1200 ग्रहयोगों का संदर्भ, उनकी परिभाषा एवं परिणाम इस कृति का वैशिष्ट्य है। प्रबुद्ध और प्रखर ज्योतिष प्रेमियों को, जो मात्र योग की संरचना एवं उनके परिणाम के विषय में जानना चाहते हैं, उनके लिए इस कृति का अध्ययन मात्र ही पर्याप्त है।
ग्रह योग संक्षेपिका को सात अध्यायों में विभाजित किया गया है–1. विविध योग, 2. धन योग, 3. विवाह योग, 4. संतान योग, 5. आयु योग, 6. भवन एवं वाहन योग, तथा 7. विद्या, बुद्धि एवं शिक्षा योग।
ग्रह योग संक्षेपिका ग्रहयोगों पर केन्द्रित एक सम्पूर्ण व सरल कृति है जिसके अध्ययन से किसी भी जन्मांग में निर्मित होने वाले अन्यान्य ग्रहयोगों को रेखांकित करना सुगम है। अतः यह समस्त प्रबुद्ध पाठकों, जिज्ञासु छात्रों तथा विद्वान ज्योतिर्विदों के लिए पठनीय, अनुकरणीय, सराहनीय एवं संग्रहणीय ग्रन्थ है।
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